EMRS यानी Eklavya Model Residential School भारत सरकार की एक बड़ी योजना है, जिसका मकसद है कि देश के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले। यह स्कूल वैसे ही हैं जैसे Navodaya या Kendriya Vidyalaya होते हैं, लेकिन खास तौर पर Tribal क्षेत्रों के लिए बनाए गए हैं। यहाँ बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ हॉस्टल की सुविधा, खेल-कूद और आधुनिक शिक्षा का माहौल मिलता है।
अब अगर महिलाओं की बात करें तो EMRS उनके लिए एक बेहतरीन करियर अवसर है। आज के समय में हर महिला चाहती है कि उसे एक सुरक्षित, सम्मानजनक और स्थिर नौकरी मिले। EMRS नौकरी में यह सब मौजूद है। यहाँ महिला उम्मीदवारों को न सिर्फ अच्छा वेतन और सुविधाएँ मिलती हैं, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल भी मिलता है। यही कारण है कि बहुत सी महिलाएँ EMRS की परीक्षा में शामिल होती हैं और इसे अपनी पहली पसंद मानती हैं।
इस गाइड का मकसद है कि महिला उम्मीदवारों को शुरुआत से लेकर नौकरी तक की हर जानकारी एक जगह पर मिले। यानी उन्हें पता चले कि योग्यता क्या चाहिए, आवेदन कैसे करना है, चयन प्रक्रिया क्या है, सैलरी और छुट्टियाँ कैसी होंगी, पोस्टिंग कहाँ होगी और परिवार व नौकरी में संतुलन कैसे बनाया जाए। सरल शब्दों में, यह गाइड उन सभी सवालों का जवाब देगा जो एक महिला उम्मीदवार के मन में आते हैं।
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Table Of Content
- 1 EMRS में महिलाओं के लिए अवसर
- 2 योग्यता और पात्रता शर्तें
- 3 भर्ती प्रक्रिया में महिलाओं के लिए आसानियां
- 4 EMRS में महिलाओं के लिए सैलरी और सुविधाएँ
- 5 पोस्टिंग और ट्रांसफर पॉलिसी
- 6 कार्य वातावरण और सुरक्षा
- 7 महिला उम्मीदवारों के लिए तैयारी टिप्स
- 8 काम और परिवार के बीच संतुलन
- 9 महिला उम्मीदवारों की सफलता की कहानियाँ
- 10 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
- 11 निष्कर्ष
EMRS में महिलाओं के लिए अवसर
EMRS में महिला उम्मीदवारों के लिए नौकरी के बहुत सारे अवसर मौजूद हैं। यह स्कूल देश के अलग-अलग हिस्सों में खोले गए हैं, खासकर आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में। यहाँ पर शिक्षक (TGT और PGT), प्रिंसिपल, उप-प्रिंसिपल और नॉन-टीचिंग स्टाफ जैसे पदों पर भर्ती होती है। इन पदों पर पुरुष और महिला, दोनों को बराबर का मौका दिया जाता है।
महिलाओं के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि सरकारी नियमों के अनुसार सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में समान अवसर (Equal Opportunity) मिलता है। यानी आवेदन करने से लेकर चयन प्रक्रिया तक महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता। इसके अलावा, कई बार महिला उम्मीदवारों को आरक्षण और उम्र में छूट (age relaxation) का भी फायदा मिलता है।
आजकल सरकार और शिक्षा विभाग महिला शिक्षा और महिला रोजगार को बढ़ावा देने पर ज़ोर दे रहे हैं। इसी वजह से EMRS जैसी संस्थाओं में महिलाओं के लिए अवसर और भी बढ़ गए हैं। खासकर शिक्षण के क्षेत्र में महिलाएँ हमेशा से आगे रही हैं, और EMRS इसको और मजबूत करता है।
अगर देखा जाए तो EMRS में काम करना महिलाओं के लिए सिर्फ एक नौकरी नहीं बल्कि सम्मान और आत्मनिर्भरता का जरिया है। यह न सिर्फ करियर को सुरक्षित बनाता है बल्कि समाज में महिला की भूमिका को भी मज़बूत करता है।
योग्यता और पात्रता शर्तें
EMRS में महिला उम्मीदवारों के लिए अलग-अलग पदों पर भर्ती होती है, और हर पद के लिए अलग-अलग योग्यता और पात्रता शर्तें निर्धारित की गई हैं। सबसे पहले अगर हम TGT (Trained Graduate Teacher) की बात करें तो इसके लिए उम्मीदवार के पास संबंधित विषय में ग्रेजुएशन डिग्री और B.Ed. होना ज़रूरी है। वहीं, PGT (Post Graduate Teacher) के लिए संबंधित विषय में पोस्ट-ग्रेजुएशन और B.Ed. होना अनिवार्य है। इसके अलावा, प्रिंसिपल और उप-प्रिंसिपल पदों के लिए टीचिंग का अनुभव भी आवश्यक होता है।
महिला उम्मीदवारों को उम्र सीमा में भी राहत मिलती है। सामान्य तौर पर अधिकतम आयु सीमा 35 से 40 वर्ष के बीच होती है, लेकिन आरक्षित वर्ग की महिलाओं (SC, ST, OBC, EWS आदि) को 3 से 5 साल तक की अतिरिक्त छूट दी जाती है। यही नहीं, विकलांग (PwD) महिला उम्मीदवारों के लिए और भी अधिक आयु छूट उपलब्ध होती है।
इसके अलावा भारत सरकार की आरक्षण नीति महिलाओं को मजबूत बनाती है। कई राज्यों में महिला उम्मीदवारों के लिए सीटें आरक्षित होती हैं, जिससे उनके चयन की संभावना और भी बढ़ जाती है। यह नीति महिलाओं को पुरुषों के बराबर प्रतिस्पर्धा में लाती है और उन्हें अवसर देती है कि वे बिना किसी भेदभाव के अपनी योग्यता साबित कर सकें।
इस तरह देखा जाए तो EMRS में आवेदन करने के लिए महिलाओं के पास पर्याप्त अवसर और सहूलियतें हैं। सही योग्यता और तैयारी के साथ वे आसानी से इस परीक्षा में सफलता पा सकती हैं।
भर्ती प्रक्रिया में महिलाओं के लिए आसानियां
EMRS की भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होती है, जिससे महिला उम्मीदवारों के लिए आवेदन करना बहुत आसान हो जाता है। किसी भी महिला को आवेदन करने के लिए सिर्फ EMRS की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होता है और वहां उपलब्ध ऑनलाइन एप्लिकेशन फॉर्म भरना होता है। इसमें नाम, पता, शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में किसी तरह की अतिरिक्त दौड़-भाग की ज़रूरत नहीं पड़ती, जिससे महिलाएँ घर बैठे ही आसानी से आवेदन कर सकती हैं।
भर्ती प्रक्रिया में महिलाओं के लिए एक और बड़ी सहूलियत यह है कि परीक्षा केंद्र देशभर में अलग-अलग जगहों पर बनाए जाते हैं। कोशिश यह रहती है कि उम्मीदवारों को उनके नजदीकी परीक्षा केंद्र मिले, ताकि उन्हें लंबी यात्रा न करनी पड़े। इसके अलावा, महिला उम्मीदवारों के लिए परीक्षा केंद्रों पर अलग से सुरक्षा और सुविधा का भी ध्यान रखा जाता है, जैसे महिलाओं के लिए अलग प्रवेश द्वार, महिला परीक्षकों की मौजूदगी और सुरक्षित वातावरण।
दस्तावेज़ सत्यापन (Document Verification) और इंटरव्यू की प्रक्रिया भी पारदर्शी और सरल बनाई जाती है। कई बार महिला उम्मीदवारों के लिए काउंसलिंग सेशन या हेल्पलाइन भी उपलब्ध होती हैं ताकि उन्हें मार्गदर्शन मिल सके।
कुल मिलाकर, EMRS की भर्ती प्रक्रिया में महिलाओं को ऐसी सभी सुविधाएँ दी जाती हैं जो उन्हें बिना किसी असुविधा के इस प्रतियोगिता में भाग लेने और आगे बढ़ने का मौका देती हैं।
EMRS में महिलाओं के लिए सैलरी और सुविधाएँ
EMRS में महिला उम्मीदवारों को मिलने वाली सैलरी और सुविधाएँ इस नौकरी को और भी आकर्षक बनाती हैं। सबसे पहले बात करें सैलरी की तो TGT और PGT शिक्षकों की शुरुआती सैलरी लगभग 45,000 से 65,000 रुपये प्रति माह होती है। वहीं, प्रिंसिपल और उप-प्रिंसिपल के पद पर यह सैलरी और भी अधिक यानी लगभग 70,000 से 1,00,000 रुपये प्रति माह तक पहुँच सकती है। इसके अलावा उन्हें DA (महंगाई भत्ता), HRA (हाउस रेंट अलाउंस), और अन्य भत्ते भी मिलते हैं।
महिलाओं के लिए सबसे बड़ी सुविधा यह है कि उन्हें मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) और Child Care Leave का लाभ मिलता है। यानी अगर महिला उम्मीदवार शादीशुदा हैं या माँ बनने वाली हैं, तो उन्हें नौकरी में किसी तरह की परेशानी नहीं होती। उन्हें पूरा समय और सुविधा दी जाती है ताकि वे परिवार और नौकरी दोनों को अच्छे से संभाल सकें।
सिर्फ इतना ही नहीं, EMRS में महिला कर्मचारियों को मेडिकल सुविधा, पेंशन, और प्रोविडेंट फंड जैसी सुरक्षा भी मिलती है। कई स्कूलों में महिला शिक्षकों के लिए सुरक्षित हॉस्टल या सरकारी आवास की व्यवस्था भी होती है। यह सुविधा खासतौर पर उन महिलाओं के लिए फायदेमंद होती है जिन्हें दूरदराज़ इलाकों में पोस्टिंग मिलती है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो EMRS की नौकरी महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बनाती है बल्कि उन्हें सामाजिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का भरोसा भी देती है।
पोस्टिंग और ट्रांसफर पॉलिसी
EMRS की सबसे खास बात यह है कि इसके स्कूल ज्यादातर आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किए गए हैं। ऐसे में महिला उम्मीदवारों को अक्सर इन इलाकों में पोस्टिंग मिलती है। शुरुआत में यह चुनौतीपूर्ण लग सकता है क्योंकि शहरों जैसी सुविधाएँ हर जगह उपलब्ध नहीं होतीं, लेकिन धीरे-धीरे महिलाएँ वहाँ के वातावरण और लोगों से घुल-मिल जाती हैं। सरकार और प्रशासन इस बात का ध्यान रखते हैं कि वहाँ का माहौल सुरक्षित और रहने लायक हो।
महिला उम्मीदवारों के लिए पोस्टिंग के समय कई बार विशेष ध्यान दिया जाता है। कोशिश यह रहती है कि उन्हें उनके गृह राज्य या नजदीकी जिले में ही जगह मिले। हालांकि यह हर बार संभव नहीं हो पाता, लेकिन प्राथमिकता ज़रूर दी जाती है। साथ ही, अगर कोई महिला विवाहित है और उसका परिवार किसी अन्य शहर में रहता है तो उसे ट्रांसफर पॉलिसी के तहत बाद में अपने परिवार के पास ट्रांसफर मिलने की संभावना रहती है।
EMRS में ट्रांसफर प्रक्रिया भी काफी पारदर्शी है। हर साल कर्मचारियों को अपनी ट्रांसफर की इच्छा बताने का मौका मिलता है। महिलाओं के मामले में, विशेष परिस्थितियों जैसे शादी, परिवारिक जिम्मेदारियाँ या बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखकर ट्रांसफर को प्राथमिकता दी जाती है।
कुल मिलाकर देखा जाए तो पोस्टिंग और ट्रांसफर पॉलिसी महिलाओं के लिए पूरी तरह सहयोगी है। शुरुआत में चाहे पोस्टिंग दूर हो, लेकिन समय के साथ ट्रांसफर और सुविधाओं के जरिए उन्हें संतुलन बनाने का अवसर मिलता है।
कार्य वातावरण और सुरक्षा
EMRS स्कूलों का कार्य वातावरण महिला उम्मीदवारों के लिए काफी अनुकूल माना जाता है। चूँकि ये स्कूल आवासीय (Residential) होते हैं, इसलिए यहाँ का माहौल एक तरह से परिवार जैसा होता है। शिक्षक और विद्यार्थी दोनों ही कैंपस में रहते हैं, जिससे सुरक्षा और निगरानी पर पूरा ध्यान दिया जाता है। महिलाओं के लिए यह एक बड़ा सकारात्मक पहलू है क्योंकि उन्हें अकेलेपन या असुरक्षा की चिंता कम रहती है।
स्कूल कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होती है। यहाँ पर गार्ड, CCTV कैमरे और महिला स्टाफ की निगरानी रहती है। खासतौर पर महिला शिक्षकों के लिए स्कूल प्रशासन अलग से ध्यान देता है ताकि वे बिना डर के अपने काम पर ध्यान केंद्रित कर सकें। इसके अलावा, महिला उम्मीदवारों को स्कूल में सम्मान और सहयोग भी मिलता है। सहकर्मी शिक्षकों और छात्रों के बीच एक पेशेवर और सहयोगी माहौल रहता है।
काम के घंटे भी तय होते हैं, जिससे महिला उम्मीदवारों को अपने समय को बेहतर तरीके से मैनेज करने का मौका मिलता है। हॉस्टल वॉर्डन और सपोर्ट स्टाफ की मदद से महिलाएँ अपने कार्य-जीवन संतुलन को सहज बना सकती हैं।
संक्षेप में, EMRS में काम करना महिलाओं के लिए सुरक्षित और संतुलित अनुभव होता है। यह न केवल उनके करियर को आगे बढ़ाता है बल्कि उन्हें आत्मविश्वास भी देता है कि वे एक जिम्मेदार और सुरक्षित माहौल में काम कर रही हैं।
महिला उम्मीदवारों के लिए तैयारी टिप्स
EMRS परीक्षा में सफलता पाने के लिए महिला उम्मीदवारों को सही रणनीति और अनुशासन की ज़रूरत होती है। सबसे पहले यह ज़रूरी है कि वे सिलेबस और परीक्षा पैटर्न को अच्छी तरह समझ लें। जब आपको यह साफ हो जाएगा कि कौन-कौन से विषय से कितने प्रश्न आते हैं, तो तैयारी आसान हो जाएगी।
महिला उम्मीदवारों को अपनी तैयारी में डेली स्टडी प्लान बनाना चाहिए। जैसे सुबह 2–3 घंटे कठिन विषयों (Maths, Reasoning) को देना और शाम को आसान या रिवीजन वाले विषय (Pedagogy, GK, Current Affairs) पढ़ना। इससे दिमाग पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा और संतुलन बना रहेगा। अगर उम्मीदवार गृहिणी हैं या परिवार की जिम्मेदारी निभा रही हैं, तो वे छोटे-छोटे समय स्लॉट में पढ़ाई कर सकती हैं, जैसे बच्चों को सुलाने के बाद 1–2 घंटे पढ़ना।
इसके अलावा, महिला उम्मीदवारों को चाहिए कि वे Previous Year Papers हल करें और Online Mock Tests दें। इससे न केवल समय प्रबंधन सीखा जा सकता है, बल्कि परीक्षा में आने वाले प्रश्नों की प्रकृति भी समझ में आती है। साथ ही, हर हफ्ते अपने कमजोर विषयों पर फोकस करके सुधार करना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात है मोटिवेशन और आत्मविश्वास बनाए रखना। महिला उम्मीदवारों को याद रखना चाहिए कि परिवार और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन अगर वे लगातार और ईमानदारी से मेहनत करें तो सफलता निश्चित है।
काम और परिवार के बीच संतुलन
महिला उम्मीदवारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है नौकरी और परिवार के बीच सही संतुलन बनाना। खासतौर पर विवाहित महिलाओं के लिए यह जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है क्योंकि उन्हें बच्चों, घर और पढ़ाई तीनों का ध्यान रखना पड़ता है। EMRS जैसी नौकरी में चूँकि यह आवासीय स्कूल (Residential School) है, इसलिए समय प्रबंधन और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
एक तरीका यह है कि महिला उम्मीदवार डेली रूटीन को व्यवस्थित करें। जैसे सुबह जल्दी उठकर जरूरी घरेलू काम निपटा लें और फिर पढ़ाई या स्कूल से जुड़े कार्यों पर ध्यान दें। बच्चों की पढ़ाई या परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए भी दिन का अलग समय तय कर सकती हैं। इस तरह वे नौकरी और परिवार दोनों को बिना तनाव के संभाल सकती हैं।
परिवार का सहयोग भी यहाँ बहुत मायने रखता है। अगर घरवाले सहयोगी हैं और महिला की पढ़ाई व नौकरी को समझते हैं तो उनका बोझ काफी हद तक कम हो जाता है। वहीं, महिलाओं को भी यह सीखना चाहिए कि वे खुद पर ज्यादा दबाव न डालें और जरूरत पड़ने पर मदद माँगें।
EMRS में काम करने का फायदा यह है कि वहाँ का वातावरण सुरक्षित और व्यवस्थित होता है। वर्किंग ऑवर्स तय होने की वजह से महिलाएँ अपने परिवार के साथ समय बिता सकती हैं। धीरे-धीरे यह संतुलन आसान हो जाता है और महिलाएँ नौकरी के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारियाँ भी निभा पाती हैं।
महिला उम्मीदवारों की सफलता की कहानियाँ
किसी भी तैयारी में प्रेरणा (Motivation) बहुत जरूरी होती है, और यह प्रेरणा हमें उन महिलाओं से मिल सकती है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद सफलता हासिल की है। EMRS में भी कई महिला उम्मीदवार ऐसी हैं जिन्होंने परिवार, समाज और आर्थिक चुनौतियों को पार करते हुए एक मजबूत पहचान बनाई।
उदाहरण के लिए, कुछ महिलाएँ ऐसी थीं जिन्होंने छोटे बच्चों की देखभाल करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने दिन के काम पूरे करने के बाद रात को समय निकालकर पढ़ाई की और अंततः EMRS परीक्षा पास करके अध्यापिका बनीं। इससे यह साबित होता है कि अगर संकल्प मजबूत हो तो कोई भी परिस्थिति आपको रोक नहीं सकती।
कुछ महिला उम्मीदवार ग्रामीण इलाकों से थीं, जहाँ पढ़ाई के साधन सीमित थे। फिर भी उन्होंने ऑनलाइन क्लासेज और मोबाइल एप्स का इस्तेमाल करके खुद को तैयार किया और अच्छे अंकों से परीक्षा पास की। इन कहानियों से यह समझ आता है कि आधुनिक तकनीक और ईमानदार मेहनत से सफलता संभव है।
इन सफलता की कहानियों से महिला उम्मीदवारों को यह सीख मिलती है कि अगर वे समय प्रबंधन, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ तैयारी करें, तो चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो, वे अपने सपने पूरे कर सकती हैं। यह प्रेरणा न केवल उन्हें आगे बढ़ने में मदद करती है बल्कि दूसरों महिलाओं के लिए भी एक मिसाल बनती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
EMRS से जुड़ी कई बातें महिलाओं के मन में सवाल बनकर आती हैं। यहाँ कुछ ऐसे ही सामान्य प्रश्न और उनके सरल जवाब दिए गए हैं, जो लगभग हर महिला उम्मीदवार जानना चाहती है।
प्रश्न 1: क्या EMRS महिलाओं के लिए सुरक्षित है?
हाँ, बिल्कुल। चूँकि यह आवासीय स्कूल है और कैंपस में सुरक्षा के लिए गार्ड, CCTV और महिला स्टाफ मौजूद रहते हैं, इसलिए यहाँ का वातावरण सुरक्षित माना जाता है।
प्रश्न 2: महिला उम्मीदवारों को कितनी छुट्टियाँ मिलती हैं?
EMRS में महिलाओं को अन्य सरकारी शिक्षकों की तरह सामान्य छुट्टियाँ तो मिलती ही हैं। इसके अलावा उन्हें मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) और Child Care Leave जैसी विशेष छुट्टियों का लाभ भी मिलता है।
प्रश्न 3: क्या ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्टिंग मुश्किल होती है?
शुरुआती समय में हाँ, क्योंकि वहाँ शहर जैसी सुविधाएँ नहीं होतीं। लेकिन सरकार और प्रशासन महिला उम्मीदवारों के लिए सुरक्षित आवास और सुविधाएँ उपलब्ध कराने की कोशिश करते हैं। धीरे-धीरे माहौल सामान्य लगने लगता है।
प्रश्न 4: EMRS और Kendriya Vidyalaya में महिलाओं के लिए कौन बेहतर है?
दोनों ही अच्छे विकल्प हैं। अंतर सिर्फ यह है कि EMRS ज्यादातर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में हैं, जबकि KVS के स्कूल शहरी क्षेत्रों में भी मौजूद हैं। जो महिला ग्रामीण इलाकों में काम करने के लिए तैयार हैं, उनके लिए EMRS भी उतना ही अच्छा करियर विकल्प है।
ये FAQs महिलाओं को भरोसा दिलाते हैं कि EMRS उनके लिए एक सुरक्षित और स्थिर करियर विकल्प है।
निष्कर्ष
EMRS में नौकरी पाना महिलाओं के लिए सिर्फ एक करियर विकल्प नहीं है, बल्कि यह सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सम्मान से जुड़ा अवसर है। इस नौकरी के जरिए महिलाएँ न केवल अच्छी सैलरी और सरकारी सुविधाएँ प्राप्त करती हैं, बल्कि वे समाज के उन बच्चों को भी शिक्षा देती हैं जिन्हें सबसे ज्यादा जरूरत होती है। यह काम अपने आप में गर्व और संतोष का अनुभव कराता है।
इस गाइड से आपने जाना कि EMRS में महिलाओं के लिए कौन-कौन से अवसर उपलब्ध हैं, योग्यता और पात्रता क्या है, भर्ती प्रक्रिया कैसी होती है, सैलरी व सुविधाएँ क्या मिलती हैं और कैसे महिला उम्मीदवार परिवार और नौकरी के बीच संतुलन बना सकती हैं। इसके अलावा, सफलता की कहानियाँ और FAQs ने यह साफ कर दिया कि सही तैयारी और आत्मविश्वास से हर महिला इस राह पर आगे बढ़ सकती है।
अगर कोई महिला उम्मीदवार यह सोच रही है कि उसे EMRS परीक्षा देनी चाहिए या नहीं, तो जवाब है – हाँ, ज़रूर। यह नौकरी न केवल आपके करियर को सुरक्षित बनाएगी बल्कि आपको एक ऐसा मंच देगी जहाँ आप खुद को और समाज दोनों को बेहतर बना सकती हैं।
अंत में यही कहना सही होगा कि – “सपना देखने वाली महिलाएँ ही बदलाव लाती हैं, और EMRS जैसे अवसर उन सपनों को पूरा करने की राह दिखाते हैं।”








