मेवाड़ का इतिहास MCQ : राजस्थान प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए 120+ महत्वपूर्ण प्रश्न

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मेवाड़ का इतिहास MCQ

राजस्थान के इतिहास में मेवाड़ रियासत का एक अद्वितीय और गौरवशाली स्थान है। प्रतियोगी परीक्षाओं में इस टॉपिक से हमेशा कई चुनौतीपूर्ण सवाल पूछे जाते हैं।

अगर आप राजस्थान की किसी भी सरकारी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, तो आपके लिए मेवाड़ का इतिहास MCQ का अभ्यास करना बेहद जरूरी है।

इसी बात को ध्यान में रखते हुए, हमने आपके लिए एक एक्सपर्ट द्वारा तैयार किए गए 120 से अधिक उच्च-स्तरीय प्रश्नों का संग्रह यहाँ प्रस्तुत किया है।

चलिए, इन महत्वपूर्ण प्रश्नों के साथ अपनी तैयारी को परखते हैं और परीक्षा में अपने सिलेक्शन को पक्का करते हैं।

मेवाड़ का इतिहास MCQs

1
मेवाड़ के गुहिल वंश की उत्पत्ति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. डॉ. डी.आर. भण्डारकर गुहिलों को ब्राह्मण वंश से उत्पन्न मानते हैं।
2. डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा ब्राह्मण उत्पत्ति के सिद्धान्त का समर्थन करते हैं।
3. मुहणौत नैणसी ने अपनी ख्यात में गुहिलों की 24 शाखाओं का उल्लेख किया है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Important
✅ सही उत्तर: (B) केवल 1 और 3
व्याख्या: डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा गुहिलों की ब्राह्मण उत्पत्ति के सिद्धान्त के विरुद्ध हैं और वे उनको सूर्यवंशी मानते हैं। अतः कथन 2 गलत है। डॉ. डी.आर. भण्डारकर इन्हें ब्राह्मण मानते हैं तथा मुहणौत नैणसी ने इनकी 24 शाखाएं बताई हैं।
2
महाराणा कुम्भा द्वारा रचित और उनके दरबारी विद्वानों से संबंधित ग्रंथों के संदर्भ में असत्य कथन का चयन कीजिए:
Important
✅ सही उत्तर: (C) ‘एकलिंग महात्म्य’ का पूर्ण लेखन केवल महाराणा कुम्भा द्वारा किया गया था।
व्याख्या: ‘एकलिंग महात्म्य’ पुस्तक के केवल प्रथम भाग ‘राजवर्णन’ की रचना महाराणा कुम्भा ने की थी। इस पुस्तक का अंत कुम्भा के वैतनिक कवि ‘कान्ह व्यास’ ने किया था। अतः कथन C असत्य है।
3
हल्दीघाटी युद्ध (1576 ई.) को विभिन्न इतिहासकारों द्वारा दिए गए नामों को सुमेलित कीजिए:
I. कर्नल जेम्स टॉड – a. खमनौर का युद्ध
II. अबुल फजल – b. गोगुन्दा का युद्ध
III. अब्दुल कादिर बदायूनी – c. मेवाड़ की थर्मोपल्ली
Important
✅ सही उत्तर: (B) I-c, II-a, III-b
व्याख्या: कर्नल जेम्स टॉड ने इसे ‘मेवाड़ की थर्मोपल्ली’ (c), अबुल फजल ने ‘खमनौर का युद्ध’ (a) तथा आँखों देखा हाल लिखने वाले बदायूनी ने इसे ‘गोगुन्दा का युद्ध’ (b) कहा है।
4
महाराणा सांगा द्वारा लड़े गए प्रमुख युद्धों का सही कालानुक्रम (Chronological Order) कौन सा है?
Important
✅ सही उत्तर: (A) खातौली का युद्ध ➔ बाड़ी का युद्ध ➔ गागरोन का युद्ध ➔ बयाना का युद्ध
व्याख्या: खातौली का युद्ध (1517 ई.), बाड़ी (धौलपुर) का युद्ध (1518 ई.), गागरोन का युद्ध (1519 ई.) और बयाना का युद्ध (16 फरवरी 1527 ई.)। यह सांगा के युद्धों का सही क्रम है।
5
मेवाड़ में सर्वप्रथम नौकरशाही (Bureaucracy) का गठन किस शासक के काल में हुआ था और उसने किसे अपनी राजधानी बनाया था?
Important
✅ सही उत्तर: (C) अलट (आलूराव) – आहड़
व्याख्या: अलट (आलूराव) ने हूण राजकुमारी हरिया देवी से विवाह किया और सर्वप्रथम आहड़ को अपनी राजधानी बनाया। इन्होंने ही मेवाड़ में सर्वप्रथम नौकरशाही को लागू किया था।
6
‘हुरड़ा सम्मेलन’ (17 जुलाई 1734) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह सम्मेलन मराठों के बढ़ते हस्तक्षेप को रोकने के लिए बुलाया गया था।
2. इस सम्मेलन की रूपरेखा महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय द्वारा बनाई गई थी।
3. इस सम्मेलन की अध्यक्षता भी महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय ने ही की थी।
इनमें से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
Important
✅ सही उत्तर: (A) केवल 1 और 2
व्याख्या: योजना एवं रूपरेखा संग्राम सिंह द्वितीय ने बनाई थी, लेकिन जनवरी 1734 में उनकी मृत्यु हो जाने के कारण इस सम्मेलन की अध्यक्षता ‘जगत सिंह द्वितीय’ ने की थी। अतः कथन 3 गलत है।
7
अकबर द्वारा महाराणा प्रताप को अधीनता स्वीकार करवाने हेतु भेजे गए चार शिष्टमंडलों (दूतों) का सही क्रम क्या है?
Important
✅ सही उत्तर: (B) जलाल खां ➔ मानसिंह ➔ भगवानदास ➔ टोडरमल
व्याख्या: अकबर ने चार बार क्रमशः जलाल खाँ कोरची (पहली बार), मानसिंह कछवाहा, भगवानदास और टोडरमल (अंतिम बार) के नेतृत्व में शिष्टमण्डल भेजे थे। ट्रिक: ‘जमाभटो’ (J-M-B-T)।
8
निम्नलिखित में से मेवाड़ के किस शासक ने 1857 ई. के विद्रोह में ब्रिटिश सरकार का साथ दिया था तथा अपने शासनकाल में ‘कन्या वध’, ‘डाकन प्रथा’ और ‘सती प्रथा’ पर प्रतिबंध लगाया था?
Important
✅ सही उत्तर: (C) महाराणा स्वरूप सिंह
व्याख्या: महाराणा स्वरूप सिंह (1842-61 ई.) ने कन्या वध (1844), डाकन प्रथा (1853) और सती प्रथा (1861) पर प्रतिबंध लगाया था। इनकी मृत्यु पर पासवन ‘ऐंजाबाई’ सती हुई थी, जो मेवाड़ में सती होने की अंतिम घटना थी।
9
‘चेतावनी रा चूंगट्या’ नामक डिंगल भाषा के सोरठे लिखकर किस कवि ने महाराणा फतह सिंह को 1903 ई. के दिल्ली दरबार में शामिल होने से रोका था?
Important
✅ सही उत्तर: (C) केसरी सिंह बारहठ
व्याख्या: 1903 ई. में दिल्ली दरबार में शामिल होने जा रहे महाराणा फतह सिंह को केसरी सिंह बारहठ ने ‘चेतावनी रा चूंगट्या’ (13 सोरठे) लिखकर उनके स्वाभिमान को जगाया, जिससे वे दरबार में शामिल हुए बिना ही लौट आए।
10
मेवाड़ और मारवाड़ की सीमा का निर्धारण करने वाली ऐतिहासिक ‘आँवल-बाँवल की संधि’ (1453 ई.) किन दो शासकों के मध्य हुई थी?
Important
✅ सही उत्तर: (B) महाराणा कुम्भा और राव जोधा
व्याख्या: कुम्भा की दादी और राव जोधा की बुआ हंसाबाई ने 1453 ई. में ‘आँवल-बाँवल’ की संधि करवाई। इसके तहत सीमा निर्धारण हुआ तथा राव जोधा ने अपनी पुत्री श्रृंगार देवी का विवाह कुम्भा के पुत्र रायमल के साथ किया।
11
मेवाड़ रियासत के इतिहास में ‘सोलह, बत्तीस और गोल’ शब्दावली का संबंध किससे है?
Important
✅ सही उत्तर: (C) सामंतों की श्रेणियों से
व्याख्या: मेवाड़ रियासत के सामंत ‘उमराव’ कहलाते थे। ‘सोलह, बत्तीस और गोल’ का संबंध मेवाड़ राज्य में सामंतों की श्रेणियों (Categories of Feudatory Chiefs) से है।
12
निम्नलिखित में से किस शासक ने ‘विजय कटकातु’ की उपाधि धारण की थी और औरंगजेब द्वारा लगाए गए जजिया कर का कड़ा विरोध करते हुए हिन्दू देवमूर्तियों को संरक्षण प्रदान किया था?
Important
✅ सही उत्तर: (A) महाराणा राजसिंह
व्याख्या: महाराणा राजसिंह (1652-1680 ई.) ने ‘विजय कटकातु’ की उपाधि ली थी। इन्होंने किशनगढ़ की राजकुमारी चारुमती से विवाह किया, औरंगजेब के जजिया कर का विरोध किया और श्रीनाथजी (नाथद्वारा) व द्वारिकाधीश (कांकरोली) के मंदिर बनवाए।
13
मेवाड़ के इतिहास में कुम्भलगढ़ प्रशस्ति में किस शासक को ‘विषम घाटी पंचानन’ (विकट आक्रमणों में सिंह के समान) की उपाधि दी गई है, जिन्हें ‘मेवाड़ का उद्धारक’ भी कहा जाता है?
Important
✅ सही उत्तर: (C) राणा हम्मीर देव
व्याख्या: राणा हम्मीर देव (1326-64 ई.) ने सिसोदिया साम्राज्य की स्थापना की। इन्हें ‘मेवाड़ का उद्धारक’ तथा कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति में ‘विषम घाटी पंचानन’ एवं ‘वीर राजा’ की उपाधि दी गई है।
14
किस युद्ध से पूर्व मुगल सम्राट बाबर ने ‘जिहाद (धर्म युद्ध)’ का नारा दिया और राजपूतों को पराजित करने के बाद ‘गाजी’ की उपाधि धारण की?
Important
✅ सही उत्तर: (B) खानवा का युद्ध
व्याख्या: 17 मार्च 1527 को हुए खानवा के युद्ध में राजपूत सेना का मनोबल तोड़ने और अपनी सेना को उकसाने के लिए बाबर ने ‘जिहाद’ (धर्म युद्ध) का नारा दिया था।
15
चित्तौड़गढ़ दुर्ग का दूसरा साका (1535 ई.) किसके नेतृत्व में हुए जौहर के साथ संपन्न हुआ था, जब गुजरात के शासक बहादुर शाह ने आक्रमण किया था?
Important
✅ सही उत्तर: (B) हाड़ी रानी कर्मावती
व्याख्या: 8 मार्च 1535 को बहादुर शाह के आक्रमण के समय रावत बाघसिंह के नेतृत्व में केसरिया हुआ और हाड़ी रानी कर्मावती के नेतृत्व में 1200 महिलाओं ने जौहर किया। यह चित्तौड़ का दूसरा साका था।
16
महाराणा प्रताप के विरुद्ध अकबर द्वारा भेजा गया अंतिम मुग़ल सैन्य अभियान (1584-85 ई.) किसके नेतृत्व में था, जो पूर्णतः असफल रहा?
Important
✅ सही उत्तर: (C) जगन्नाथ कछवाहा
व्याख्या: महाराणा प्रताप के विरुद्ध अंतिम मुगल आक्रमण (1584-85 ई.) का नेतृत्व जगन्नाथ कछवाहा ने किया था, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद 1585 से 1596 तक अघोषित संधि (कोई आक्रमण नहीं) का काल रहा।
17
मेवाड़ में ‘वाल्टरकृत राजपूत हितकारिणी सभा’ (1889 ई.) की स्थापना किस महाराणा के काल में हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य राजपूतों में बहुविवाह, बाल विवाह व फिजूलखर्ची को रोकना था?
Important
✅ सही उत्तर: (B) महाराणा फतह सिंह
व्याख्या: महाराणा फतह सिंह (1884-1930 ई.) के काल में 1889 ई. में उदयपुर में ‘वाल्टरकृत राजपूत हितकारिणी सभा’ की स्थापना हुई थी।
18
राणा सांगा के संदर्भ में असत्य कथन का चयन करें:
Important
✅ सही उत्तर: (C) सांगा की मृत्यु कालपी में हुई और इनकी छतरी कुम्भलगढ़ दुर्ग में स्थित है।
व्याख्या: राणा सांगा को कालपी (मध्य प्रदेश) में जहर दिया गया जिससे 30 जनवरी 1528 को उनकी मृत्यु हुई। उनका दाह संस्कार ‘माण्डलगढ़’ में किया गया जहाँ इनकी छतरी बनी हुई है, तथा सांगा का स्मारक बसवा (दौसा) में है, न कि कुम्भलगढ़ में।
19
मेवाड़ के गुहिल वंश की ‘रावल शाखा’ का अंतिम शासक कौन था, जिसके समय अलाउद्दीन खिलजी ने 1303 ई. में चित्तौड़ पर आक्रमण किया था?
Important
✅ सही उत्तर: (B) रावल रतनसिंह
व्याख्या: रतनसिंह रावल शाखा का अंतिम शासक था। अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण (1303 ई.) में इनके नेतृत्व में केसरिया और रानी पद्मिनी के नेतृत्व में जौहर हुआ जो चित्तौड़ का प्रथम साका था।
20
मेवाड़ राज्य के राजचिह्न (State Emblem) और राजवाक्य के संबंध में क्या अंकित है?
Important
✅ सही उत्तर: (B) राजध्वज पर ‘उगता सूरज एवं धनुष बाण’ है और राजचिह्न में ‘राजपूत-भील’ अंकित हैं।
व्याख्या: गुहिल वंश के राजध्वज पर ‘उगता सूरज एवं धनुष बाण’ अंकित है। मेवाड़ का राजवाक्य ‘जो दृढ़ राखे धर्म को, तिहीं राखे करतार’ है तथा राजचिह्न में एक तरफ राजपूत और दूसरी तरफ भील (राणा पूंजा) अंकित है।
21
बप्पा रावल (कालबोज) के ऐतिहासिक योगदान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों का विश्लेषण कीजिए:
1. इन्होंने हारित ऋषि के आशीर्वाद से 734 ई. में मानमोरी को हराकर चित्तौड़ पर अधिकार किया।
2. मेवाड़ में सर्वप्रथम सोने के सिक्के चलाने का श्रेय इन्हें ही दिया जाता है।
3. इन्होंने अपनी राजधानी नागदा से हटाकर आहड़ को बनाया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन असत्य है/हैं?
Important
✅ सही उत्तर: (C) केवल 3
व्याख्या: बप्पा रावल की राजधानी और समाधि ‘नागदा’ में ही थी। आहड़ को सर्वप्रथम राजधानी बनाने का कार्य मेवाड़ शासक ‘अलट (आलूराव)’ ने किया था। अतः कथन 3 पूर्णतः असत्य है।

निष्कर्ष (Keywords): बप्पा रावल, गुहिल वंश के वास्तविक संस्थापक, हारित ऋषि, सोने के सिक्के और नागदा राजधानी जैसे महत्वपूर्ण तथ्य परीक्षा की दृष्टि से अति-महत्वपूर्ण हैं।
22
इतिहासकार जयसिंह सूरि कृत ‘हम्मीर मदमर्दन’ ग्रंथ के अनुसार, मेवाड़ के किस शासक ने ‘भूताला के युद्ध’ (1227 ई.) में दिल्ली सुल्तान इल्तुतमिश को पराजित किया था?
Important
✅ सही उत्तर: (C) जैत्रसिंह
व्याख्या: जैत्रसिंह (1213-53 ई.) ने भूताला के युद्ध में इल्तुतमिश को पराजित किया था। इल्तुतमिश के आक्रमण से परेशान होकर ही इन्होंने अपनी राजधानी नागदा से हटाकर चित्तौड़ को बनाया था।

निष्कर्ष (Keywords): जैत्रसिंह का काल मेवाड़ के मध्यकालीन इतिहास का स्वर्ण युग माना जाता है। भूताला का युद्ध और हम्मीर मदमर्दन ग्रंथ (जयसिंह सूरि) का संबंध सीधा इन्ही से है।
23
मेवाड़ महाराणाओं के उपनामों और उपाधियों को सुमेलित कीजिए:
सूची-I (उपाधि)
I. हिन्दू सुरताण
II. हिन्दूपत
III. मेवाड़ का भीष्म पितामह
सूची-II (व्यक्ति)
a. राणा सांगा
b. राणा चूण्डा
c. महाराणा कुम्भा
Important
✅ सही उत्तर: (B) I-c, II-a, III-b
व्याख्या: मुस्लिम शासकों को पराजित करने के कारण महाराणा कुम्भा को ‘हिन्दू सुरताण’ (I-c), राणा सांगा को ‘हिन्दूपत’ (II-a) और राज्य का त्याग कर आजीवन कुंवारे रहने की प्रतिज्ञा के कारण राणा चूण्डा को ‘मेवाड़ का भीष्म पितामह’ (III-b) कहा जाता है।

निष्कर्ष (Keywords): उपाधियाँ राजपूताना के शासकों के शौर्य और चरित्र को दर्शाती हैं। कुम्भा, सांगा और चूण्डा से जुड़ी ये विशेष उपाधियाँ बार-बार परीक्षा में पूछी जाती हैं।
24
महाराणा कुम्भा के विरुद्ध 1456 ई. में ‘चम्पानरे की संधि’ (Champaner Treaty) किन दो राज्यों के सुल्तानों के मध्य हुई थी?
Important
✅ सही उत्तर: (A) मालवा और गुजरात
व्याख्या: महाराणा कुम्भा के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम और गुजरात के सुल्तान कुतुबुद्दीन के मध्य 1456 ई. में यह संधि हुई थी। 1457 ई. में बदनौर के युद्ध में कुम्भा ने इन्हें पराजित किया।

निष्कर्ष (Keywords): चम्पानेर की संधि महाराणा कुम्भा की सैन्य कूटनीति और मालवा-गुजरात गठबंधन को विफल करने की उनकी क्षमता का एक ऐतिहासिक प्रमाण है।
25
मेवाड़ के शासक और उनसे संबंधित घटनाओं का कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है?
Important
✅ सही उत्तर: (C) महाराणा उदयसिंह – दिवेर का युद्ध (1582 ई.)
व्याख्या: दिवेर का युद्ध 1582 ई. में महाराणा प्रताप (और उनके पुत्र अमर सिंह) तथा मुग़ल सेना (अकबर के किलेदार सुल्तान खाँ) के मध्य हुआ था। इसमें प्रताप की विजय हुई थी। अतः यह उदयसिंह से संबंधित नहीं है।

निष्कर्ष (Keywords): मेवाड़ के प्रमुख युद्धों (झीलवाड़ा, बाड़ी, सारंगपुर, दिवेर) और उनके संबंधित शासकों की स्पष्ट जानकारी RPSC एवं RSMSSB की परीक्षाओं के लिए अनिवार्य है।
26
चित्तौड़ के तीसरे साके (1568 ई.) के समय ‘जयमल व फत्ता’ के अद्भुत शौर्य से प्रभावित होकर किस मुग़ल सम्राट ने आगरा के किले पर उनकी गजारूढ़ मूर्तियां लगवाई थीं?
Important
✅ सही उत्तर: (C) अकबर
व्याख्या: 1567-68 में अकबर के चित्तौड़ आक्रमण के समय जयमल राठौड़ और फत्ता सिसोदिया वीरगति को प्राप्त हुए थे। 30,000 लोगों के कत्लेआम के कलंक को मिटाने और इनकी वीरता से प्रभावित होकर अकबर ने आगरा के किले पर इनकी गजारूढ़ पाषाण प्रतिमाएं लगवाईं।

निष्कर्ष (Keywords): जयमल-फत्ता का बलिदान चित्तौड़ के तीसरे साके का मुख्य आकर्षण है। अकबर द्वारा स्थापित ये मूर्तियाँ उनके शौर्य के प्रति मुगलों के सम्मान का प्रतीक थीं।
27
हल्दीघाटी युद्ध (1576 ई.) में मुग़ल सेनापति मानसिंह के हाथी का क्या नाम था?
Important
✅ सही उत्तर: (B) मर्दाना
व्याख्या: हल्दीघाटी युद्ध को हाथियों का युद्ध भी कहते हैं। इसमें मानसिंह का हाथी ‘मर्दाना’ तथा अकबर का हाथी ‘हवाई’ था। महाराणा प्रताप के प्रमुख हाथी ‘रामप्रसाद’ और ‘लूणा’ थे।

निष्कर्ष (Keywords): हल्दीघाटी युद्ध में हाथियों (मर्दाना, रामप्रसाद, लूणा) का संघर्ष एक अद्वितीय ऐतिहासिक तथ्य है जिसे अक्सर मिलान वाले प्रश्नों में पूछा जाता है।
28
‘राजसमंद झील’ का निर्माण, ‘श्रीनाथजी’ का मंदिर (नाथद्वारा) और ‘द्वारिकाधीश’ मंदिर (कांकरोली) का निर्माण मेवाड़ के किस शासक की देन है?
Important
✅ सही उत्तर: (B) महाराणा राजसिंह
व्याख्या: महाराणा राजसिंह (1652-1680 ई.) ने औरंगजेब की मूर्तियों को तोड़ने की नीति के विरुद्ध वल्लभ सम्प्रदाय की मूर्तियों को संरक्षण दिया। इन्होंने सिहाड़ (नाथद्वारा) में श्रीनाथजी और कांकरोली में द्वारिकाधीश मंदिर बनवाए तथा राजसमंद झील का निर्माण करवाया।

निष्कर्ष (Keywords): महाराणा राजसिंह का काल सांस्कृतिक और धार्मिक संरक्षण (श्रीनाथजी मंदिर, राजसमंद झील) तथा मुग़ल प्रतिरोध (औरंगजेब का विरोध) दोनों दृष्टियों से मेवाड़ के इतिहास में स्वर्णिम है।
29
महाराणा प्रताप से संबंधित स्थलों के कालक्रम को सही व्यवस्थित करें (सबसे पहले से अंत तक):
1. चावण्ड (आपातकालीन राजधानी)
2. कुम्भलगढ़ (जन्म स्थान)
3. बाण्डोली (दाह संस्कार/छतरी)
4. गोगुन्दा (प्रथम राज्याभिषेक)
Important
✅ सही उत्तर: (B) 2 ➔ 4 ➔ 1 ➔ 3
व्याख्या: महाराणा प्रताप का जन्म कुम्भलगढ़ (1540 ई.) में हुआ। उनका प्रथम राज्याभिषेक गोगुन्दा (1572 ई.) में हुआ। उन्होंने 1585 ई. में चावण्ड को आपातकालीन राजधानी बनाया और उनकी मृत्यु के पश्चात बाण्डोली में 8 खम्भों की छतरी बनी।

निष्कर्ष (Keywords): महाराणा प्रताप का जीवन चक्र कुम्भलगढ़ से शुरू होकर बाण्डोली पर समाप्त होता है। इन भौगोलिक स्थानों (गोगुन्दा, चावण्ड) का कालक्रम इतिहास की समझ को पुख्ता करता है।
30
मेवाड़ के इतिहास का एक प्रसिद्ध ‘कृष्णा कुमारी विवाद’ (1807 ई. गिंगोली का युद्ध) मेवाड़ के किस शासक की पुत्री से संबंधित था?
Important
✅ सही उत्तर: (C) महाराणा भीमसिंह
व्याख्या: महाराणा भीमसिंह की पुत्री कृष्णा कुमारी के विवाह को लेकर मारवाड़ (मानसिंह राठौड़) और आमेर (जगतसिंह द्वितीय) के मध्य 1807 ई. में गिंगोली (परबतसर) का युद्ध हुआ था। अंततः अमीर खां पिण्डारी के कहने पर 1810 में कृष्णा कुमारी को जहर देकर मार दिया गया।

निष्कर्ष (Keywords): कृष्णा कुमारी विवाद राजपूताना की रियासतों के पतन और पिण्डारियों के बढ़ते हस्तक्षेप का सूचक है। यह विवाद महाराणा भीमसिंह के शासनकाल की सबसे दुखद घटना थी।
31
इतिहासकार वीर विनोद के लेखक श्यामलदास के अनुसार, मेवाड़ के 84 दुर्गों में से 32 दुर्गों का निर्माण किसने करवाया था, जिसके कारण उन्हें ‘स्थापत्य कला का जनक’ कहा जाता है?
Important
✅ सही उत्तर: (C) महाराणा कुम्भा
व्याख्या: श्यामलदास रचित ‘वीर विनोद’ के अनुसार महाराणा कुम्भा ने मेवाड़ के 84 में से 32 दुर्ग (कुम्भलगढ़, अचलगढ़, बसंतगढ़, भोमट दुर्ग आदि) बनवाए। इसलिए इन्हें राजस्थान की ‘स्थापत्य कला का जनक’ कहा जाता है।

निष्कर्ष (Keywords): स्थापत्य कला के क्षेत्र में कुम्भा का योगदान अतुलनीय है। वीर विनोद ग्रंथ और इसके रचयिता श्यामलदास का यह तथ्य परीक्षा में लगातार पूछा जाता है।
32
मेवाड़ महाराणा कुम्भा की पुत्री का नाम क्या था, जो एक प्रसिद्ध संगीतज्ञा थीं और जिन्हें ‘वागीश्वरी’ के नाम से जाना जाता था?
Important
✅ सही उत्तर: (C) रमाबाई
व्याख्या: महाराणा कुम्भा स्वयं एक महान संगीतज्ञ (वीणा वादक) थे। उनकी पुत्री ‘रमाबाई’ भी एक प्रसिद्ध संगीतज्ञा थीं, जिन्हें जावर शिलालेख में ‘वागीश्वरी’ उपाधि से विभूषित किया गया है।

निष्कर्ष (Keywords): कला और संस्कृति के संरक्षण में मेवाड़ का इतिहास समृद्ध है। रमाबाई का संगीत ज्ञान और उनकी ‘वागीश्वरी’ उपाधि कला के प्रति कुम्भा परिवार के समर्पण को दर्शाती है।
33
मेवाड़ रियासत के उस शासक का चयन करें जिसके शासनकाल में भारत की स्वतंत्रता के पश्चात् (18 अप्रैल 1948 ई.) उदयपुर रियासत का विलय ‘संयुक्त राजस्थान’ में हुआ और उन्हें ‘महाराज प्रमुख’ बनाया गया?
Important
✅ सही उत्तर: (B) महाराणा भूपाल सिंह
व्याख्या: महाराणा भूपाल सिंह (1930-56 ई.) मेवाड़ रियासत के अंतिम शासक थे। राजस्थान एकीकरण के तृतीय चरण (संयुक्त राजस्थान) में उदयपुर के विलय पर इन्हें ‘महाराज प्रमुख’ का पद दिया गया था।

निष्कर्ष (Keywords): राजस्थान एकीकरण की प्रक्रिया में महाराणा भूपाल सिंह की भूमिका महत्वपूर्ण है। महाराज प्रमुख का पद विशेष रूप से केवल इन्ही के लिए सृजित किया गया था।
34
निम्नलिखित में से किस मेवाड़ शासक ने मुग़ल सम्राट शाहजहां (खुर्रम) को विद्रोह के दौरान ‘पिछोला झील’ के जगमन्दिर महल में शरण दी थी?
Important
✅ सही उत्तर: (B) महाराणा कर्णसिंह
व्याख्या: महाराणा कर्णसिंह (1620-28 ई.) मेवाड़ के पहले व्यक्ति थे जिन्हें मुगल दरबार में मनसबदारी दी गई। इन्होंने ही 1623-24 ई. में विद्रोही शाहजादा खुर्रम (शाहजहां) को जगमन्दिर महल में शरण दी थी, जिससे प्रेरित होकर बाद में ताजमहल का निर्माण हुआ।

निष्कर्ष (Keywords): मेवाड़-मुग़ल संबंधों के इतिहास में महाराणा कर्णसिंह का काल सौहार्द और कूटनीति का प्रतीक था। जगमन्दिर महल का वास्तुशिल्प शाहजहां के लिए प्रेरणा स्रोत बना।
35
मेवाड़ के महाराणा उदयसिंह ने अपनी किस रानी के प्रभाव में आकर प्रताप जैसे योग्य पुत्र के स्थान पर ‘जगमाल’ को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था?
Important
✅ सही उत्तर: (B) भटियाणी रानी धीरबाई
व्याख्या: महाराणा उदयसिंह ने अपनी प्रिय रानी (जैसलमेर की भाटी राजवंश की) ‘धीरबाई’ से उत्पन्न पुत्र जगमाल को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया था। प्रताप की माता का नाम जयवंता बाई (पाली के अखेराज सोनगरा की पुत्री) था।

निष्कर्ष (Keywords): उत्तराधिकार का यह विवाद मेवाड़ के सरदारों द्वारा सुलझाया गया जिन्होंने प्रताप का राज्याभिषेक किया। रानी धीरबाई और जगमाल का यह संदर्भ इतिहास के पन्नों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
36
मेवाड़ महाराणा सज्जन सिंह के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों में से कौन सा सही नहीं है?
Important
✅ सही उत्तर: (D) इनके समय मेवाड़ राज्य और ब्रिटिश कम्पनी के बीच ‘नमक समझौता’ रद्द कर दिया गया था।
व्याख्या: यह कथन गलत है क्योंकि 1878 ई. को मेवाड़ राज्य ने कम्पनी के साथ ‘नमक समझौता’ (Salt Agreement) किया था, न कि रद्द किया था। बाकी सभी कथन सज्जन सिंह के विकास कार्यों के संबंध में पूर्णतः सत्य हैं।

निष्कर्ष (Keywords): महाराणा सज्जन सिंह का काल मेवाड़ में आधुनिकता (सज्जन यन्त्रालय) और ब्रिटिश प्रशासन के साथ सहयोग (नमक समझौता, दिल्ली दरबार) का युग था।
37
निम्नलिखित में से ‘देवबारी समझौता’ (Debari Agreement) के तहत किस मेवाड़ शासक ने अपनी पुत्री चन्द्र कुँवर का विवाह आमेर के सवाई जयसिंह के साथ इस शर्त पर किया कि उससे उत्पन्न पुत्र ही आमेर का उत्तराधिकारी होगा?
Important
✅ सही उत्तर: (A) महाराणा अमरसिंह द्वितीय
व्याख्या: महाराणा अमरसिंह द्वितीय (1698-1710 ई.) ने देवबारी समझौते के तहत आमेर के सवाई जयसिंह को समर्थन दिया और अपनी पुत्री का विवाह सशर्त किया। इसी शर्त के कारण बाद में जयपुर में उत्तराधिकार युद्ध (ईश्वरी सिंह और माधोसिंह) हुए।

निष्कर्ष (Keywords): देवबारी समझौता राजपूताना की राजनीति में एक निर्णायक मोड़ था, जिसने मेवाड़, मारवाड़ और आमेर को मुगलों के खिलाफ एकजुट किया, लेकिन बाद में गृहयुद्ध का कारण बना।
38
राणा सांगा और बाबर के मध्य लड़े गए ‘खानवा के युद्ध’ के दौरान सांगा के घायल होने पर राजपुताना के किस सरदार ने मेवाड़ का राजमुकुट धारण कर सेना का नेतृत्व किया था?
Important
✅ सही उत्तर: (C) झाला अज्जा
व्याख्या: खानवा के युद्ध (1527 ई.) में राणा सांगा के मूर्छित होने पर सादड़ी के ‘झाला अज्जा’ ने उनका राजमुकुट धारण कर युद्ध जारी रखा था। (नोट: हल्दीघाटी में प्रताप का मुकुट झाला मन्ना/बीदा ने धारण किया था)।

निष्कर्ष (Keywords): झाला अज्जा का यह त्याग राजपूतों की स्वामीभक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है। परीक्षा में प्रायः सांगा (झाला अज्जा) और प्रताप (झाला बीदा) के इस अंतर पर प्रश्न बनता है।
39
मेवाड़ के महाराणा लाखा (लक्षसिंह) के शासनकाल से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य कौन से हैं?
1. इनके समय में जावर (उदयपुर) में चाँदी की खान निकली।
2. इनका विवाह बुढ़ापे में मारवाड़ की हंसबाई से सशर्त हुआ।
3. इनके पुत्र मोकल की हत्या महपा पंवार के कहने पर चाचा व मेरा ने कर दी थी।
सही कूट का चयन करें:
Important
✅ सही उत्तर: (C) 1, 2 और 3 तीनों
व्याख्या: राणा लाखा के समय जावर की खान से मेवाड़ की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई। हंसबाई से इनका विवाह हुआ और इनके पुत्र मोकल को झीलवाड़ा अभियान (1433 ई.) में चाचा और मेरा ने मार दिया था। अतः तीनों तथ्य सही रूप से लाखा और उनके वंश से जुड़े हैं।

निष्कर्ष (Keywords): राणा लाखा का काल आर्थिक उन्नति (चाँदी की खान) और कूटनीतिक विवाह (हंसबाई) के कारण मेवाड़ के इतिहास में एक महत्वपूर्ण संक्रमण काल माना जाता है।
40
महाराणा कुम्भा द्वारा निर्मित और स्थापित ‘कीर्तिस्तम्भ’ (विजय स्तम्भ) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
Important
✅ सही उत्तर: (B) यह 9 मंजिला है जो मालवा विजय (सारंगपुर युद्ध) के उपलक्ष्य में बना तथा भगवान विष्णु को समर्पित है।
व्याख्या: मालवा (महमूद खिलजी) पर 1437 ई. की विजय के उपलक्ष्य में कुम्भा ने 9 मंजिला विशाल कीर्ति स्तम्भ/विजय स्तम्भ बनवाया। इसे विष्णु ध्वज भी कहते हैं क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित है। ‘कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति’ के लेखक अत्री और महेश थे।

निष्कर्ष (Keywords): मालवा विजय और विजय स्तम्भ महाराणा कुम्भा की सैन्य और सांस्कृतिक उपलब्धियों के सर्वोच्च प्रतीक हैं जो विष्णु भक्ति को भी प्रदर्शित करते हैं।
41
मेवाड़ के गुहिल वंश का विभाजन ‘रावल शाखा’ और ‘राणा (सिसोदिया) शाखा’ में किस शासक के काल में हुआ था?
Important
✅ सही उत्तर: (A) रणसिंह (1158 ई.)
व्याख्या: रणसिंह के शासन काल में गुहिल वंश दो भागों में बँट गया। इनके पुत्र ‘क्षेमसिंह’ ने रावल शाखा का निर्माण कर चित्तौड़ पर शासन किया, जबकि दूसरे पुत्र ‘राहप’ ने सिसोदा ग्राम बसाकर राणा शाखा (सिसोदिया) की शुरुआत की।
42
‘कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति’ (1460 ई.) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इसके प्रशस्तिकार ‘महेश भट्ट’ ने प्रशस्ति में कुम्भा द्वारा रचित ग्रंथों का उल्लेख किया है।
2. इस प्रशस्ति के अनुसार कुम्भा को वीणा बजाने में दक्षता हासिल थी।
3. इसमें कुम्भा द्वारा रचित 4 नाटकों में मेवाड़ी भाषा के प्रयोग का उल्लेख है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सत्य है/हैं?
Important
✅ सही उत्तर: (D) 1, 2 और 3 तीनों
व्याख्या: दिए गए तीनों कथन ‘कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति’ के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। महेश भट्ट ने इसमें कुम्भा के लेखन, उनकी वीणा वादन दक्षता और 4 नाटकों में मेवाड़ी भाषा के प्रयोग पर प्रकाश डाला है।
43
महाराणा प्रताप के दरबारी विद्वान ‘चक्रपाणि मिश्र’ द्वारा रचित ग्रंथों का सही समूह कौन सा है?
Important
✅ सही उत्तर: (A) विश्ववल्लभ, मुहूर्तमाला, राज्याभिषेक पद्धति
व्याख्या: चक्रपाणि मिश्र महाराणा प्रताप के काल के प्रसिद्ध विद्वान थे। उन्होंने ‘विश्ववल्लभ’ (9 अध्याय, ज्ञान विज्ञान विषयक), ‘मुहूर्तमाला’, ‘राज्याभिषेक पद्धति’ और ‘व्यवहारदर्श’ नामक ग्रंथों की रचना की थी।
44
मेवाड़ की रक्षा के लिए अपने पुत्र ‘चन्दन’ का बलिदान देकर महाराणा उदयसिंह के प्राणों की रक्षा करने वाली पन्नाधाय ने उदयसिंह को किस दुर्ग में सुरक्षित पहुँचाया था?
Important
✅ सही उत्तर: (C) कुम्भलगढ़ दुर्ग
व्याख्या: पन्नाधाय ने बनवीर से उदयसिंह को बचाकर कीरत व वारीन नामक दम्पत्ति के संरक्षण में कुम्भलगढ़ के किलेदार ‘आशा देवपुरा’ के पास ले गईं, जहाँ उदयसिंह का लालन-पालन हुआ।
45
‘आहड़ (उदयपुर)’ में स्थित मेवाड़ के महाराणाओं की छतरियों (महासतियाँ) में सबसे पहली छतरी किस महाराणा की बनी हुई है?
Important
✅ सही उत्तर: (C) महाराणा अमर सिंह प्रथम
व्याख्या: महाराणा प्रताप के पुत्र अमर सिंह (1597-1620 ई.) की मृत्यु के बाद उनकी छतरी आहड़ (उदयपुर) में बनाई गई थी। ध्यातव्य रहे- अमरसिंह मेवाड़ का पहला महाराणा था, जिसकी छतरी आहड़ में बनी है।
46
अकबर के सेनापति शाहबाज खाँ ने महाराणा प्रताप के विरुद्ध कुम्भलगढ़ दुर्ग पर कितनी बार और किन वर्षों में आक्रमण किया था?
Important
✅ सही उत्तर: (C) तीन बार (1577, 1578, 1579)
व्याख्या: हल्दीघाटी युद्ध के बाद प्रताप ने कुम्भलगढ़ को अपना केंद्र बनाया। इससे क्रुद्ध होकर अकबर ने शाहबाज खाँ को भेजा, जिसने कुम्भलगढ़ पर कुल तीन बार (1577, 1578, 1579 ई.) आक्रमण किया था।
47
“चूड़ावत मांगे सैनानी, सर काट दे दियो क्षत्राणी।” यह प्रसिद्ध पंक्ति मेवाड़ के किस शासक के काल की घटना से संबंधित है?
Important
✅ सही उत्तर: (A) महाराणा राजसिंह
व्याख्या: यह पंक्ति हाड़ी रानी ‘सहल कंवर’ के लिए प्रसिद्ध है, जिन्होंने अपने पति (सलूम्बर जागीर के सामंत रतनसिंह) को युद्ध में जाने से पहले अपना सिर काटकर भिजवा दिया था। यह घटना महाराणा राजसिंह के काल की है जब वे औरंगजेब के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे।
48
मेवाड़ महाराणाओं से संबंधित निम्नलिखित तथ्यों को सुमेलित कीजिए:
सूची-I (कार्य/उपाधि)
I. सहेलियों की बाड़ी का निर्माण
II. ईस्ट इण्डिया कम्पनी से संधि (1818 ई.)
III. हिन्दूपत व सैनिकों का भग्नावशेष
सूची-II (शासक)
a. राणा सांगा
b. महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय
c. महाराणा भीमसिंह
Important
✅ सही उत्तर: (B) I-b, II-c, III-a
व्याख्या: उदयपुर में सहेलियों की बाड़ी का निर्माण महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय ने करवाया। 1818 ई. में ईआईसी (EIC) से संधि महाराणा भीमसिंह ने की। राणा सांगा को ‘हिन्दूपत’ और ‘सैनिकों का भग्नावशेष’ कहा जाता है।
49
हल्दीघाटी के युद्ध का आँखों देखा हाल अपनी पुस्तक “मुन्तखब-उल-तवारीख” में फ़ारसी भाषा में किस इतिहासकार ने लिखा था?
Important
✅ सही उत्तर: (B) अब्दुल कादिर बदायूनी
व्याख्या: अब्दुल कादिर बदायूनी ने हल्दीघाटी युद्ध का सजीव चित्रण अपनी पुस्तक ‘मुन्तखब-उल-तवारीख’ में किया है। अबुल फजल ने ‘अकबरनामा/आइन-ए-अकबरी’ में इसका वर्णन किया है।
50
मेवाड़ के महाराणा को राजधानी छोड़ने से पहले अपने इष्ट देव ‘एकलिंग जी’ से स्वीकृति लेनी पड़ती थी, इस ऐतिहासिक परम्परा को किस नाम से जाना जाता था?
Important
✅ सही उत्तर: (C) आसकाँ
व्याख्या: मेवाड़ के शासक एकलिंग जी को स्वयं के राजा मानते थे और स्वयं को उनका ‘दीवान’। राजधानी छोड़ने से पहले वे एकलिंग जी से स्वीकृति लेते थे, जिसे मेवाड़ की भाषा में ‘आसकाँ’ (आज्ञा लेना) कहते थे।
51
राणा सांगा द्वारा लड़े गए ‘खानवा के युद्ध’ (1527 ई.) में सांगा की सेना में शामिल राजपूत सरदारों का कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है?
Important
✅ सही उत्तर: (C) आमेर – सवाई जयसिंह
व्याख्या: खानवा के युद्ध में आमेर का राजा ‘पृथ्वीराज’ सांगा की ओर से लड़ा था, न कि सवाई जयसिंह (सवाई जयसिंह का काल बहुत बाद का है)। बाकी सभी राजपूत सरदार सांगा के पक्ष में सुमेलित हैं।
52
महाराणा कुम्भा के दरबार में उपस्थित विद्वानों में से ‘देवमूर्ति प्रकरण/रूपावतार’, ‘वास्तुमण्डन’, और ‘राजवल्लभ मण्डन’ आदि ग्रंथों की रचना किसने की थी?
Important
✅ सही उत्तर: (B) मण्डन
व्याख्या: कुम्भा के प्रमुख शिल्पी मण्डन द्वारा रूप मण्डन, देवमूर्ति प्रकरण, वास्तुमण्डन, वास्तुसार, कोदण्ड मण्डन, शाकुन मण्डन, वैद्यमण्डन और प्रसाद मण्डन आदि ग्रंथों की रचना की गई।
53
मुगलों के साथ संधि (5 फरवरी, 1615 ई.) करने वाले मेवाड़ के शासक अमरसिंह प्रथम के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
Important
✅ सही उत्तर: (C) इन्होंने अपने पुत्र कर्णसिंह व सिसोदिया सरदारों के कहने पर यह संधि की थी।
व्याख्या: अमरसिंह ने अपने पुत्र कर्णसिंह व सरदारों के दबाव में 1615 में संधि की थी। शर्त के अनुसार मेवाड़ महाराणा को मुगल दरबार में उपस्थित होने की छूट दी गई थी (अर्थात महाराणा कभी दरबार में नहीं जाएगा, केवल युवराज जाएगा)।
54
इतिहासकार गौरीशंकर हीराचंद ओझा और डी.आर. भण्डारकर के मध्य मेवाड़ के गुहिल वंश की उत्पत्ति को लेकर मुख्य वैचारिक मतभेद क्या है?
Important
✅ सही उत्तर: (B) भण्डारकर गुहिलों की उत्पत्ति ब्राह्मण वंश से मानते हैं, जबकि ओझा इसके विरुद्ध उन्हें सूर्यवंशी मानते हैं।
व्याख्या: डॉ. डी.आर. भण्डारकर एवं डॉ. गोपीनाथ शर्मा मेवाड़ के गुहिलों की उत्पत्ति ब्राह्मण वंश से मानते हैं, परंतु डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा इस सिद्धान्त के विरुद्ध हैं और वे उनको सूर्यवंशी मानते हैं।
55
मेवाड़ रियासत में 1877 ई. में महाराणा सज्जन सिंह के काल में स्थापित ‘इजलास खास’ क्या था?
Important
✅ सही उत्तर: (B) महाराणा के कोर्ट (न्यायालय/परिषद) का बदला हुआ नाम
व्याख्या: ध्यातव्य रहे- मेवाड़ में 1877 में ‘महाराणा के कोर्ट’ का नाम बदलकर ‘इजलास खास’ कर दिया गया था। यह राज्य के प्रशासनिक एवं न्यायिक कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए गठित एक परिषद थी।
56
महाराणा राजसिंह द्वारा औरंगजेब के विरुद्ध जाकर 1657 ई. में मुगलों के उत्तराधिकार युद्ध के समय कौन सी नीति अपनाई गई थी?
Important
✅ सही उत्तर: (B) इन्होंने ‘टीका दौड़’ के बहाने बाहरी क्षेत्रों पर धावे बोले और तटस्थता की नीति अपनाई।
व्याख्या: दिल्ली के बादशाह शाहजहाँ के पुत्रों में 1657 में जब उत्तराधिकार का युद्ध चल रहा था, तब राजसिंह ने ‘टीका दौड़’ के बहाने बाहरी क्षेत्रों पर धावे बोले और अनेक स्थानों को लूटा। दारा द्वारा सहायता मांगने पर भी इन्होंने ‘सभी राजकुमार बराबर हैं’ कहकर टाल दिया (तटस्थ रहे)।
57
चित्तौड़गढ़ के प्रथम साके (1303 ई.) का सजीव चित्रण ‘खजाइन-उल-फुतूह’ नामक ग्रंथ में किया गया है। यह ग्रंथ किस दरबारी कवि द्वारा लिखा गया था जो इस आक्रमण में अलाउद्दीन खिलजी के साथ था?
Important
✅ सही उत्तर: (A) अमीर खुसरो
व्याख्या: अलाउद्दीन खिलजी के 1303 ई. के चित्तौड़ आक्रमण (प्रथम साका) का सजीव चित्रण अमीर खुसरो ने अपने ग्रंथ ‘खजाइन-उल-फुतूह’ (तारीख-ए-अलाई) में किया है। मलिक मुहम्मद जायसी ने तो 1540 में ‘पद्मावत’ ग्रंथ लिखा था।
58
“बादशाह ने मेवाड़ के राणा को आपस के समझौते के अधीन किया था, न कि बल से।” कर्नल जेम्स टॉड का यह कथन मुगलों की मेवाड़ के साथ हुई किस संधि के संदर्भ में है?
Important
✅ सही उत्तर: (B) 1615 ई. की मुगल-मेवाड़ संधि (महाराणा अमरसिंह व जहाँगीर)
व्याख्या: 5 फरवरी 1615 ई. को महाराणा अमरसिंह के काल में हुई मुगलों के साथ संधि (जिसमें मेवाड़ के राणा को दरबार में उपस्थित होने की छूट दी गई थी) के संदर्भ में सर टॉमस रो और कर्नल जेम्स टॉड ने उपर्युक्त कथन कहा था।
59
मेवाड़ के इतिहास में ‘उड़ना राजकुमार’ (Flying Prince) के नाम से किसे जाना जाता है?
Important
✅ सही उत्तर: (A) रायमल के बड़े पुत्र पृथ्वीराज सिसोदिया को
व्याख्या: महाराणा रायमल के बड़े पुत्र ‘पृथ्वीराज सिसोदिया’ को उनकी तेज धावक क्षमता और तीव्र सैन्य अभियानों के कारण इतिहास में ‘उड़ना राजकुमार’ के नाम से जाना जाता है। इन्हीं की पत्नी ताराबाई के नाम पर अजमेर दुर्ग का नाम तारागढ़ पड़ा था।
60
चित्तौड़ के किले पर 7वीं शताब्दी से 16वीं शताब्दी तक शासन करने वाले गुहिल वंश के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सी राजधानी कभी भी मेवाड़ की राजधानी नहीं रही?
Important
✅ सही उत्तर: (D) मण्डोर
व्याख्या: मेवाड़ की राजधानियों का क्रम इस प्रकार रहा है: नागदा (बप्पा रावल), आहड़ (अलट), चित्तौड़ (जैत्रसिंह), गोगुन्दा, कुम्भलगढ़ (उदयसिंह/प्रताप), चावण्ड (प्रताप-आपातकालीन राजधानी) और उदयपुर। मण्डोर मारवाड़ (जोधपुर) के राठौड़ों की प्रारंभिक राजधानी थी, मेवाड़ की नहीं।
61
मेवाड़ महाराणा उदयसिंह द्वारा उदयपुर नगर की स्थापना और उसे अपनी राजधानी बनाने की घटना किस वर्ष की है, जब उन्होंने वहाँ ‘धूनी’ नामक स्थान पर इसकी नींव रखी थी?
Important
✅ सही उत्तर: (C) 1559 ई.
व्याख्या: महाराणा उदयसिंह ने 1559 ई. में अरावली की सुरक्षित पहाड़ियों के बीच उदयपुर नगर बसाया और ‘धूनी’ नामक स्थान पर इसकी शुरुआत की। यह कदम शेरशाह सूरी और मुगलों के संभावित आक्रमणों को देखते हुए उठाया गया था।
62
इतिहास प्रसिद्ध ‘सिंगोली का युद्ध’ (बांसवाड़ा/चित्तौड़गढ़ क्षेत्र) मेवाड़ के किस शासक ने लड़ा था, जिसमें उसने दिल्ली के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक की सेना को पराजित किया था?
Important
✅ सही उत्तर: (A) राणा हम्मीर
व्याख्या: राणा हम्मीर (1326-64 ई.), जिन्हें ‘मेवाड़ का उद्धारक’ कहा जाता है, ने चित्तौड़ पर अधिकार करने के बाद ‘सिंगोली के युद्ध’ में मुहम्मद बिन तुगलक को पराजित कर अपनी स्थिति सुदृढ़ की थी।
63
मेवाड़ के ऐतिहासिक ग्रंथों और उनके रचनाकारों का कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है?
Important
✅ सही उत्तर: (D) खजाइन-उल-फुतूह – अबुल फजल
व्याख्या: ‘खजाइन-उल-फुतूह’ (जिसमें चित्तौड़ के प्रथम साके का आँखों देखा हाल है) की रचना ‘अमीर खुसरो’ ने की थी, जो अलाउद्दीन खिलजी के साथ था। अबुल फजल ने ‘अकबरनामा’ लिखा था।
64
चित्तौड़गढ़ के दुर्ग पर आक्रमण करने वाले मुस्लिम शासकों और उनके समय हुए ‘साकों’ (जौहर व केसरिया) के संदर्भ में विचार कीजिए:
1. प्रथम साका (1303 ई.) – अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण
2. द्वितीय साका (1535 ई.) – गुजरात के बहादुर शाह का आक्रमण
3. तृतीय साका (1568 ई.) – अकबर का आक्रमण
इन साकों के समय मेवाड़ के शासक क्रमशः कौन थे?
Important
✅ सही उत्तर: (A) रावल रतनसिंह, विक्रमादित्य, उदयसिंह
व्याख्या: प्रथम साके के समय रावल रतनसिंह (रानी पद्मिनी का जौहर), द्वितीय साके के समय राणा विक्रमादित्य (हाड़ी रानी कर्मावती का जौहर), और तृतीय साके के समय महाराणा उदयसिंह (रानी फूल कंवर का जौहर) शासक थे।
65
मेवाड़ के इतिहास में ‘पितृहन्ता’ (पिता की हत्या करने वाला) का कलंक किस शासक पर लगा है, जिसने कुम्भलगढ़ दुर्ग में महाराणा कुम्भा की हत्या कर दी थी?
Important
✅ सही उत्तर: (C) ऊदा (उदयकरण)
व्याख्या: 1468 ई. में कुम्भलगढ़ दुर्ग के कटारगढ़ (कुम्भश्याम मंदिर के पास) में कुम्भा के पुत्र ऊदा ने राज्याधिकार की लालसा में कुम्भा की हत्या कर दी थी। इसलिए इसे मेवाड़ का ‘पितृहन्ता’ कहा जाता है। बाद में सरदारों ने इसे हटाकर रायमल को शासक बनाया।
66
कर्नल जेम्स टॉड ने किस युद्ध को “मेवाड़ का मैराथन” (Marathon of Mewar) की संज्ञा दी है, जो महाराणा प्रताप की मुगलों पर एक बड़ी विजय का प्रतीक है?
Important
✅ सही उत्तर: (B) दिवेर का युद्ध
व्याख्या: अक्टूबर 1582 ई. में महाराणा प्रताप और उनके पुत्र अमरसिंह ने दिवेर की मुग़ल चौकी पर आक्रमण किया। अमरसिंह के भाले के वार से अकबर का काका सुल्तान खाँ मारा गया। इस विजय को टॉड ने ‘मेवाड़ का मैराथन’ कहा है।
67
मेवाड़ महाराणा फतेह सिंह के शासनकाल में उदयपुर में ‘कनॉट बाँध’ (Connaught Dam) का निर्माण करवाया गया। यह बाँध वर्तमान में किस नाम से प्रसिद्ध है?
Important
✅ सही उत्तर: (D) फतहसागर झील
व्याख्या: ब्रिटिश राजकुमार ड्यूक ऑफ कनॉट के मेवाड़ आगमन पर उनके हाथों एक बाँध की आधारशिला रखी गई, जिसे कनॉट बाँध कहा गया। बाद में महाराणा फतेह सिंह ने इसका पुनर्निर्माण करवाया, जिसके बाद इसका नाम ‘फतहसागर’ रखा गया।
68
महाराणा सांगा और बाबर के मध्य हुए ‘खानवा के युद्ध’ (17 मार्च, 1527 ई.) में राजपूत सेना की पराजय के मुख्य कारणों का विश्लेषण करें:
1. राजपूतों का बाबर की नवीन व्यूह रचना ‘तुलगमा पद्धति’ से अनभिज्ञ होना।
2. बाबर के पास तोपखाने (Artillery) की उपस्थिति, जिससे राजपूत सेना को भारी क्षति पहुँची।
3. युद्ध के अंतिम दौर में रायसीन के ‘सलहदी तंवर’ और नागौर के ‘खानजादा’ का सांगा को छोड़कर बाबर से मिल जाना।
दिए गए कारणों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Important
✅ सही उत्तर: (C) 1, 2 और 3 तीनों
व्याख्या: खानवा के युद्ध में राणा सांगा की पराजय के ये तीनों मुख्य कारण थे। बाबर की वैज्ञानिक तुलगमा पद्धति, घातक तोपखाना और अंतिम समय में सांगा के कुछ सहयोगियों (सलहदी तंवर और खानजादा) का धोखा देना निर्णायक साबित हुआ।
69
मेवाड़ के शासक ‘महाराणा शम्भू सिंह’ के काल की सबसे उल्लेखनीय घटना, जिसमें उन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा दिए गए एक विशेष सम्मान को लेने से इनकार कर दिया था, वह कौन सा सम्मान था?
Important
✅ सही उत्तर: (B) ग्रांड कमाण्डर ऑफ द स्टार ऑफ इण्डिया
व्याख्या: जब ब्रिटिश सरकार ने महाराणा शम्भू सिंह को ‘ग्रांड कमाण्डर ऑफ द स्टार ऑफ इण्डिया’ का खिताब देने की बात कही, तो उन्होंने कहा कि मेवाड़ के महाराणा तो पहले से ही ‘हिन्दूआ सूरज’ कहलाते हैं, उन्हें स्टार (तारा) खिताब देने की जरूरत नहीं है।
70
मेवाड़ के इतिहास में ‘गौरा-बादल’ का संबंध किस ऐतिहासिक घटना से है?
Important
✅ सही उत्तर: (A) 1303 ई. में अलाउद्दीन खिलजी के चित्तौड़ आक्रमण (प्रथम साके) से
व्याख्या: गौरा और बादल, महारानी पद्मिनी के क्रमशः चाचा और भाई थे। 1303 ई. में जब रावल रतनसिंह पर अलाउद्दीन ने आक्रमण किया, तब गौरा और बादल ने अद्भुत शौर्य का प्रदर्शन किया और वीरगति को प्राप्त हुए।
71
राणा सांगा द्वारा लड़े गए युद्धों के संबंध में कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है?
Important
✅ सही उत्तर: (B) बाड़ी का युद्ध (1518 ई.) – मालवा के महमूद खिलजी के विरुद्ध
व्याख्या: बाड़ी (धौलपुर) का युद्ध 1518 ई. में भी दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी की सेना के विरुद्ध ही लड़ा गया था, न कि मालवा के महमूद खिलजी के विरुद्ध। गागरोन के युद्ध में मालवा के शासक को हराया गया था।
72
मेवाड़ के शासक राणा मोकल की हत्या (1433 ई.) उनके अभियान के दौरान ‘झीलवाड़ा’ (राजसमंद) नामक स्थान पर कर दी गई थी। यह हत्या किसके उकसावे पर ‘चाचा’ और ‘मेरा’ ने की थी?
Important
✅ सही उत्तर: (C) महपा पंवार
व्याख्या: 1433 ई. में गुजरात के अहमद शाह के विरुद्ध अभियान के दौरान ‘महपा पंवार’ के भड़काने पर राणा क्षेत्रसिंह की दासी/खातिन प्रेमिका (कर्मा) के अवैध पुत्रों ‘चाचा’ व ‘मेरा’ ने झीलवाड़ा में राणा मोकल की हत्या कर दी थी।
73
मेवाड़ के किस महाराणा के जन्म और राज्याभिषेक दोनों कुम्भलगढ़ दुर्ग में हुए थे तथा उन्होंने अपने जीवन काल में ‘छापामार युद्ध प्रणाली’ (Guerrilla Warfare) और ‘स्वभूमिध्वंस की नीति’ (Scorched-earth policy) का सफलतापूर्वक प्रयोग किया?
Important
✅ सही उत्तर: (B) महाराणा प्रताप
व्याख्या: महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को कुम्भलगढ़ में हुआ था। गोगुन्दा में प्रथम राज्याभिषेक के बाद कुम्भलगढ़ में उनका विधिवत दूसरा राज्याभिषेक हुआ। उन्होंने मुगलों के खिलाफ ‘स्वभूमिध्वंस’ (शत्रु को रसद न मिले) और छापामार नीति अपनाई।
74
‘आँवल-बाँवल की संधि’ (1453 ई.) के तहत मेवाड़ और मारवाड़ की सीमा का निर्धारण किस स्थान को केंद्र मानकर किया गया था?
Important
✅ सही उत्तर: (C) सोजत (पाली)
व्याख्या: हंसाबाई के प्रयासों से महाराणा कुम्भा और राव जोधा के मध्य 1453 ई. में ‘आँवल-बाँवल’ (बबूल और आंवले के पेड़ों की अधिकता के आधार पर) की संधि हुई। इसमें ‘सोजत’ (पाली) को मेवाड़ और मारवाड़ की सीमा का मुख्य केंद्र/बिंदु माना गया था।
75
मेवाड़ महाराणा उदयसिंह ने जब 1567 ई. में चित्तौड़गढ़ पर अकबर के आक्रमण का सामना किया, तो उन्होंने किले का भार किसे सौंपकर स्वयं गोगुन्दा की पहाड़ियों में प्रस्थान किया था?
Important
✅ सही उत्तर: (C) जयमल राठौड़ और फत्ता सिसोदिया
व्याख्या: सामंतों के आग्रह पर उदयसिंह किले की रक्षा का भार वीर सेनानायकों ‘जयमल राठौड़’ और ‘फत्ता सिसोदिया’ को सौंपकर गोगुन्दा (पहाड़ियों) चले गए थे। इन्हीं वीरों के नेतृत्व में 1568 ई. में केसरिया हुआ था।
76
मेवाड़ में सामंतों की श्रेणियों में ‘सोलह, बत्तीस और गोल’ व्यवस्था थी। इस व्यवस्था को प्रारंभ करने का श्रेय किस मेवाड़ शासक को दिया जाता है?
Important
✅ सही उत्तर: (B) महाराणा अमर सिंह द्वितीय
व्याख्या: मेवाड़ के महाराणा अमरसिंह द्वितीय के समय प्रथम श्रेणी के सामंतों की संख्या 16 (सोलह) थी। इन्हें ‘सोलह के उमराव’ कहा जाता था। इसके अलावा ‘बत्तीस’ और ‘गोल’ सामंतों की अन्य श्रेणियां थीं।
77
“हुरड़ा सम्मेलन” (1734 ई.) के असफलता का मुख्य कारण क्या था?
Important
✅ सही उत्तर: (C) राजपूताना के राजाओं का आपसी स्वार्थ, लालच और एकता का अभाव।
व्याख्या: मराठों के खिलाफ राजपूतों को इकट्ठा करने के लिए हुरड़ा (भीलवाड़ा) में सम्मेलन हुआ। रूपरेखा संग्रामसिंह द्वितीय ने बनाई थी लेकिन उनकी मृत्यु के बाद जगतसिंह द्वितीय ने अध्यक्षता की। राजपूत राजाओं के आपसी लालच, मतभेद और व्यक्तिगत स्वार्थों के कारण कोई संयुक्त सैन्य कार्यवाही नहीं हो सकी और सम्मेलन विफल हो गया।
78
महाराणा सांगा ने दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोदी के किन दो विद्रोही अफगानों को अपने यहाँ शरण दी थी, जो ‘खानवा के युद्ध’ का एक प्रमुख कारण भी बना?
Important
✅ सही उत्तर: (A) महमूद लोदी व हसन खाँ मेवाती
व्याख्या: राणा सांगा ने इब्राहिम लोदी के भाई ‘महमूद लोदी’ तथा ‘हसन खाँ मेवाती’ (जो अफगान थे) को बाबर के विरुद्ध अपने यहाँ शरण दी थी। इसी कारण बाबर और सांगा के मध्य शत्रुता और बढ़ गई थी।
79
मेवाड़ के महाराणा प्रताप के जीवन के अंतिम 12 वर्षों (1585 से 1597 ई.) की शांतिपूर्ण अवधि में उनकी ‘आपातकालीन राजधानी’ (Crisis Capital) कौन सी रही?
Important
✅ सही उत्तर: (B) चावण्ड
व्याख्या: 1585 ई. में महाराणा प्रताप ने लूणा चावण्डिया को हराकर ‘चावण्ड’ पर अधिकार कर लिया और इसे अपनी आपातकालीन राजधानी बनाया। मुगलों का अंतिम आक्रमण 1584-85 (जगन्नाथ कछवाहा) में हुआ था, इसके बाद 12 वर्षों तक प्रताप ने चावण्ड से सुचारु रूप से शासन किया।
80
मेवाड़ महाराणाओं के संबंध में निम्नलिखित में से कौन सा तथ्य सुमेलित है?
Important
✅ सही उत्तर: (C) जैत्रसिंह – भूताला का युद्ध (1227 ई.) में इल्तुतमिश को पराजित करना
व्याख्या: केवल विकल्प C सुमेलित है। सोने के सिक्के बप्पा रावल ने चलाए थे, नौकरशाही अलट ने शुरू की थी और नेपाल में गुहिल वंश की स्थापना समरसिंह के पुत्र ‘कुम्भकरण’ ने की थी।
81
महाराणा प्रताप के दरबारी विद्वानों और उनकी रचनाओं का कौन सा युग्म सुमेलित नहीं है?
Important
✅ सही उत्तर: (D) चक्रपाणि मिश्र – कोदण्ड मण्डन
व्याख्या: ‘कोदण्ड मण्डन’ की रचना महाराणा कुम्भा के शिल्पी मण्डन ने की थी। चक्रपाणि मिश्र (महाराणा प्रताप के दरबारी) ने ‘विश्ववल्लभ’, ‘मुहूर्तमाला’, और ‘राज्याभिषेक पद्धति’ की रचना की थी।
82
महाराणा कुम्भा द्वारा 1457 ई. में भीलवाड़ा में लड़े गए ‘बदनौर (बैराठगढ़) के युद्ध’ में किसे पराजित किया गया था तथा कुम्भा ने इस विजय के उपलक्ष्य में किस मंदिर का निर्माण करवाया?
Important
✅ सही उत्तर: (B) मालवा के महमूद खिलजी प्रथम को; कुशाल माता का मंदिर
व्याख्या: महाराणा कुम्भा ने 1457 ई. में बदनौर (भीलवाड़ा) के युद्ध में मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी प्रथम को पुनः पराजित किया और इस शानदार विजय के उपलक्ष्य में बदनौर में ‘कुशाल माता के मंदिर’ का निर्माण करवाया।
83
चित्तौड़ के द्वितीय साके (1535 ई.) के समय ‘रावत बाघसिंह’ के नेतृत्व में राजपूतों ने केसरिया किया था। रावत बाघसिंह का संबंध मेवाड़ के किस ठिकाने से था?
Important
✅ सही उत्तर: (B) देवलिया (प्रतापगढ़)
व्याख्या: गुजरात के बहादुर शाह के आक्रमण के समय हाड़ी रानी कर्मावती ने विक्रमादित्य व उदयसिंह को बूंदी भेज दिया और देवलिया (वर्तमान प्रतापगढ़) के रावत बाघसिंह के नेतृत्व में सैनिकों ने युद्ध लड़ते हुए केसरिया किया।
84
इतिहासकार गौरीशंकर हीराचंद ओझा के अनुसार ‘सिसोदिया साम्राज्य’ (वंश) का संस्थापक किसे माना जाता है, जिन्होंने मालदेव के पुत्र को हराकर मेवाड़ में अपनी सत्ता स्थापित की थी?
Important
✅ सही उत्तर: (B) राणा हम्मीर देव
व्याख्या: राणा हम्मीर देव (1326-64 ई.) ने मालदेव के पुत्र बनवीर (ओझा के अनुसार ‘जैसा/जयसिंह’) को हराकर मेवाड़ में सिसोदिया वंश की स्थापना की। इसी कारण इन्हें मेवाड़ का उद्धारक और सिसोदिया साम्राज्य का संस्थापक कहा जाता है।
85
मेवाड़ महाराणा राजसिंह (1652-1680 ई.) की सांस्कृतिक उपलब्धियों के संदर्भ में कौन सा कथन सत्य नहीं है?
Important
✅ सही उत्तर: (C) इन्होंने उदयपुर में ‘सहेलियों की बाड़ी’ का निर्माण करवाया।
व्याख्या: उदयपुर में ‘सहेलियों की बाड़ी’ का निर्माण महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय (1710-34 ई.) ने करवाया था, न कि महाराणा राजसिंह ने। राजसिंह ने श्रीनाथजी, द्वारिकाधीश और अम्बा माता के मंदिर बनवाए थे।
86
हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की ‘हरावल सेना’ (सेना का अग्रिम भाग) का नेतृत्व किसके द्वारा किया गया था?
Important
✅ सही उत्तर: (A) हकीम खाँ सूरी
व्याख्या: हल्दीघाटी युद्ध (1576 ई.) में प्रताप की सेना के हरावल भाग (अग्रिम पंक्ति) का नेतृत्व मुस्लिम/पठान सेनापति ‘हकीम खाँ सूरी’ ने किया था। जबकि चंद्रावल (पिछला भाग) का नेतृत्व भील सेनापति ‘राणा पूँजा’ ने किया था।
87
महाराणा सांगा से जुड़ी स्मृतियों और स्थानों का सही मिलान कीजिए:
1. जहर दिया गया – a. माण्डलगढ़
2. मृत्यु का स्थान – b. कालपी
3. स्मारक (चबूतरा) – c. बसवा (दौसा)
4. छतरी/दाह संस्कार – d. बसवा (दौसा) – (नोट: 3 व 4 में भेद समझें)
Important
✅ सही उत्तर: (B) सांगा को ‘कालपी’ में जहर दिया गया (मृत्यु 30 जन. 1528), दाह संस्कार ‘माण्डलगढ़’ में हुआ और स्मारक ‘बसवा’ में है।
व्याख्या: राणा सांगा को कालपी (मध्य प्रदेश) नामक स्थान पर उनके साथियों द्वारा जहर दिया गया जिससे वहीं उनकी मृत्यु हो गई। उनका दाह संस्कार माण्डलगढ़ (भीलवाड़ा) में किया गया जहाँ इनकी छतरी है तथा स्मारक बसवा (दौसा) में स्थित है।
88
मेवाड़ के इतिहास में ‘राजगुरू’, ‘दानगुरू’, ‘हालगुरू’ और ‘राणेराय’ जैसी विशिष्ट उपाधियाँ किस शासक को प्राप्त थीं?
Important
✅ सही उत्तर: (C) महाराणा कुम्भा
व्याख्या: महाराणा कुम्भा (1433-68 ई.) को उनके बहुमुखी ज्ञान और विजयों के कारण अनेक उपाधियां दी गईं: अभिनव भरताचार्य (संगीत), राणो रासो (विद्वानों का आश्रय), हालगुरू (पहाड़ी दुर्गों का निर्माता), राजगुरू, दानगुरू, राणेराय आदि।
89
मेवाड़ महाराणा प्रताप का विधिवत (दूसरी बार) राज्याभिषेक कहाँ और किसके द्वारा बांधी गई तलवार के साथ संपन्न हुआ था?
Important
✅ सही उत्तर: (B) कुम्भलगढ़ दुर्ग में, तलवार कृष्णदास ने बांधी
व्याख्या: गोगुन्दा में प्रथम बार राज्याभिषेक (28 फरवरी 1572) के पश्चात् प्रताप का विधिवत राज्याभिषेक समारोह कुम्भलगढ़ दुर्ग में हुआ था, जिसमें मारवाड़ के चंद्रसेन भी आए थे। राज्याभिषेक के समय प्रताप को तलवार ‘कृष्णदास’ (सलूम्बर के सामंत) ने बांधी थी।
90
इतिहासकार गौरीशंकर हीराचंद ओझा द्वारा समर्थित ‘राजपूतों की उत्पत्ति’ के सिद्धांत और बप्पा रावल से संबंधित उपाधि के संदर्भ में कौन सा कथन सही है?
Important
✅ सही उत्तर: (B) ओझा गुहिलों को सूर्यवंशी मानते हैं; बप्पा रावल को हारित ऋषि ने उपाधि दी।
व्याख्या: डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा गुहिलों की ब्राह्मण उत्पत्ति का खंडन कर उन्हें सूर्यवंशी मानते हैं। बप्पा रावल (मूल नाम: कालबोज) हारित ऋषि का शिष्य था और उन्हीं के आशीर्वाद से उसे ‘बप्पा रावल’ की उपाधि मिली थी।
91
मेवाड़ के महाराणा प्रताप के घोड़े ‘चेतक’ का स्मारक/चबूतरा कहाँ स्थित है?
Important
✅ सही उत्तर: (B) बलीचा गाँव (राजसमंद)
व्याख्या: हल्दीघाटी युद्ध के बाद घायल महाराणा प्रताप को सुरक्षित निकालते समय उनके स्वामीभक्त घोड़े ‘चेतक’ की मृत्यु हो गई थी। चेतक का चबूतरा (स्मारक) ‘बलीचा गाँव’ (राजसमंद) में बना हुआ है। प्रताप की छतरी बाण्डोली में है।
92
मेवाड़ के इतिहास में ‘टीका दौड़’ की प्रथा किस महाराणा से विशेष रूप से संबंधित मानी जाती है, जिसके बहाने उन्होंने मुगल क्षेत्रों पर धावे बोले थे?
Important
✅ सही उत्तर: (C) महाराणा राजसिंह
व्याख्या: 1657 ई. में जब मुगलों में उत्तराधिकार का युद्ध चल रहा था, तब महाराणा राजसिंह ने मुगलों की उलझन का फायदा उठाकर ‘टीका दौड़’ (नए राजा द्वारा शिकार या पड़ोसी राज्य पर प्रतीकात्मक हमला) के बहाने बाहरी मुग़ल क्षेत्रों पर धावे बोले और स्थानों को लूटा।
93
निम्नलिखित में से कौन सा दुर्ग महाराणा कुम्भा द्वारा निर्मित 32 दुर्गों की सूची में शामिल नहीं है?
Important
✅ सही उत्तर: (C) चित्तौड़गढ़ (निर्माण)
व्याख्या: चित्तौड़गढ़ दुर्ग का मूल निर्माण 8वीं शताब्दी में मौर्य शासक चित्रांग (चित्रांगद) मौर्य ने करवाया था। कुम्भा ने इसका जीर्णोद्धार और विस्तार करवाया था। कुम्भा द्वारा निर्मित नए दुर्गों में कुम्भलगढ़, अचलगढ़, बसंतगढ़, भोमट और मचान दुर्ग प्रमुख हैं।
94
‘खमनौर का युद्ध’ किस युद्ध का दूसरा नाम है और यह नाम किस मुग़ल इतिहासकार ने दिया था?
Important
✅ सही उत्तर: (B) हल्दीघाटी का युद्ध; अबुल फजल ने
व्याख्या: अकबर के नवरत्नों में शामिल अबुल फजल ने अपनी पुस्तक (अकबरनामा) में हल्दीघाटी युद्ध को ‘खमनौर का युद्ध’ कहा है, क्योंकि यह युद्ध खमनौर की पहाड़ियों के पास लड़ा गया था।
95
महाराणा सांगा का वह सेनापति कौन था जिसने खानवा के युद्ध में विश्वासघात किया और युद्ध के अंतिम चरण में बाबर की सेना से जा मिला?
Important
✅ सही उत्तर: (B) रायसीन का सलहदी तंवर
व्याख्या: खानवा युद्ध में सांगा की हार का एक प्रमुख कारण धोखा था। रायसीन का ‘सलहदी तंवर’ और नागौर का ‘खानजादा’ युद्ध के अंतिम दौर में सांगा का साथ छोड़कर बाबर की सेना में शामिल हो गए थे।
96
मेवाड़ महाराणा उदयसिंह ने जब 1559 ई. में उदयपुर नगर बसाया, तब उन्होंने शेरशाह सूरी के अधीनता स्वीकार करने के प्रतीक स्वरूप चित्तौड़गढ़ की चाबियां शेरशाह को कब भिजवाई थीं?
Important
✅ सही उत्तर: (B) 1544 ई.
व्याख्या: 1544 ई. में जब अफगान शासक शेरशाह सूरी ने मेवाड़ पर चढ़ाई की, तो उदयसिंह ने रक्तपात टालने के लिए चित्तौड़गढ़ की चाबियां शेरशाह के पास भिजवा दीं। उदयसिंह मेवाड़ के प्रथम शासक थे जिसने अफगान अधीनता (शेरशाह) स्वीकार की थी।
97
अकबर द्वारा 1570 ई. में लगाए गए ‘नागौर दरबार’ के संदर्भ में मेवाड़ की स्थिति क्या थी?
Important
✅ सही उत्तर: (B) मेवाड़ के अलावा अधिकांश राजपूत शासकों ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली, लेकिन प्रताप इसमें शामिल नहीं हुए।
व्याख्या: 1570 के नागौर दरबार में बीकानेर, जैसलमेर और मारवाड़ जैसे अधिकांश राजपूत राज्यों ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली थी। किन्तु मेवाड़ (महाराणा प्रताप) ने अपनी स्वतंत्रता बनाए रखी और संघर्ष का मार्ग चुना।
98
महाराणा अमरसिंह द्वितीय द्वारा किस शर्त के तहत अपनी पुत्री ‘चन्द्र कुँवर’ का विवाह आमेर के सवाई जयसिंह के साथ किया गया था?
Important
✅ सही उत्तर: (B) चन्द्र कुँवर से उत्पन्न पुत्र ही आमेर (जयपुर) का अगला उत्तराधिकारी होगा।
व्याख्या: यह ‘देवबारी समझौते’ (1708 ई.) की मुख्य शर्त थी। इस शर्त के कारण चन्द्र कुँवर से माधवसिंह का जन्म हुआ, जिसके कारण बाद में जयपुर राज्य में ईश्वरी सिंह और माधवसिंह के बीच उत्तराधिकार का भयंकर गृहयुद्ध हुआ।
99
मेवाड़ राज्य में ‘डाकन प्रथा’ (1853 ई.) और ‘सती प्रथा’ (1861 ई.) पर प्रतिबंध किस महाराणा के शासनकाल में लगाया गया था?
Important
✅ सही उत्तर: (A) महाराणा स्वरूप सिंह
व्याख्या: महाराणा स्वरूप सिंह (1842-1861 ई.) ने मेवाड़ में समाज सुधार के कई कार्य किए। इन्होंने ही 1844 में कन्या वध, 1853 में डाकन प्रथा (जे.सी. ब्रुक के सहयोग से) और 1861 में सती प्रथा पर रोक लगाई थी।
100
कुम्भलगढ़ दुर्ग में स्थित ‘कटारगढ़’ दुर्ग (कुम्भा का निवास स्थान) जिसे “मेवाड़ की आँख” भी कहा जाता है, में किस महान शासक की हत्या कर दी गई थी?
Important
✅ सही उत्तर: (C) महाराणा कुम्भा
व्याख्या: 1468 ई. में कुम्भलगढ़ दुर्ग के अंतःदुर्ग ‘कटारगढ़’ (जहाँ कुम्भश्याम/मामादेव मंदिर स्थित है) में महाराणा कुम्भा के ज्येष्ठ पुत्र ऊदा (उदयकरण) ने उनकी हत्या कर दी थी।

निष्कर्ष: इस प्रकार कुम्भा जैसे महान वास्तुकार और कला प्रेमी शासक का अंत दुखद रहा। राजपूताना के इतिहास में यह घटना पितृहंता कलंक के रूप में दर्ज है।
101
मेवाड़ के इतिहास में बप्पा रावल (कालबोज) द्वारा चलाए गए सोने के सिक्कों का वजन कितना था, जो अजमेर से प्राप्त हुए हैं?
Important
✅ सही उत्तर: (A) 115 ग्रेन
व्याख्या: राजपूताना में सबसे पहले सोने के सिक्के चलाने का श्रेय बप्पा रावल को है। अजमेर से प्राप्त बप्पा रावल के सोने के सिक्कों का वजन 115 ग्रेन (Grain) है, जिन पर कामधेनु, बछड़ा, शिवलिंग और दण्डवत करता हुआ मनुष्य अंकित है।

निष्कर्ष (Keywords): बप्पा रावल, स्वर्ण मुद्रा, 115 ग्रेन, मेवाड़ की अर्थव्यवस्था।
102
महाराणा कुम्भा द्वारा रचित भारतीय संगीत शास्त्र के विश्वकोश ‘संगीतराज’ ग्रंथ को कितने उल्लासों (भागों) में विभक्त किया गया है?
Important
✅ सही उत्तर: (B) 5 भागों में
व्याख्या: महाराणा कुम्भा का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ ‘संगीतराज’ 5 उल्लासों (रत्नकोषों) में बँटा है: पाठ्य रत्नकोष, गीत रत्नकोष, वाद्य रत्नकोष, नृत्य रत्नकोष और रस रत्नकोष।

निष्कर्ष (Keywords): महाराणा कुम्भा, संगीतराज, 5 उल्लास (रत्नकोष), मेवाड़ का साहित्य।
103
हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के उस प्रिय हाथी का क्या नाम था, जिसे मुगलों ने युद्ध में पकड़ लिया था और बाद में अकबर ने उसका नाम बदलकर ‘पीरप्रसाद’ कर दिया?
Important
✅ सही उत्तर: (B) रामप्रसाद
व्याख्या: हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप के प्रमुख हाथी ‘रामप्रसाद’ और ‘लूणा’ थे। मुग़ल सेना ने रामप्रसाद को पकड़कर अकबर के समक्ष पेश किया था, जहाँ अकबर ने उसका नाम बदलकर ‘पीरप्रसाद’ रख दिया था।

निष्कर्ष (Keywords): हल्दीघाटी युद्ध, रामप्रसाद हाथी, पीरप्रसाद, अकबर।
104
मेवाड़ की ओर से 1818 ई. में ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ ‘आश्रित पार्थक्य की संधि’ (Subordinate Isolation Treaty) पर हस्ताक्षर करने वाले प्रतिनिधि कौन थे?
Important
✅ सही उत्तर: (C) ठाकुर अजीत सिंह
व्याख्या: 13 जनवरी 1818 को मेवाड़ के महाराणा भीमसिंह की ओर से उनके प्रतिनिधि (Chief Negotiator) ‘ठाकुर अजीत सिंह’ ने और ब्रिटिश कंपनी की ओर से ‘चार्ल्स मेटकाफ’ ने दिल्ली में इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे।

निष्कर्ष (Keywords): 1818 की संधि, आश्रित पार्थक्य, ठाकुर अजीत सिंह, चार्ल्स मेटकाफ, महाराणा भीमसिंह।
105
मेवाड़ रियासत में ‘सती प्रथा’ की अंतिम घटना 1861 ई. में किस महाराणा के निधन पर हुई थी, जिसमें उनकी पासवन ‘ऐंजाबाई’ सती हुई थीं?
Important
✅ सही उत्तर: (A) महाराणा स्वरूप सिंह
व्याख्या: 1861 ई. में महाराणा स्वरूप सिंह के निधन पर उनकी पासवन ‘ऐंजाबाई’ उनके साथ सती हुई थीं। इसके बाद मेवाड़ में सती प्रथा पर पूर्णतः प्रभावी रोक लग गई और यह मेवाड़ की अंतिम सती घटना मानी जाती है।

निष्कर्ष (Keywords): ऐंजाबाई, अंतिम सती घटना, महाराणा स्वरूप सिंह, 1861 ई.।
106
इतिहासकार दशरथ शर्मा ने मेवाड़ के किस शासक के शासनकाल को “मध्यकालीन मेवाड़ के इतिहास का स्वर्ण युग” (Golden Age of Medieval Mewar) कहा है?
Important
✅ सही उत्तर: (C) रावल जैत्रसिंह
व्याख्या: रावल जैत्रसिंह (1213-53 ई.) ने दिल्ली सुल्तान इल्तुतमिश को भूताला के युद्ध में हराया था। उनके अदम्य साहस और मेवाड़ की सीमाओं के विस्तार को देखते हुए डॉ. दशरथ शर्मा ने उनके काल को ‘मध्यकालीन मेवाड़ का स्वर्ण युग’ कहा है।

निष्कर्ष (Keywords): मध्यकालीन मेवाड़ का स्वर्ण युग, रावल जैत्रसिंह, डॉ. दशरथ शर्मा।
107
मेवाड़ की चित्रकला शैली के संदर्भ में ‘चितेरों की ओवरी’ (तस्वीरां रो कारखानो) नामक कला विद्यालय की स्थापना किस महाराणा के शासनकाल में हुई थी, जिसे मेवाड़ चित्रकला का स्वर्णकाल भी कहा जाता है?
Important
✅ सही उत्तर: (B) महाराणा जगतसिंह प्रथम
व्याख्या: महाराणा जगतसिंह प्रथम (1628-52 ई.) के काल को मेवाड़ चित्रकला का स्वर्णकाल माना जाता है। इन्होंने राजमहल में चितरों की ओवरी (तस्वीरां रो कारखानो) नामक चित्रशाला स्थापित करवाई, जहाँ साहिबदीन और मनोहर जैसे प्रसिद्ध चित्रकार थे।

निष्कर्ष (Keywords): चितेरों की ओवरी, महाराणा जगतसिंह प्रथम, मेवाड़ चित्रकला का स्वर्णकाल।
108
मेवाड़ महाराणा राजसिंह द्वारा अपनी रानी ‘रामरसदे’ के लिए उदयपुर में किस प्रसिद्ध बावड़ी का निर्माण करवाया गया था?
Important
✅ सही उत्तर: (A) त्रिमुखी बावड़ी (जया बावड़ी)
व्याख्या: महाराणा राजसिंह की रानी ‘रामरसदे’ ने उदयपुर (देबारी के पास) में ‘त्रिमुखी बावड़ी’ का निर्माण करवाया था, जिसे जया बावड़ी भी कहा जाता है। (नौलखा बावड़ी डूंगरपुर में प्रेमल देवी द्वारा बनवाई गई थी)।

निष्कर्ष (Keywords): त्रिमुखी बावड़ी, जया बावड़ी, रानी रामरसदे, महाराणा राजसिंह।
109
चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित ‘जैन कीर्ति स्तम्भ’ (Jain Kirti Stambh) और कुम्भा द्वारा निर्मित ‘विजय स्तम्भ’ के मध्य मुख्य अंतर क्या है?
Important
✅ सही उत्तर: (B) जैन कीर्ति स्तम्भ 12वीं सदी में जीजाशाह बघेरवाल द्वारा…
व्याख्या: परीक्षार्थी अक्सर इनमें कन्फ्यूज होते हैं। जैन कीर्ति स्तम्भ (7 मंजिल) एक जैन व्यापारी जीजाशाह द्वारा 12वीं शताब्दी में बनवाया गया था जो प्रथम तीर्थंकर आदिनाथ (ऋषभदेव) को समर्पित है। वहीं, विजय स्तम्भ (9 मंजिल) कुम्भा ने मालवा विजय (1437) के बाद बनवाया जो विष्णु को समर्पित है।

निष्कर्ष (Keywords): जैन कीर्ति स्तम्भ, जीजाशाह, 7 मंजिला, विजय स्तम्भ, महाराणा कुम्भा, 9 मंजिला।
110
मेवाड़ के इतिहासकार और दरबारी कवियों को उनके द्वारा रचित ग्रंथों के साथ सुमेलित कीजिए:
I. कान्ह व्यास – a. अमर काव्य वंशावली
II. रणछोड़ भट्ट तैलंग – b. राज प्रशस्ति
III. अत्रि व महेश – c. एकलिंग महात्म्य
IV. सदाशिव भट्ट – d. कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति
Important
✅ सही उत्तर: (B) I-c, II-b, III-d, IV-a
व्याख्या: कान्ह व्यास ने ‘एकलिंग महात्म्य’ पूरा किया। रणछोड़ भट्ट तैलंग ने राजसमंद झील की पाल पर ‘राज प्रशस्ति’ लिखी। अत्रि व महेश ने ‘कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति’ की रचना की तथा सदाशिव भट्ट (राजसिंह के दरबारी) ने ‘अमर काव्य वंशावली’ और ‘राजरत्नाकर’ की रचना की।

निष्कर्ष (Keywords): राज प्रशस्ति, एकलिंग महात्म्य, कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति, दरबारी कवि।
111
रणकपुर के जैन मंदिरों (पाली) का निर्माण 1439 ई. में मेवाड़ के किस शासक के शासनकाल में धरणक शाह (धन्ना सेठ) द्वारा करवाया गया था?
Important
✅ सही उत्तर: (A) महाराणा कुम्भा
व्याख्या: रणकपुर के विश्वप्रसिद्ध चौमुखा जैन मंदिर (1444 खंभों का वन) का निर्माण महाराणा कुम्भा के शासनकाल में 1439 ई. में जैन श्रेष्ठी धरणक शाह ने करवाया था। इसके वास्तुकार ‘देपाक’ थे।

निष्कर्ष (Keywords): रणकपुर जैन मंदिर, धरणक शाह, देपाक, महाराणा कुम्भा, 1444 खंभे।
112
मेवाड़ के गुहिल वंश की प्रारंभिक राजधानी नागदा को किस मुस्लिम आक्रमणकारी ने नष्ट कर दिया था, जिसके बाद रावल जैत्रसिंह को राजधानी चित्तौड़ स्थानांतरित करनी पड़ी?
Important
✅ सही उत्तर: (B) इल्तुतमिश
व्याख्या: भूताला के युद्ध (1227 ई.) में जब इल्तुतमिश की सेना जैत्रसिंह से पराजित होकर वापस लौट रही थी, तो क्रोधित मुग़ल सेना ने नागदा नगर को पूरी तरह जलाकर नष्ट कर दिया। सुरक्षा की दृष्टि से जैत्रसिंह ने चित्तौड़ को नई राजधानी बनाया।

निष्कर्ष (Keywords): नागदा का विनाश, इल्तुतमिश, रावल जैत्रसिंह, भूताला का युद्ध।
113
राणा सांगा के शरीर पर 80 घाव होने के कारण किस इतिहासकार ने उन्हें “सैनिकों का भग्नावशेष” (Remnant of Soldiers) की संज्ञा दी थी?
Important
✅ सही उत्तर: (C) कर्नल जेम्स टॉड
व्याख्या: कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी पुस्तक ‘एनाल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान’ में राणा सांगा की वीरता का वर्णन करते हुए उन्हें 80 घावों के कारण “सैनिकों का भग्नावशेष” (सिपाही का अंश) कहा है।

निष्कर्ष (Keywords): सैनिकों का भग्नावशेष, कर्नल जेम्स टॉड, राणा सांगा, 80 घाव।
114
अकबर द्वारा महाराणा प्रताप को समझाने के लिए भेजे गए चार शिष्टमंडलों का सही ‘वर्ष’ (क्रम) क्या था?
Important
✅ सही उत्तर: (B) जलाल खां (1572), मानसिंह (1573), भगवानदास (1573), टोडरमल (1573)
व्याख्या: अकबर ने प्रताप के पास 4 दूत भेजे: जलाल खां कोरची (नवम्बर 1572), मानसिंह (जून 1573), भगवानदास (अक्टूबर 1573) और अंतिम टोडरमल (दिसम्बर 1573)। अतः अंतिम तीनों दूत 1573 ई. में ही भेजे गए थे।

निष्कर्ष (Keywords): अकबर के दूत, जलाल खां, मानसिंह, भगवानदास, टोडरमल, 1572-1573।
115
मेवाड़ के इतिहास में प्रसिद्ध ‘छप्पनिया अकाल’ (1899-1900 ई. / विक्रम संवत् 1956) के समय मेवाड़ के शासक कौन थे, जिन्होंने बड़े पैमाने पर अकाल राहत कार्य करवाए थे?
Important
✅ सही उत्तर: (B) महाराणा फतेह सिंह
व्याख्या: विक्रम संवत् 1956 (ईस्वी सन् 1899) में पड़े भयंकर अकाल को ‘छप्पनिया अकाल’ कहा जाता है। उस समय मेवाड़ के शासक महाराणा फतेह सिंह (1884-1930) थे, जिन्होंने प्रजा के लिए व्यापक राहत कार्य चलाए थे।

निष्कर्ष (Keywords): छप्पनिया अकाल, 1899 ई., महाराणा फतेह सिंह, अकाल राहत कार्य।
116
मेवाड़ के किस शासक ने 1857 की क्रांति के दौरान नीमच छावनी से भागकर आए 40 अंग्रेज अधिकारियों व उनके परिवारों को पिछोला झील के ‘जगमंदिर महल’ में शरण देकर उनकी रक्षा की थी?
Important
✅ सही उत्तर: (A) महाराणा स्वरूप सिंह
व्याख्या: 1857 के विद्रोह के समय मेवाड़ के पॉलिटिकल एजेंट मेजर शॉवर्स के कहने पर महाराणा स्वरूप सिंह ने डूंगला गाँव (चित्तौड़) से अंग्रेजों को सुरक्षित निकालकर उदयपुर के जगमंदिर महल में ठहराया और गोकुल चंद मेहता को उनकी देखभाल सौंपी।

निष्कर्ष (Keywords): 1857 की क्रांति, जगमंदिर महल, महाराणा स्वरूप सिंह, नीमच छावनी।
117
गौरीशंकर हीराचंद ओझा द्वारा रचित प्रसिद्ध पुस्तक, जो राजपूताना के इतिहास की सबसे प्रामाणिक पुस्तकों में से एक मानी जाती है, का क्या नाम है?
Important
✅ सही उत्तर: (B) राजपूताने का इतिहास
व्याख्या: सिरोही के रोहिड़ा गाँव में जन्मे प्रसिद्ध इतिहासकार डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने ‘राजपूताने का इतिहास’ (History of Rajputana) नामक प्रामाणिक ग्रंथ लिखा। इसके अलावा इन्होंने टॉड की पुस्तक का हिन्दी अनुवाद भी किया था।

निष्कर्ष (Keywords): राजपूताने का इतिहास, डॉ. गौरीशंकर हीराचंद ओझा, टॉड का अनुवाद।
118
हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप की तरफ से लड़ने वाला एकमात्र मुस्लिम सेनापति हकीम खाँ सूरी था। इसके विपरीत, ‘खानवा के युद्ध’ (1527) में राणा सांगा की तरफ से लड़ने वाला प्रमुख मुस्लिम सेनापति कौन था?
Important
✅ सही उत्तर: (C) हसन खाँ मेवाती
व्याख्या: खानवा के युद्ध में राणा सांगा की सेना के हरावल भाग (अग्रिम पंक्ति) का नेतृत्व मेवात के ‘हसन खाँ मेवाती’ ने किया था, जो इस युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। यह राजपूताना की सांप्रदायिक सौहार्द और देशभक्ति का प्रतीक है।

निष्कर्ष (Keywords): हसन खाँ मेवाती, खानवा का युद्ध, राणा सांगा, मुस्लिम सेनापति।
119
मेवाड़ महाराणाओं का श्मशान स्थल (जहाँ उनकी छतरियाँ बनी हैं) किस नाम से प्रसिद्ध है और यह कहाँ स्थित है?
Important
✅ सही उत्तर: (D) महासतियां (आहड़, उदयपुर)
व्याख्या: उदयपुर के पास आहड़ (आयड़) में मेवाड़ महाराणाओं का श्मशान स्थल है, जिसे ‘महासतियां’ कहा जाता है। यहाँ सबसे पहली छतरी महाराणा अमरसिंह प्रथम की बनी हुई है।

निष्कर्ष (Keywords): महासतियां, आहड़ (उदयपुर), मेवाड़ श्मशान स्थल, अमरसिंह प्रथम।
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“जो दृढ़ राखे धर्म को, तिहीं राखे करतार” (अर्थात: जो धर्म की रक्षा करता है, ईश्वर उसकी रक्षा करता है) – यह राजवाक्य (Motto) राजस्थान के किस राजवंश के राजचिह्न (Emblem) में अंकित है?
Important
✅ सही उत्तर: (B) मेवाड़ के गुहिल/सिसोदिया वंश
व्याख्या: मेवाड़ (उदयपुर) राज्य के राजचिह्न में एक तरफ राजपूत योद्धा और दूसरी तरफ भील योद्धा (राणा पूंजा) को दर्शाया गया है तथा सबसे नीचे राजवाक्य “जो दृढ़ राखे धर्म को, तिहीं राखे करतार” अंकित है, जो मेवाड़ के स्वाभिमान और धर्म रक्षा का प्रतीक है।

निष्कर्ष (Keywords): राजवाक्य, मेवाड़ राजचिह्न, गुहिल/सिसोदिया वंश, धर्म रक्षा।

हमें उम्मीद है कि मेवाड़ का इतिहास MCQ का यह विस्तृत और विश्लेषणात्मक संग्रह आपकी परीक्षा की तैयारी में बहुत मददगार साबित होगा। इन प्रश्नों का अभ्यास करने से न केवल आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि आप इतिहास के उन सभी बारीक तथ्यों को भी समझ पाएंगे जो अक्सर एग्जाम हॉल में कन्फ्यूजन पैदा करते हैं।

आप इन मेवाड़ राजवंश महत्वपूर्ण प्रश्न का नियमित रूप से अभ्यास करें ताकि मुख्य परीक्षा में आपका कोई भी सवाल गलत न हो। सफलता के लिए निरंतर अभ्यास ही सबसे बड़ी कुंजी है।

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Sanket Kala

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