नेगेटिव मार्किंग से कैसे बचें: पूरी रणनीति और आसान तरीके

Published: July 24, 2026
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नेगेटिव मार्किंग से कैसे बचें

Quick Answer: नेगेटिव मार्किंग से बचने का सबसे आसान तरीका है – सिर्फ वही सवाल हल करें जिनका जवाब आप जानते हैं या जिनमें कम से कम दो गलत ऑप्शन पक्के से हटा सकें। बिना किसी आधार के अंदाजा लगाकर जवाब देना यह सबसे बड़ी नुकसान करने वाली बात है।

क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है कि पेपर देने के बाद आपको ऐसा लगा हो कि 90 सवाल तो सही हुए हैं, लेकिन रिजल्ट में नंबर बहुत कम आए है? ज्यादातर छात्रों के साथ यही होता है। इसकी केवल एक वजह होती है नेगेटिव मार्किंग। ऐसे 20-25 सवाल जो सिर्फ तुक्के में भरे गए थे, केवल वही सारी मेहनत पर पानी फेर देते हैं।

नेगेटिव मार्किंग से कैसे बचें, यह सवाल हर उस छात्र के मन में आता है जो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है। सच यह है कि इससे बचना कोई जादू नहीं है, बल्कि एक आदत है जो केवल प्रैक्टिस से बनती है।

इस आर्टिकल में आगे हम बिल्कुल आसान भाषा में समझेंगे कि नेगेटिव मार्किंग होती क्या है, कब सवाल छोड़ना फायदेमंद है, और कब अंदाजा लगाना सही रहता है।

Table of Contents

नेगेटिव मार्किंग क्या होती है?

नेगेटिव मार्किंग का मतलब होता है कि गलत जवाब देने पर आपके कुल नंबर में से कुछ अंक काट लिए जाते हैं।

मान लीजिए किसी परीक्षा में हर सही जवाब पर 1 अंक मिलता है और हर गलत जवाब पर 0.25 अंक कटते हैं। इस तरह अगर आपने पेपर में 100 सवाल हल किए, जिनमें 80 सही और 20 गलत हुए, तो आपका स्कोर होगा 80 में से 5 घटाकर यानी 75।

यहां देखने वाली बात यह है कि 20 गलत जवाबों ने आपके 5 सही सवालों की मेहनत पानी फेर दिया है । यही नेगेटिव मार्किंग का सबसे बड़ा नुकसान है।

कोई भी आयोग इस नियम को एग्जाम में इसलिए रखता हैं ताकि छात्र बिना सोचे-समझे तुक्के न लगाएं और असली जानकारी रखने वाले उम्मीदवारों को फायदा मिले।

नेगेटिव मार्किंग और सवाल छोड़ने में क्या फर्क है

बहुत से छात्र इन दोनों को एक ही मान लेते हैं, जबकि इनमें बहुत बड़ा अंतर होता है। इस टेबल में देखे –

बातगलत जवाब देनासवाल छोड़ देना
नंबर पर असरअंक कटते हैंकोई अंक नहीं कटता
स्कोर पर प्रभावनेगेटिवन्यूट्रल (शून्य)
जोखिमज्यादाबिल्कुल नहीं
कब सही हैजब 2 ऑप्शन हट जाएंजब कुछ भी अंदाजा न हो

अगर आसान शब्दों में समझें तो- सवाल छोड़ने पर आप जहां थे वहीं रहते हैं, लेकिन गलत जवाब देने पर आप पीछे चले जाते हैं।

एक बार उदाहरण के साथ समझिए– रोहित और सचिन दोनों ने 70-70 सवाल सही किए। रोहित ने 30 सवाल छोड़ दिए और इसी तरह सचिन ने सभी 30 सवालों में तुक्के मार दिए और जिसके कारण सब गलत हो गए। अब जिसके कारण रोहित के 70 अंक बचे, सचिन के करीब 62-63 ही रह गए। और आख़िरकार कट-ऑफ में यही 7-8 अंक सफलता और असफलता का फर्क बना देते हैं।

नेगेटिव मार्किंग के मुख्य प्रकार

हर परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग का तरीका एक जैसा नहीं होता। आमतौर पर इसमें अलग-अलग रूप देखने को मिलते हैं।

1. चौथाई अंक की कटौती (1/4)

यह सबसे आम तरीका है। हर गलत जवाब पर सही जवाब के एक-चौथाई अंक कटते हैं। यानी 4 गलत जवाब मिलकर 1 सही जवाब को बराबर कर देते हैं।

उदाहरण – अगर सही जवाब पर 2 अंक मिलते हैं, तो गलत पर 0.5 अंक कटेंगे।

2. तिहाई अंक की कटौती (1/3)

कुछ परीक्षाओं में गलत जवाब पर एक-तिहाई अंक काटे जाते हैं। यहां 3 गलत जवाब 1 सही जवाब को खत्म कर देते हैं। यह पहले वाले से ज्यादा सख्त होता है।

3. आधे अंक की कटौती (1/2)

कुछ खास परीक्षाओं या पेपरों में आधा अंक तक कटता है। ऐसे पेपर में तुक्का लगाना सबसे ज्यादा खतरनाक होता है।

4. बिना नेगेटिव मार्किंग वाली परीक्षा

कई भर्ती परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग होती ही नहीं। ऐसे पेपर में एक भी सवाल खाली छोड़ना समझदारी नहीं है।

5. बिना अटेम्प्ट किए सवाल पर भी कटौती

कुछ परीक्षाओं में यह अनोखा नियम भी देखा जाता है कि तय संख्या से ज्यादा सवाल खाली छोड़ने पर भी कुछ अंक काटे जाते हैं। ऐसा नियम हर परीक्षा में नहीं होता, इसलिए नोटिफिकेशन जरूर पढ़ें।

नोट: ऊपर बताए गए सभी अनुपात सामान्य जानकारी के लिए हैं। आपकी परीक्षा में असल नियम क्या है, यह सिर्फ उस परीक्षा के आधिकारिक नोटिफिकेशन से ही पक्का होता है।

कितने सवाल हल करें, इसका सीधा गणित

यहां एक सिंपल नियम याद रखिए, जिसे “एलिमिनेशन रूल” कहते हैं।

स्थितिक्या करेंवजह
जवाब पक्का पता हैजरूर भरेंपूरा फायदा
3 में से 1 ऑप्शन बचाजरूर भरेंसही होने की संभावना बहुत ज्यादा
2 ऑप्शन बचेभर सकते हैं50-50 मौका, आमतौर पर फायदे में
3 ऑप्शन बचेसोच-समझकरजोखिम ज्यादा
कुछ भी अंदाजा नहींछोड़ देंसीधा नुकसान

समझने का आसान तरीका यह है – जब आप कम से कम दो गलत ऑप्शन पक्के तौर पर हटा देते हैं, तब आपका अंदाजा “तुक्का” नहीं रहता, वह “पढ़ा हुआ अंदाजा” बन जाता है।

नेगेटिव मार्किंग से कैसे बचें: स्टेप बाय स्टेप तरीका

अब असली बात पर आते हैं। नीचे दिए गए स्टेप्स को अपनी तैयारी और परीक्षा दोनों में लागू करें।

  1. नोटिफिकेशन का नेगेटिव मार्किंग नियम सबसे पहले पढ़ें। फॉर्म भरते ही यह देख लें कि आपकी परीक्षा में कटौती कितनी है। यही आपकी पूरी रणनीति तय करेगा।
  2. तीन राउंड में पेपर हल करें। पहले राउंड में सिर्फ वे सवाल करें जो तुरंत आते हैं। दूसरे राउंड में थोड़ा सोचने वाले सवाल करें। तीसरे राउंड में बाकी बचे सवालों पर फैसला लें।
  3. सवाल को पूरा पढ़ें। “निम्न में से कौन सा सही नहीं है” जैसे सवालों में जल्दबाजी में “नहीं” शब्द छूट जाता है और आता हुआ सवाल भी गलत हो जाता है।
  4. ऑप्शन एलिमिनेशन की आदत डालें। हर सवाल में पहले गलत ऑप्शन काटें, फिर बचे हुए में से चुनें। इससे सही होने की संभावना अपने आप बढ़ जाती है।
  5. मॉक टेस्ट में अपनी एक्यूरेसी नापें। हर मॉक के बाद देखें कि कितने अंदाजे सही हुए और कितने गलत। अगर आपके आधे से ज्यादा अंदाजे गलत होते हैं, तो आपको तुक्का बंद करना होगा।
  6. अपनी एक निजी सीमा तय करें। जैसे “मैं पूरे पेपर में 10 से ज्यादा अंदाजे नहीं लगाऊंगा।” यह सीमा आपको परीक्षा हॉल के दबाव में बहकने से बचाती है।
  7. OMR या स्क्रीन पर आखिरी बार जांच करें। कई बार जवाब सही सोचा होता है, लेकिन गोला गलत भर जाता है या बटन गलत दब जाता है। यह भी नेगेटिव मार्किंग की वजह बनता है।
  8. आखिरी 5 मिनट में नया तुक्का न मारें। समय खत्म होते वक्त घबराहट में भरे गए जवाब ज्यादातर गलत ही होते हैं।

ध्यान रखने वाली जरूरी बातें

  1. एक्यूरेसी हमेशा स्पीड से ज्यादा कीमती है। 80 सवाल सही करना, 110 सवाल हल करके 70 सही करने से बेहतर है।
  2. हर विषय में आपकी पकड़ अलग होती है। जिस विषय में आप कमजोर हैं, वहां अंदाजा लगाने का जोखिम और बढ़ जाता है।
  3. मॉक टेस्ट को असली परीक्षा की तरह ही लें। वहां तुक्का मारने की आदत परीक्षा हॉल में अपने आप निकल आएगी।
  4. लंबे और उलझे हुए सवाल में अटकने से बचें। समय बर्बाद होने पर आगे के आसान सवाल छूट जाते हैं और फिर जल्दबाजी में गलतियां होती हैं।
  5. मैचिंग या स्टेटमेंट वाले सवालों में अगर एक भी स्टेटमेंट का पक्का पता न हो, तो जोखिम ज्यादा होता है।
  6. परीक्षा से पहले वाली रात नई चीज पढ़ने से कन्फ्यूजन बढ़ता है, और कन्फ्यूजन सीधे गलत जवाब की ओर ले जाता है।

किन हालात में अंदाजा लगाना नुकसान देता है

  • जब चारों ऑप्शन एक जैसे लग रहे हों और आपने वह टॉपिक कभी पढ़ा ही न हो।
  • जब सवाल में सटीक तारीख, संख्या या नाम पूछा गया हो और आपको याद न हो।
  • जब कटौती एक-तिहाई या आधे अंक की हो।
  • जब आप पहले से ही अच्छे नंबर बना चुके हों और सिर्फ लालच में ज्यादा अटेम्प्ट कर रहे हों।
  • जब समय बहुत कम बचा हो और आप बिना पढ़े ही गोले भर रहे हों।
  • जब सवाल “सभी सही हैं” या “इनमें से कोई नहीं” जैसे ऑप्शन वाला हो और आपको एक भी बिंदु पक्का न पता हो।

प्री और मेन्स परीक्षा में रणनीति का अंतर

बातप्रीलिम्समेन्स (ऑब्जेक्टिव)
सवालों की संख्याआमतौर पर ज्यादाआमतौर पर कम
समय का दबावज्यादातुलनात्मक रूप से कम
कट-ऑफ का असरसिर्फ क्वालिफाई करनाअंतिम मेरिट में गिना जाता है
अंदाजे की गुंजाइशसीमितबहुत कम
मुख्य फोकसतेजी और सही चुनावगहराई और एक्यूरेसी

ध्यान रखें कि हर भर्ती में प्री और मेन्स का ढांचा अलग होता है, इसलिए यह तुलना सिर्फ सामान्य समझ के लिए है।

नेगेटिव मार्किंग से जुड़ी आम गलतफहमियां

गलतफहमी 1: ज्यादा अटेम्प्ट करने से चयन पक्का होता है।

सच यह है कि चयन सही अटेम्प्ट से होता है, कुल अटेम्प्ट से नहीं। कम अटेम्प्ट लेकिन ज्यादा एक्यूरेसी वाले छात्र अक्सर आगे निकल जाते हैं।

गलतफहमी 2: तुक्का हमेशा 25% सही होता है।

यह सिर्फ किताबी गणित है। असल में जब आप कुछ नहीं जानते, तो ऑप्शन जानबूझकर ऐसे बनाए जाते हैं कि गलत वाला ज्यादा सही लगे।

गलतफहमी 3: नेगेटिव मार्किंग सिर्फ बड़ी परीक्षाओं में होती है।

छोटी से छोटी भर्ती परीक्षा में भी यह नियम हो सकता है। यह पूरी तरह आयोग के नियम पर निर्भर करता है।

गलतफहमी 4: सवाल छोड़ने से नंबर कटते हैं।

ज्यादातर परीक्षाओं में खाली छोड़े गए सवाल पर कोई अंक नहीं कटता। हां, कुछ गिनी-चुनी परीक्षाओं में अलग नियम हो सकता है, इसलिए नोटिफिकेशन देखना जरूरी है।

गलतफहमी 5: नेगेटिव मार्किंग वाले पेपर में आधे सवाल छोड़ ही देने चाहिए।

यह भी गलत है। जरूरत से ज्यादा सवाल छोड़ने पर आप कट-ऑफ तक ही नहीं पहुंच पाएंगे। इस संतुलन का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है।

यह जानकारी किन स्रोतों पर आधारित है

इस आर्टिकल में दी गई जानकारी अलग-अलग भर्ती आयोगों और परीक्षा संस्थाओं द्वारा समय-समय पर जारी किए जाने वाले आधिकारिक नोटिफिकेशन, परीक्षा पैटर्न से जुड़े दिशा-निर्देशों और सामान्य परीक्षा व्यवहार पर आधारित सामान्य समझ है।

नेगेटिव मार्किंग का अनुपात, अटेम्प्ट से जुड़े नियम और परीक्षा का ढांचा हर भर्ती में अलग हो सकता है और समय-समय पर बदलता भी रहता है।

इसलिए किसी भी परीक्षा में शामिल होने से पहले उस भर्ती के आधिकारिक नोटिफिकेशन और सूचना विवरणिका को खुद जरूर पढ़ें। अंतिम और सटीक जानकारी वहीं मानी जाएगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

क्या नेगेटिव मार्किंग हर सरकारी परीक्षा में होती है?

नहीं। कई भर्ती परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग नहीं होती। यह पूरी तरह उस परीक्षा के नियम पर निर्भर करता है, इसलिए नोटिफिकेशन देखना ही एकमात्र भरोसेमंद तरीका है।

सवाल खाली छोड़ने पर नंबर कटते हैं क्या?

आमतौर पर नहीं। ज्यादातर परीक्षाओं में खाली छोड़े गए सवाल पर शून्य अंक मिलते हैं, कटौती नहीं होती। हालांकि कुछ खास परीक्षाओं में अलग नियम हो सकता है।

दो ऑप्शन हटाने के बाद तुक्का मारना ठीक है?

आमतौर पर हां। जब दो ऑप्शन पक्के तौर पर गलत साबित हो जाएं, तो सही होने की संभावना काफी बढ़ जाती है और यह जोखिम आमतौर पर फायदे का सौदा रहता है।

नेगेटिव मार्किंग से कैसे बचें अगर पेपर बहुत कठिन हो?

कठिन पेपर में सबसे पहले वे सवाल करें जो आपको आते हैं। बाकी में सिर्फ वहीं अंदाजा लगाएं जहां ऑप्शन कट रहे हों। कठिन पेपर में कट-ऑफ भी नीचे जाती है, इसलिए घबराकर ज्यादा अटेम्प्ट करना नुकसानदेह होता है।

क्या एक्यूरेसी बढ़ाने का कोई तरीका है?

सबसे कारगर तरीका है नियमित मॉक टेस्ट और उसका एनालिसिस। हर गलत जवाब की वजह लिखें – क्या वह पढ़ा नहीं था, जल्दबाजी थी, या गलत समझा। यही आदत धीरे-धीरे एक्यूरेसी बढ़ाती है।

ऑनलाइन (CBT) परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग से बचना आसान है?

कुछ हद तक हां, क्योंकि वहां जवाब बदलना और सवाल को मार्क करके बाद में देखना आसान होता है। लेकिन नियम वही रहते हैं, इसलिए रणनीति में कोई ढील नहीं देनी चाहिए।

कितने प्रतिशत सवाल अटेम्प्ट करना सही रहता है?

इसका कोई तय आंकड़ा नहीं है। यह पेपर की कठिनाई, आपकी तैयारी और उस भर्ती की कट-ऑफ पर निर्भर करता है। मोटे तौर पर वही सवाल करें जिनमें आपको भरोसा हो।

मैचिंग और स्टेटमेंट वाले सवालों में क्या करें?

अगर एक भी जोड़ी या स्टेटमेंट का पक्का पता हो, तो उसके आधार पर गलत ऑप्शन काटे जा सकते हैं। लेकिन अगर बिल्कुल अंदाजा न हो, तो ऐसे सवाल छोड़ना ही बेहतर रहता है।

क्या पिछले साल की नेगेटिव मार्किंग इस साल भी वही रहेगी?

जरूरी नहीं। आयोग पैटर्न में बदलाव कर सकते हैं। इसलिए हर साल नए नोटिफिकेशन से नियम दोबारा जांचना जरूरी है।

परीक्षा हॉल में घबराहट की वजह से गलतियां हों तो क्या करें?

गहरी सांस लेकर 30 सेकंड रुकें और उस सवाल को छोड़कर आगे बढ़ जाएं। घबराहट में लिए गए फैसले ही सबसे ज्यादा नेगेटिव मार्किंग कराते हैं।

निष्कर्ष

नेगेटिव मार्किंग से कैसे बचें, इसका जवाब किसी शॉर्टकट में नहीं, बल्कि आपकी आदत में छिपा है। जब आप हर मॉक टेस्ट में सोच-समझकर सवाल चुनने की प्रैक्टिस करेंगे, तो परीक्षा हॉल में भी यही आदत काम आएगी।

याद रखें – पेपर में जीत ज्यादा सवाल भरने से नहीं, बल्कि सही सवाल भरने से मिलती है। जहां दो ऑप्शन कट जाएं वहां आगे बढ़ें, और जहां कुछ पता न हो वहां रुक जाएं।

आखिर में एक बात जरूर करें – अपनी परीक्षा का आधिकारिक नोटिफिकेशन खुद पढ़ें, क्योंकि नियम हर भर्ती में अलग होते हैं और वही अंतिम माने जाते हैं।

Sanket Kala

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