UPSC Civil Services Exam भारत की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। लाखों छात्र हर साल IAS, IPS, IFS जैसी सेवाओं में चयन पाने का सपना लेकर इस परीक्षा की तैयारी करते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में तीन मुख्य चरण होते हैं – Prelims, Mains और Interview। इनमें से Mains का चरण सबसे अधिक निर्णायक माना जाता है, क्योंकि इसी स्तर पर उम्मीदवार की लेखन क्षमता, विश्लेषण की योग्यता और विषय की गहरी समझ का वास्तविक मूल्यांकन होता है, खासकर UPSC Mains Optional Subject के माध्यम से।
UPSC Mains परीक्षा में कुल 9 पेपर होते हैं, जिनमें से 2 पेपर UPSC Mains Optional Subject के होते हैं। ये दोनों पेपर मिलकर 500 अंकों के होते हैं, जो अंतिम Merit List और Service Allocation को सीधे प्रभावित करते हैं। कई बार देखा गया है कि दो अभ्यर्थियों के GS और Essay में लगभग समान अंक होते हैं, लेकिन Optional Subject में बेहतर प्रदर्शन करने वाला उम्मीदवार चयन की दौड़ में आगे निकल जाता है। इसी कारण कहा जाता है कि UPSC में सफलता की सबसे बड़ी कुंजी सही UPSC Mains Optional Subject के चुनाव में छिपी होती है।
Optional Subject का चुनाव आसान नहीं होता। UPSC की सूची में 25 से ज्यादा विषय उपलब्ध हैं, और हर छात्र की पृष्ठभूमि अलग होती है। कोई Arts से आता है, कोई Science से, कोई Commerce से और कई छात्र ऐसे भी होते हैं जो पूरी तरह से नए विषय चुन लेते हैं। ऐसे में सवाल उठता है – कौन सा विषय चुनें? कौन सा स्कोरिंग रहेगा? क्या मेरे Background से मेल खाता है? क्या उसका Syllabus संभाल पाऊंगा? क्या मुझे Study Material और Guidance आसानी से मिलेगा?
इन्हीं सवालों का जवाब खोजने के लिए हमें गहराई से यह समझना होगा कि सही Optional Subject चुनने के लिए किन बिंदुओं पर ध्यान देना चाहिए। यह निर्णय जल्दबाजी में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि एक बार Subject तय हो जाए तो उसी पर आपकी मेहनत और Writing Practice टिकती है। यही कारण है कि Optional Subject का चुनाव UPSC Mains तैयारी का सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
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Table Of Content
- 1 UPSC Mains में Optional की जगह
- 2 Optional Subjects का नक्शा (समग्र नज़र)
- 3 चुनाव का फ्रेमवर्क: किन बातों पर निर्णय लें
- 4 UPSC Mains Optional Subject : आम गलतियाँ जिन्हें टालना है
- 5 टॉपर्स की सलाह और अनुभव
- 6 किस Background वाले के लिए कौन से Subjects अच्छे हो सकते हैं?
- 7 Subject Finalize करने का Step-by-Step तरीका
- 8 30-Day ट्रायल प्लान (Subject लॉक करने से पहले)
- 9 Subject फाइनल होने के बाद Study Plan
- 10 उपयोगी संसाधन (हैंडहोल्डिंग सेक्शन)
- 11 FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
- 12 निष्कर्ष
UPSC Mains में Optional की जगह
UPSC Mains परीक्षा कुल मिलाकर नौ पेपरों में आयोजित होती है। इनमें से दो पेपर केवल Qualifying Nature के होते हैं – एक अंग्रेज़ी भाषा और दूसरा भारतीय भाषाओं पर आधारित। इन दोनों में पास होना जरूरी है, लेकिन इनके अंक आपके अंतिम Merit में नहीं जुड़ते। बाकी के सात पेपर Merit तय करने में गिने जाते हैं। इनमें चार पेपर General Studies (GS I–IV), एक पेपर Essay, और दो पेपर Optional Subject के होते हैं।
Optional Subject के ये दो पेपर हर एक 250 अंकों के होते हैं, यानी कुल मिलाकर 500 अंक। यही 500 अंक अक्सर पूरे चयन की दिशा बदल देते हैं। उदाहरण के तौर पर, कई बार देखा गया है कि किसी अभ्यर्थी के GS पेपर में औसत अंक आए हों, लेकिन Optional में अच्छा प्रदर्शन करके उसने कुल अंक में बढ़त बना ली और IAS या अपनी पसंद की Service हासिल कर ली।
Optional Subject को लेकर खास बात यह भी है कि यह Candidate को अपनी ताक़त दिखाने का मौका देता है। General Studies सभी को बराबर पढ़नी पड़ती है, लेकिन Optional Subject वही चुन सकते हैं जिसमें उन्हें रुचि हो, पृष्ठभूमि का फायदा हो, या तैयारी आसान लगे। यही वजह है कि Optional का चुनाव सिर्फ़ “एक पेपर” का निर्णय नहीं बल्कि पूरी तैयारी की रणनीति का अहम हिस्सा बन जाता है।
इसलिए Optional की जगह UPSC Mains में बेहद अहम है। यह न केवल आपके Merit को प्रभावित करता है बल्कि कई बार चयन और असफलता के बीच का अंतर भी यही तय करता है।
Optional Subjects का नक्शा (समग्र नज़र)
UPSC Mains परीक्षा के लिए आयोग ने लगभग 25 से अधिक Optional Subjects की सूची तय की है। इसका मतलब यह है कि हर पृष्ठभूमि (Arts, Science, Commerce या Literature) से आने वाले छात्र अपने अनुसार कोई न कोई विषय चुन सकते हैं। यही लचीलापन Optional Subject को खास बनाता है।
1. Humanities और Social Sciences
इनमें History, Geography, Political Science & International Relations (PSIR), Sociology, Philosophy, Anthropology और Public Administration जैसे विषय आते हैं। इनकी खासियत यह है कि इनमें से कई का General Studies Papers से काफी मेल होता है। जैसे – History और Geography का GS I से, PSIR का GS II से और Sociology का Essay और Ethics से गहरा संबंध है।
2. Science और Engineering Subjects
Engineering पृष्ठभूमि वाले छात्रों के लिए Mathematics, Physics, Chemistry और Engineering Disciplines उपलब्ध हैं। इनका फायदा यह है कि सवाल अपेक्षाकृत तथ्यात्मक और फिक्स पैटर्न वाले होते हैं, लेकिन चुनौतियाँ यह हैं कि syllabus बड़ा और तकनीकी हो सकता है।
3. Commerce और Management Subjects
Economics, Management और Commerce जैसे विषय इस श्रेणी में आते हैं। ये खासकर उन्हीं छात्रों के लिए अच्छे होते हैं जिनका Graduation इन विषयों में हुआ हो।
4. Literature Subjects
भारतीय भाषाओं और अंग्रेज़ी सहित 20 से अधिक साहित्य विषय Optional के रूप में उपलब्ध हैं। Hindi Literature, English Literature, Sanskrit Literature और अन्य भाषाओं के साहित्य में लगातार कई छात्रों ने अच्छा प्रदर्शन किया है।
इस तरह, Optional Subjects की यह विविधता हर उम्मीदवार को मौका देती है कि वह अपने Background और Interest के हिसाब से सबसे सही चुनाव कर सके।
चुनाव का फ्रेमवर्क: किन बातों पर निर्णय लें
UPSC के लिए सही Optional Subject चुनना सिर्फ़ एक “चॉइस” नहीं बल्कि पूरी तैयारी की रणनीति का हिस्सा होता है। कई बार छात्र जल्दबाजी या दोस्तों की नकल करके ऐसा विषय चुन लेते हैं जिसमें बाद में उन्हें कठिनाई होने लगती है। इसलिए ज़रूरी है कि Subject चुनने से पहले कुछ ठोस बिंदुओं पर ध्यान दिया जाए।
1. रुचि और पृष्ठभूमि (Interest & Background)
सबसे पहले यह देखना ज़रूरी है कि आपको कौन सा विषय पढ़ने में स्वाभाविक रुचि है। अगर Graduation या Post-Graduation का विषय आपको पसंद था तो वही चुनना अधिक आसान रहेगा। जिस विषय में Genuine Interest होगा, उसमें लंबे समय तक पढ़ाई करने में बोरियत महसूस नहीं होगी।
2. सिलेबस का आकार और कठिनाई
कुछ विषयों का सिलेबस छोटा और कॉम्पैक्ट होता है (जैसे Philosophy, Public Administration), जबकि कुछ विषयों का सिलेबस बहुत बड़ा और फैला हुआ होता है (जैसे History, Geography)। छात्रों को यह देखना चाहिए कि वे अपनी तैयारी के समय और क्षमता के अनुसार किसे संभाल सकते हैं।
3. GS और Essay से Overlap
ऐसे विषय चुनना समझदारी है जो General Studies और Essay पेपर से जुड़ते हों। जैसे – Political Science GS-II से, Sociology GS-I और Ethics से, Geography GS-I और GS-III से काफी हद तक जुड़ा होता है। इस ओवरलैप से तैयारी का बोझ कम हो जाता है।
4. Study Material और Guidance की उपलब्धता
किताबें, Notes, Previous Year Papers और Coaching/Online Resources उस विषय के लिए आसानी से उपलब्ध हैं या नहीं, यह भी एक बड़ा पहलू है। जिस विषय का Material आसानी से न मिले, उसमें Self-Study करना कठिन हो सकता है।
5. Answer Writing Comfort
UPSC Mains पूरी तरह लिखित परीक्षा है। इसलिए ऐसा विषय चुनें जिसमें आप अपने विचारों को आसानी से व्यक्त कर सकें। अगर किसी विषय के Concepts समझ में तो आते हैं लेकिन उन्हें लिखना मुश्किल लगता है तो वह Optional लंबे समय तक बोझ बन सकता है।
इन बिंदुओं को ध्यान में रखकर किया गया चुनाव न केवल तैयारी को सहज बनाता है बल्कि परीक्षा में अंक लाने की संभावना को भी दोगुना कर देता है।
UPSC Mains Optional Subject : आम गलतियाँ जिन्हें टालना है
UPSC के लिए Optional Subject चुनते समय छात्र अक्सर कुछ सामान्य गलतियाँ कर देते हैं। ये छोटी-छोटी चूकें बाद में उनकी पूरी तैयारी और परिणाम पर भारी पड़ सकती हैं। इसलिए इन्हें समझना और शुरुआत में ही बचना बेहद ज़रूरी है।
1. सिर्फ़ Popularity देखकर चुनाव करना
कई छात्र सोचते हैं कि जो Subject सबसे ज़्यादा लोग ले रहे हैं, वही सबसे अच्छा होगा। लेकिन यह सोच गलत है। हर छात्र का बैकग्राउंड, रुचि और लेखन क्षमता अलग होती है। जो Subject किसी और के लिए स्कोरिंग हो सकता है, वही आपके लिए कठिन भी साबित हो सकता है।
2. दोस्तों या Coaching Faculty की नकल करना
अक्सर छात्र अपने दोस्तों या Coaching Teachers की सलाह पर बिना सोचे-समझे वही Subject चुन लेते हैं। लेकिन याद रखिए, परीक्षा आपको देनी है, इसलिए चुनाव भी आपका होना चाहिए।
3. Syllabus और PYQ को न देखना
कई बार छात्र सिर्फ़ नाम सुनकर Subject चुन लेते हैं और बाद में उन्हें पता चलता है कि सिलेबस बहुत बड़ा है या प्रश्न उनकी सोच से अलग हैं। UPSC का Official Syllabus और पिछले सालों के Question Papers देखना सबसे पहला कदम होना चाहिए।
4. Language Barrier को न समझना
Hindi Medium के छात्रों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि सभी Subjects के अच्छे Notes या Test Series हिंदी में उपलब्ध नहीं होते। अगर यह पहले से चेक न किया जाए तो बाद में कठिनाई आ सकती है।
5. बिना Trial Study के Final करना
सबसे बड़ी गलती है किसी Subject को बिना पढ़े सीधे Final कर लेना। कम से कम 7–10 दिन Trial Study करके ही समझें कि आप उस विषय को लंबे समय तक पढ़ सकते हैं या नहीं।
अगर ये गलतियाँ टाल दी जाएँ तो Optional Subject का चुनाव ज्यादा ठोस और भरोसेमंद हो जाता है।
टॉपर्स की सलाह और अनुभव
UPSC में सफल हुए टॉपर्स हमेशा यह मानते हैं कि Optional Subject का चुनाव ही उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी रहा। जब हम उनकी तैयारी और अनुभवों को देखते हैं तो कई सामान्य बातें सामने आती हैं, जिनसे हर नए उम्मीदवार को सीख लेनी चाहिए।
कई टॉपर्स बताते हैं कि उन्होंने वही विषय चुना जिसमें उनकी वास्तविक रुचि थी। उदाहरण के लिए, Political Science & International Relations (PSIR) लेने वाले कई टॉपर्स ने कहा कि उन्हें अख़बार पढ़ने और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं को समझने में रुचि थी, इसलिए उन्हें इस विषय की तैयारी कभी बोझ नहीं लगी। इसी तरह Sociology लेने वाले छात्रों ने कहा कि उन्हें समाज की संरचना और बदलते मुद्दों पर लिखना पसंद था, इसलिए यह उनके लिए स्वाभाविक विकल्प बन गया।
टॉपर्स का यह भी कहना है कि केवल “स्कोरिंग ट्रेंड” देखकर निर्णय नहीं करना चाहिए। कुछ सालों में कोई Subject ज्यादा अंक दिला देता है और अगले साल वही Subject औसत प्रदर्शन कर सकता है। असली बात यह है कि आप जिस विषय को चुनें, उसमें लगातार लिखते रह सकें और उसकी अवधारणाओं को समझकर अपने शब्दों में प्रस्तुत कर सकें।
एक और सामान्य सलाह यह है कि Subject चुनने के बाद Confusion में न पड़ें। कई उम्मीदवार बीच तैयारी में Optional बदल देते हैं और इससे उनकी मेहनत बर्बाद हो जाती है। टॉपर्स का मानना है कि सही चुनाव करने के बाद उसी पर टिके रहना चाहिए।
संक्षेप में, टॉपर्स की सबसे बड़ी सीख यही है – Interest + Consistency + Writing Practice = Success।
किस Background वाले के लिए कौन से Subjects अच्छे हो सकते हैं?
UPSC की सबसे खास बात यह है कि इसमें अलग-अलग शैक्षिक पृष्ठभूमि से आने वाले छात्र भाग लेते हैं। कोई Arts से आता है, कोई Science या Engineering से, तो कोई Commerce से। इसलिए Optional Subject चुनते समय यह देखना ज़रूरी है कि कौन सा विषय किस बैकग्राउंड के छात्रों के लिए बेहतर साबित हो सकता है।
1. Arts या Humanities Background
जो छात्र History, Political Science, Geography या Sociology जैसे विषयों से जुड़े रहे हैं, उनके लिए यही Subjects सबसे स्वाभाविक चुनाव होते हैं। इन विषयों का General Studies Papers से भी गहरा संबंध है, जिससे तैयारी आसान हो जाती है।
2. Science और Engineering Background
इंजीनियरिंग या साइंस के छात्रों के लिए Mathematics, Physics, Chemistry और Anthropology अच्छे विकल्प माने जाते हैं। Mathematics और Physics उन छात्रों के लिए फायदेमंद हैं जिन्हें समस्या-समाधान और लॉजिकल सोच में मज़ा आता है। Anthropology हाल के वर्षों में काफी लोकप्रिय हुआ है क्योंकि इसमें विज्ञान और समाज दोनों का मेल है।
3. Commerce और Management Background
इस बैकग्राउंड वाले छात्रों के लिए Economics, Commerce और Management अच्छे विकल्प होते हैं। इन विषयों में Concepts स्पष्ट होने पर उत्तर लिखना आसान होता है।
4. Hindi Medium के छात्र
हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए Sociology, Geography और Hindi Literature अच्छे विकल्प हैं, क्योंकि इनके Notes और Resources आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।
संक्षेप में, पृष्ठभूमि के हिसाब से चुना गया विषय तैयारी को सहज और कम बोझिल बना देता है।
Subject Finalize करने का Step-by-Step तरीका
Optional Subject का चुनाव सोच-समझकर करना चाहिए। अगर आप बिना योजना बनाए Subject चुन लेंगे तो बाद में पछताना पड़ सकता है। नीचे दिए गए Step-by-Step तरीके से आप सही निर्णय तक पहुँच सकते हैं।
1. रुचि और Background की सूची बनाइए
सबसे पहले अपने Graduation और रुचि वाले विषयों की लिस्ट तैयार करें। मान लीजिए आपको History पढ़ने में मज़ा आता है और Graduation में भी यही रहा है, तो यह आपके लिए प्राथमिक विकल्प हो सकता है।
2. UPSC Official Syllabus देखिए
हर विषय का पूरा सिलेबस UPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर दिया होता है। आप उस विषय का Syllabus पढ़ें और देखें कि क्या आप इसे लंबे समय तक संभाल सकते हैं।
3. पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र (PYQ) देखें
5–10 साल के Previous Year Papers देखकर समझें कि सवाल किस पैटर्न पर पूछे जाते हैं। यह आपको विषय की वास्तविक कठिनाई का अंदाज़ा देगा।
4. Study Material और Guidance की उपलब्धता जाँचें
क्या उस विषय की Standard Books, Notes और Coaching/Online Guidance उपलब्ध हैं? अगर सामग्री आसानी से मिल रही है तो तैयारी में दिक़्क़त नहीं आएगी।
5. 7–10 दिन का Trial Study करें
अंतिम निर्णय लेने से पहले उस विषय की 1–2 यूनिट पढ़कर देखें और 3–4 उत्तर लिखकर टेस्ट करें। इससे आपको Writing Comfort का अंदाज़ा होगा।
6. Self-Review और Feedback लें
Trial Study के बाद खुद को 10 में से अंक दें कि विषय कितना समझ आया और उत्तर लिखना कितना आसान लगा। जरूरत हो तो किसी सीनियर या मेंटर से राय लें।
7. Final Decision लें और उस पर टिक जाएँ
जब आप सभी पहलुओं का विश्लेषण कर लें तो एक विषय Final करें और उसी पर Focus बनाए रखें। बार-बार Subject बदलना सबसे बड़ी गलती होती है।
30-Day ट्रायल प्लान (Subject लॉक करने से पहले)
Optional Subject का चुनाव करने से पहले सिर्फ़ सोच-विचार करना काफी नहीं है। असली अनुभव तब आता है जब आप उस विषय को कुछ दिन पढ़कर देखें। इसके लिए एक 30-Day ट्रायल प्लान बेहद उपयोगी हो सकता है। इस प्लान से आपको अंदाज़ा हो जाएगा कि यह विषय आपके लिए सही है या नहीं।
Week 1: सिलेबस और PYQ Mapping
पहले हफ़्ते में चुने गए विषय का पूरा सिलेबस प्रिंट कर लें और उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बाँट लें। साथ ही, पिछले 5 साल के Question Papers देखें और देखिए कि कौन से टॉपिक बार-बार पूछे जा रहे हैं। इससे आपको तैयारी की दिशा समझ में आएगी।
Week 2: बेसिक रीडिंग और Notes
दूसरे हफ़्ते में विषय की Standard Books या Notes से बेसिक रीडिंग शुरू करें। कोशिश करें कि 1–2 यूनिट अच्छे से समझ लें। Notes बनाना भी इसी समय शुरू करें ताकि Revision आसान हो।
Week 3: Answer Writing Practice
तीसरे हफ़्ते में उन यूनिट्स से 4–5 सवाल लिखकर देखें। शुरू में भले ही उत्तर परफेक्ट न हों, लेकिन Writing Comfort का अंदाज़ा यहीं से लगेगा। साथ ही मॉडल उत्तर या टॉपर कॉपियों से तुलना करें।
Week 4: Mini Test और Self-Review
चौथे हफ़्ते में एक छोटा Mini Test लीजिए जिसमें 5–6 सवाल हों। खुद समय बाँधकर लिखें और फिर उनका मूल्यांकन करें। इस दौरान देखें – क्या Concepts अच्छे से समझ आए? क्या उत्तर लिखने में सहजता है?
अगर इन 30 दिनों में आपको लगे कि आप विषय को अच्छे से समझ पा रहे हैं और लिखने में भी आत्मविश्वास है, तो इसे Final कर लें। लेकिन अगर लगातार मुश्किल महसूस हो तो तुरंत दूसरा विकल्प आज़माना ही बेहतर रहेगा।
Subject फाइनल होने के बाद Study Plan
एक बार Optional Subject को फाइनल करने के बाद असली तैयारी शुरू होती है। इस समय सबसे बड़ी ज़रूरत होती है एक ठोस और व्यावहारिक Study Plan बनाने की। अगर सही योजना के साथ पढ़ाई की जाए तो Optional पेपर आपके लिए सबसे बड़ा स्कोरिंग क्षेत्र बन सकता है।
1. कोर बुकलिस्ट तैयार करें
सबसे पहले उस विषय की Standard Books और Notes की एक छोटी-सी लिस्ट बना लें। बहुत सारे स्रोत इकट्ठा करने के बजाय चुनिंदा किताबें ही पढ़ें, लेकिन उन्हें बार-बार दोहराएँ।
2. Notes बनाने का तरीका
सिलेबस की हेडिंग्स के अनुसार Notes तैयार करें। हर टॉपिक के सामने पिछले साल पूछे गए प्रश्न (PYQ) भी लिख लें। इससे आपको तुरंत समझ आ जाएगा कि कौन-सा टॉपिक कितना महत्वपूर्ण है। कोशिश करें कि Notes छोटे और रिवीजन फ्रेंडली हों।
3. Answer Writing Practice
Optional पेपर पूरी तरह लेखन-आधारित होता है। इसलिए रोज़ाना कम से कम 2–3 उत्तर लिखने की आदत डालें। अपने उत्तरों को Intro, Body और Conclusion में बाँटें। जहाँ संभव हो, डायग्राम, फ्लोचार्ट और केस-स्टडी शामिल करें। इससे उत्तर प्रभावी और स्कोरिंग बनते हैं।
4. PYQ और Test Series का इस्तेमाल
पिछले 10 सालों के प्रश्नपत्रों को थीम-वाइज़ बाँटकर हल करें। साथ ही, किसी अच्छी Test Series में शामिल हों। Evaluation से आपको पता चलेगा कि कहाँ सुधार की ज़रूरत है।
5. Revision Cycle
Optional Subject की तैयारी तभी सफल होगी जब आप नियमित रिवीजन करेंगे। इसके लिए 3-स्टेप साइकिल अपनाएँ – पहली रिवीजन 15 दिन में, दूसरी 7 दिन में और अंतिम 3 दिन में।
अगर यह Study Plan लगातार अपनाया जाए तो Optional Subject आपके लिए 500 अंकों में से बहुत मजबूत स्कोर दिला सकता है।
उपयोगी संसाधन (हैंडहोल्डिंग सेक्शन)
Optional Subject की तैयारी तभी आसान होती है जब आपके पास सही और भरोसेमंद संसाधन (Resources) मौजूद हों। बिना सही किताबों और गाइडेंस के तैयारी अधूरी रह सकती है। इसलिए यहाँ कुछ प्रमुख स्रोत दिए जा रहे हैं जिन्हें हर उम्मीदवार को ध्यान में रखना चाहिए।
1. आधिकारिक स्रोत
- UPSC Official Website: यहाँ से Subject-wise Official Syllabus और Exam Notification डाउनलोड करें।
- Previous Year Question Papers (PYQ): इन्हें हल करना और बार-बार देखना सबसे ज़रूरी है।
2. Standard Books और Notes
हर Subject की अपनी कुछ मानक किताबें होती हैं। उदाहरण के लिए, Sociology के लिए Haralambos, Geography के लिए Savindra Singh और Political Science के लिए Laxmikant। साथ ही, अपने खुद के Notes बनाना भी बहुत महत्वपूर्ण है।
3. ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म और कोचिंग
Vision IAS, ForumIAS, Drishti IAS, Testbook जैसी वेबसाइटें Subject-wise सामग्री और Test Series उपलब्ध कराती हैं। YouTube पर भी टॉपर्स की Answer Writing Copies और लेक्चर्स मिल जाते हैं।
4. Language Support
Hindi Medium छात्रों को यह ध्यान रखना चाहिए कि चुने गए Subject की Books और Notes हिंदी में उपलब्ध हों। Sociology, Geography और Hindi Literature के Notes और Test Series हिंदी में आसानी से मिल जाते हैं।
5. टॉपर्स की कॉपियाँ और इंटरव्यू
कई बार टॉपर्स की Copies और Interviews पढ़ने से Writing Style और Approach समझने में मदद मिलती है।
इन संसाधनों का सही उपयोग करके कोई भी छात्र अपनी Optional Preparation को और मजबूत बना सकता है।
FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
1. सबसे आसान Optional Subject कौन सा है?
इसका सीधा जवाब नहीं है, क्योंकि हर छात्र की रुचि और पृष्ठभूमि अलग होती है। कुछ को Sociology आसान लगता है क्योंकि इसमें रोज़मर्रा की बातें शामिल होती हैं, तो कुछ को Mathematics इसलिए आसान लगता है क्योंकि इसमें सीधे और निश्चित उत्तर होते हैं। आसान वही है जिसमें आपकी रुचि और समझ हो।
2. क्या Science Background वाले Arts Subjects चुन सकते हैं?
हाँ, बिल्कुल। कई इंजीनियरिंग छात्रों ने History, PSIR और Sociology जैसे Arts Subjects लेकर टॉप रैंक हासिल की है। अगर आपको किसी नए विषय में Genuine Interest है और उसकी तैयारी के लिए संसाधन उपलब्ध हैं, तो उसे चुनने में कोई हर्ज नहीं है।
3. क्या Optional बदलने से नुकसान होता है?
अगर शुरुआत में बदलते हैं, तो यह ठीक है। लेकिन Mains के करीब जाकर Optional बदलना बहुत नुकसानदायक साबित हो सकता है क्योंकि नए विषय को समझने और लिखने का समय कम होता है।
4. Literature Subjects लेना कैसा रहेगा?
Literature Subjects (जैसे Hindi, English, Sanskrit) लगातार अच्छे परिणाम दे रहे हैं। लेकिन इन्हें तभी चुनें जब आपको भाषा और साहित्य पढ़ने में वास्तविक रुचि हो। वरना ये बोझ लग सकते हैं।
5. पहली बार देने वालों के लिए कौन सा Subject बेहतर रहेगा?
पहली बार वाले छात्रों के लिए वही Subject बेहतर है जिसमें उन्हें Background का लाभ हो, GS से Overlap हो और Books/Notes आसानी से उपलब्ध हों।
इन सवालों के जवाब से यह स्पष्ट है कि Optional Subject का चुनाव पूरी तरह व्यक्तिगत ताकत और रुचि पर निर्भर करता है।
निष्कर्ष
UPSC Mains परीक्षा में Optional Subject का चुनाव पूरी तैयारी की दिशा और सफलता दोनों तय करता है। 500 अंकों का यह हिस्सा कई बार Merit List में निर्णायक भूमिका निभाता है। यही कारण है कि टॉपर्स हमेशा कहते हैं कि सही Optional चुनना आधी जीत पाने जैसा है।
सही Optional वही होता है जिसमें आपकी रुचि हो, सिलेबस manageable लगे, General Studies के साथ Overlap मिले और Study Material आसानी से उपलब्ध हो। इसके अलावा Writing Comfort भी बहुत जरूरी है, क्योंकि Mains पूरी तरह Answer Writing पर आधारित है। अगर आप उस विषय में अपने विचार साफ और संगठित ढंग से लिख सकते हैं, तो यह आपके लिए सही विकल्प साबित होगा।
Optional चुनने से पहले जल्दबाज़ी बिल्कुल न करें। पहले Official Syllabus पढ़ें, पिछले सालों के प्रश्न देखें, 7–10 दिन का Trial Study करें और फिर Final निर्णय लें। Subject Final होने के बाद बार-बार Confusion में न पड़ें, बल्कि पूरी लगन और निरंतरता के साथ उसी पर टिक जाएँ।
याद रखिए, UPSC की तैयारी एक लंबी और धैर्य की परीक्षा है। इसमें Optional Subject आपके लिए ताकत भी बन सकता है और कमजोरी भी। चुनाव सोच-समझकर कीजिए और फिर पूरे समर्पण के साथ मेहनत कीजिए। तभी आप अपने IAS या Civil Services Officer बनने के सपने को साकार कर पाएँगे।








