राजस्थान की कला और संस्कृति किसी भी सरकारी परीक्षा का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। अगर आप RPSC या RSMSSB जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो राजस्थान के ऐतिहासिक स्थलों की गहराई से जानकारी होना बेहद जरूरी है।
इन्हीं ऐतिहासिक धरोहरों में से एक हैं यहाँ की भव्य हवेलियाँ जो अपनी विशिष्ट वास्तुकला के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती हैं। आपकी तैयारी को और भी मजबूत बनाने के लिए हमने यहाँ राजस्थान की हवेलियां MCQ का एक बेहतरीन सेट तैयार किया है।
ये सभी 55 प्रश्न पिछले वर्षों के ट्रेंड और परीक्षा के नवीनतम पैटर्न को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं। इनका अभ्यास करके आप अपनी सफलता की संभावनाओं को और भी बढ़ा सकते हैं।
राजस्थान की हवेलियां MCQ
सूची-I (हवेली)
(a) पटवों की हवेली
(b) नथमल की हवेली
(c) सालिम सिंह की हवेली
सूची-II (निर्माणकर्ता/शिल्पकार)
1. लालू और नाथा
2. प्रधानमंत्री सालिम सिंह
3. गुमानचन्द पटवा
पटवों की हवेली का निर्माण गुमानचन्द पटवा ने अपने पाँच बेटों के लिए करवाया था। नथमल की हवेली का निर्माण लालू और नाथा नामक दो भाइयों (शिल्पकारों) ने किया था। सालिम सिंह की हवेली का निर्माण जैसलमेर के प्रधानमंत्री सालिम सिंह ने करवाया था।
1. नवलगढ़ को ‘हवेलियों का नगर’ व ‘शेखावाटी की स्वर्ण नगरी’ कहा जाता है
2. शेखावाटी की विशिष्ट हवेलियों में सामान्यतः दो आंगन होते थे
3. भित्ति चित्रों के लिए मंडावा की हवेलियाँ सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं जबकि नवलगढ़ में हवेलियों की संख्या बहुत कम है
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?
कथन 1 और 2 पूर्णतः सत्य हैं। कथन 3 असत्य है क्योंकि सर्वाधिक हवेलियाँ नवलगढ़ में ही हैं, इसी कारण इसे नवलगढ़ को ‘हवेलियों का नगर’ कहा जाता है। मंडावा भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन नवलगढ़ में हवेलियों की संख्या कम होना गलत तथ्य है।
विकल्प D असत्य है क्योंकि नवाब मोहम्मद इब्राहिम अली खाँ द्वारा 1870 ई. में बनवाई गई दूसरी मंजिल को ‘दीवान-ए-आम’ नहीं बल्कि ‘दीवान-ए-खास’ के नाम से जाना जाता था। अन्य सभी कथन सुनहरी कोठी के बारे में एकदम सही हैं।
1. यह हवेली भारत, सिंध, यहूदी व मुगल स्थापत्य कला का सुंदर नमूना है
2. यह विश्व की एकमात्र हवेली है जिसकी खिड़कियाँ पत्थर की बनी हुई हैं
3. इस हवेली को बनने में लगभग 50 वर्ष का समय लगा था
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
दिए गए तीनों कथन जैसलमेर की ‘पटवों की हवेली’ के बारे में पूर्णतः सत्य हैं। गुमानचन्द पटवा द्वारा निर्मित यह हवेली अपनी पत्थर की जालीदार खिड़कियों और मिश्रित स्थापत्य कला (भारतीय, सिंधी, यहूदी, मुगल) के लिए विश्वविख्यात है।
स्थान
(a) फलोदी
(b) श्री माधोपुर
(c) महनसर
(d) सुजानगढ़
हवेली
1. सोने-चांदी की हवेली
2. दानचन्द चौपड़ा की हवेली
3. लालचन्द ढड्ढा की हवेली
4. पंसारी की हवेली
सही सुमेलन इस प्रकार है – लालचन्द ढड्ढा की हवेली (फलोदी), पंसारी की हवेली (श्री माधोपुर), सोने-चांदी की हवेली (महनसर) और दानचन्द चौपड़ा की हवेली (सुजानगढ़, चूरू) में स्थित है।
जोधपुर स्थित ‘पुष्य हवेली’ अपनी वास्तुकला के लिए अद्वितीय है क्योंकि इसका निर्माण पुष्य नक्षत्र में ही किया गया है। यह विश्व की एकमात्र ऐसी हवेली है जो पूरी तरह से एक ही नक्षत्र काल में निर्मित हुई है।
जयपुर में स्थित ‘मथुरा वालों की हवेली’ अपनी विशिष्ट बनावट और इतिहास के कारण ‘नक्कालों की हवेली’ के नाम से भी प्रसिद्ध है।
उदयपुर स्थित ‘बागौर की हवेली’ संग्रहालय के रूप में प्रसिद्ध है, जहाँ राजस्थानी संस्कृति की कई धरोहरें मौजूद हैं। इसी हवेली में विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी भी रखी हुई है जो पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण है।
विकल्प C सुमेलित नहीं है क्योंकि ‘रामदेव चौखाणी की हवेली’ लक्ष्मणगढ़ में नहीं बल्कि मंडावा (शेखावाटी) में स्थित है। लक्ष्मणगढ़ में केड़िया एवं राठी की हवेली, बिनाणियों की हवेली आदि स्थित हैं।
जैसलमेर के प्रधानमंत्री सालिम सिंह द्वारा निर्मित यह हवेली अपने नौ खण्डों (मंजिलों) के लिए प्रसिद्ध है। इसके उपरी छज्जों और कलात्मक रूप के कारण इसे ‘मोती महल’ तथा ‘जहाज महल’ भी कहा जाता है।
दिए गए चित्र के अनुसार बीकानेर में मुख्य रूप से बच्छावतों की हवेली, रामपुरिया हवेली, कोठारी हवेली, गुलेच्छा हवेली और सेठिया की हवेलियाँ स्थित हैं। सुराणों के हवामहल सुजानगढ़ में और खेमका सेठों की हवेली रामगढ़ में हैं।
शेखावाटी की विशिष्ट हवेलियों की राजस्थानी वास्तुकला में ‘प्रक्षेपित बालकनी’ एक महत्वपूर्ण अंग है, जिसे मुख्य रूप से सजावट और बाहर देखने वाले प्लेटफार्म के रूप में प्रयोग किया जाता था।
दिए गए मानचित्र और तथ्यों के आधार पर झाला जी की हवेली तथा बड़े देवता की हवेली कोटा में स्थित हैं। पोकरण और राखी हवेली जोधपुर में हैं, जबकि पुरोहित और चुरसिंह जी की हवेली जयपुर में हैं।
कारण (R): पटवों की हवेली को बनने में 50 वर्ष लगे और यह विश्व की एकमात्र हवेली है जिसकी खिड़कियाँ पत्थर की बनी हुई हैं।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन करें:
कथन और कारण दोनों अपने आप में बिल्कुल सही तथ्य हैं, लेकिन हवेली को बनने में 50 वर्ष लगने या पत्थर की खिड़कियाँ होने का कारण यह नहीं है कि उसने 5 बेटों के लिए मंजिलें बनवाई थीं। इसलिए R, A की सही व्याख्या नहीं है।
चूरू जिले के सुजानगढ़ कस्बे में सुराणों के हवामहल (हवेली) के साथ-साथ रामविलास गोयनका की हवेली, मन्त्रियों की मोटी हवेली और दानचन्द चौपड़ा की हवेली स्थित हैं। विकल्प B रामगढ़ और श्रीमाधोपुर से संबंधित है।
स्थान
(a) मण्डावा
(b) बिसाऊ
(c) पिलानी
(d) महनसर
हवेली
1. बिड़ला हवेली
2. रामदेव चौखाणी की हवेली
3. सोने-चांदी की हवेली
4. नाथूराम पोद्दार की हवेली
मण्डावा में ‘रामदेव चौखाणी की हवेली’ स्थित है। बिसाऊ में ‘नाथूराम पोद्दार की हवेली’ है। पिलानी में प्रसिद्ध ‘बिड़ला हवेली’ है और महनसर अपनी ‘सोने-चांदी की हवेली’ के लिए विख्यात है।
1. इसका निर्माण नवाब वजीउद्दौला खाँ द्वारा 1824 ई. में ‘शीशमहल’ के नाम से करवाया गया था।
2. इसकी दूसरी मंजिल का निर्माण नवाब मोहम्मद इब्राहिम अली खाँ ने 1870 ई. में करवाया था।
3. दूसरी मंजिल बनने के बाद इसे ‘दीवान-ए-खास’ के नाम से जाना जाने लगा।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?
सुनहरी कोठी (मुबारक महल) के बारे में दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। इसे प्राचीन काल में ‘ज़रगिनार’ भी कहा जाता था और यह पूर्णतया इस्लामिक शैली में निर्मित है।
बड़े मियाँ की हवेली, पच्चीसां हवेली, पोकरण हवेली, पुष्य हवेली और राखी हवेली जोधपुर में स्थित हैं। जबकि ‘लालचन्द ढड्ढा की हवेली’ फलोदी में स्थित है।
1. शेखावाटी की विशिष्ट हवेलियों में सामान्यतः 2 आंगन होते थे।
2. इनमें ‘प्रक्षेपित बालकनी’ (Projected Balcony) का प्रयोग सजावट और बाहर देखने वाले प्लेटफार्म के रूप में किया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सत्य है/हैं?
दिए गए दोनों कथन शेखावाटी अंचल की राजस्थानी वास्तुकला की प्रमुख विशेषताएं हैं। हवेलियों में दो आंगन होना और प्रक्षेपित बालकनी का निर्माण इनकी विशिष्ट पहचान है।
नथमल की हवेली का निर्माण जैसलमेर के प्रधानमंत्री नथमल ने करवाया था, परन्तु इसके शिल्पकार ‘लालू और नाथा’ नामक दो भाई थे। इस हवेली की नक्काशी बहुत ही बारीक और आकर्षक है।
पुरोहित जी की हवेली उदयपुर में नहीं बल्कि जयपुर में स्थित है। अतः विकल्प D असंगत है। उदयपुर में मोहन सिंह जी की हवेली और बागौर की हवेली प्रमुख हैं।
(a) श्री माधोपुर
(b) लक्ष्मणगढ़
(c) रामगढ़
1. केड़िया एवं राठी की हवेली
2. पंसारी की हवेली
3. खेमका सेठों की हवेली
पंसारी की हवेली श्री माधोपुर (सीकर) में है। लक्ष्मणगढ़ में केड़िया एवं राठी की हवेली (तथा बिनाणियों की हवेली) है। रामगढ़ में खेमका सेठों की हवेली (तथा गोयनका सेठी की हवेली) स्थित है।
चित्र में दिए गए तथ्य के अनुसार, ‘हवेली’ शब्द का शाब्दिक अर्थ ‘बंद जगह’ है और इसका प्रयोग भारत में पहली बार राजस्थान में किसी ऐतिहासिक और वास्तुशिल्प महत्ता के बड़े “निजी आवास” (Private Residence) के लिए प्रयुक्त किया गया था।
चूरू जिले के सुजानगढ़ कस्बे में सुराणों के हवामहल, दानचन्द चौपड़ा की हवेली, रामविलास गोयनका की हवेली और मन्त्रियों की मोटी हवेली प्रमुख आकर्षण का केंद्र हैं।
1. बच्छावतों की हवेली
2. रामपुरिया हवेली
3. कोठारी हवेली
4. गुलेच्छा हवेली
उपर्युक्त हवेलियाँ किस जिले में स्थित हैं?
दी गई सभी हवेलियाँ (बच्छावतों की हवेली, रामपुरिया हवेली, कोठारी हवेली, गुलेच्छा हवेली और सेठिया की हवेलियाँ) बीकानेर जिले में स्थित हैं।
उदयपुर में पिछोला झील के किनारे स्थित ‘बागौर की हवेली’ राजस्थानी संस्कृति का एक बड़ा संग्रहालय है, जिसमें आकर्षण का मुख्य केंद्र यहाँ सुरक्षित रखी ‘विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी’ है।
सेठ जयदयाल केड़िया, नाथूराम पोद्दार, हीरा राम बनारसी और सीताराम सिंगतिया की हवेलियाँ ‘बिसाऊ’ में हैं। जबकि ‘सागरमल लाड़िया की हवेली’ और ‘रामदेव चौखाणी की हवेली’ मण्डावा में स्थित हैं।
सुनहरी कोठी जिसे शुरुआत में शीशमहल के नाम से बनवाया गया था, उसका प्राचीन और मूल नाम ‘ज़रगिनार’ था। बाद में इसे मुबारक महल और सुनहरी कोठी के रूप में प्रसिद्धि मिली।
शेखावाटी अंचल में ‘नवलगढ़’ (झुंझुनूं) में सर्वाधिक हवेलियाँ स्थित हैं। इसी सघनता और वास्तुशिल्प की प्रचुरता के कारण इसे ‘हवेलियों का नगर’ और ‘शेखावाटी की स्वर्ण नगरी’ कहा जाता है।
(a) सालिम सिंह की हवेली
(b) पटवों की हवेली
1. मोती महल व जहाज महल उपनाम
2. पत्थर की जालीदार खिड़कियों वाली 50 वर्ष में बनी हवेली
सालिम सिंह की हवेली अपनी नौ मंजिलों के कारण ‘मोती महल’ व ‘जहाज महल’ कहलाती है। वहीं, पटवों की हवेली अपनी पत्थर की खिड़कियों और 50 साल के निर्माण काल के लिए जानी जाती है।
दिए गए तथ्यों के अनुसार भागोरिया की हवेली, भगतों की हवेली, पोद्दार की हवेली और लालधर जी व धरका जी की हवेली नवलगढ़ में स्थित हैं। विकल्प A मण्डावा और विकल्प B व D बिसाऊ की हवेलियाँ हैं।
मानचित्र में दिए गए स्पष्ट उल्लेख के अनुसार ‘निहाल टॉवर’ धौलपुर जिले में स्थित है और यह एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक घंटाघर (Clock Tower) है।
जयपुर में पुरोहित जी की हवेली, चुरसिंह जी की हवेली, रत्नाकर भट्ट पुण्डरीक की हवेली और मथुरा वालों की हवेली स्थित हैं। मोहन सिंह जी की हवेली उदयपुर में, लालचन्द ढड्ढा की हवेली फलोदी में और बड़े देवता की हवेली कोटा में है।
पटवों की हवेली अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए जानी जाती है जो मुख्य रूप से भारत, सिंध, यहूदी व मुगल स्थापत्य कला का एक बहुत ही सुंदर और दुर्लभ नमूना है।
(a) मन्त्रियों की मोटी हवेली
(b) सेठिया की हवेलियाँ
(c) बिनाणियों की हवेली
(d) गोयनका सेठी की हवेली
1. बीकानेर
2. सुजानगढ़
3. रामगढ़
4. लक्ष्मणगढ़
मन्त्रियों की मोटी हवेली सुजानगढ़ (चूरू) में है। सेठिया की हवेलियाँ बीकानेर में हैं। बिनाणियों की हवेली लक्ष्मणगढ़ (सीकर) में है और गोयनका सेठी की हवेली रामगढ़ (सीकर) में स्थित है।
सुनहरी कोठी की आधारशिला (शीशमहल) 1824 में नवाब वजीउद्दौला खाँ ने रखी थी, परन्तु इसकी दूसरी मंजिल का निर्माण 1870 ई. में नवाब मोहम्मद इब्राहिम अली खाँ ने करवाया था जिसे दीवान-ए-खास कहा जाता है।
पच्चीसां हवेली, राखी हवेली और बड़े मियाँ की हवेली जोधपुर में स्थित हैं। ‘मोहन सिंह जी की हवेली’ झीलों की नगरी उदयपुर में स्थित है।
कारण (R): शेखावाटी क्षेत्र में सर्वाधिक हवेलियाँ नवलगढ़ में ही स्थित हैं।
सही विकल्प का चयन करें:
कथन और कारण दोनों सत्य हैं। नवलगढ़ में हवेलियों की संख्या पूरे शेखावाटी क्षेत्र में सबसे अधिक है, इसी सटीक कारण से इसे हवेलियों का नगर और शेखावाटी की स्वर्ण नगरी कहा जाता है।
यह युग्म असंगत है क्योंकि ‘केसरदेव की हवेली’ सीधे झुंझुनूं (शहर) में स्थित है, जबकि महनसर अपनी प्रसिद्ध ‘सोने-चांदी की हवेली’ के लिए जाना जाता है।
जैसलमेर के प्रधानमंत्री सालिम सिंह ने इस हवेली का निर्माण करवाया था। इसकी नौ मंजिलों और विशिष्ट आकार के कारण ही इसे मोती महल और जहाज महल कहा जाता है।
झाला जी की हवेली और बड़े देवता की हवेली हाड़ौती अंचल के कोटा जिले में स्थित प्रसिद्ध ऐतिहासिक इमारतें हैं।
लक्ष्मणगढ़ में बिनाणियों की हवेली, रोनेड़ी वालों की हवेली तथा केड़िया एवं राठी की हवेली स्थित हैं। पंसारी की हवेली श्री माधोपुर में और खेमका/गोयनका सेठी की हवेलियाँ रामगढ़ में हैं।
जैसलमेर की पटवों की हवेली का निर्माण गुमानचन्द पटवा ने करवाया था। यह 5 अलग-अलग हवेलियों का एक समूह है जिसे बनने में लगभग आधी सदी (50 वर्ष) का समय लगा था।
लालचन्द ढड्ढा की हवेली मूल रूप से फलोदी में स्थित है जो अपनी नक्काशी और स्थापत्य के लिए मारवाड़ अंचल में प्रसिद्ध है।
बागौर की हवेली (उदयपुर) एक महत्वपूर्ण संग्रहालय है जिसका मुख्य आकर्षण यहाँ सुरक्षित रूप से रखी गई ‘विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी’ है, जो राजस्थानी संस्कृति का प्रतीक है।
1. बच्छावतों की हवेली और रामपुरिया हवेली बीकानेर में स्थित हैं।
2. कोठारी हवेली और गुलेच्छा हवेली भी बीकानेर की स्थापत्य कला का हिस्सा हैं।
3. सुराणों के हवामहल का संबंध भी बीकानेर जिले से है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सत्य है/हैं?
कथन 1 और 2 पूर्णतः सत्य हैं। बीकानेर में बच्छावतों की हवेली, रामपुरिया हवेली, कोठारी हवेली, गुलेच्छा हवेली और सेठिया की हवेलियाँ स्थित हैं। कथन 3 असत्य है क्योंकि सुराणों के हवामहल सुजानगढ़ (चूरू) में स्थित हैं।
झुंझुनूं के बिसाऊ कस्बे में सेठ जयदयाल केड़िया की हवेली, नाथूराम पोद्दार की हवेली, हीराराम बनारसी की हवेली और सीताराम सिंगतिया की हवेली स्थित हैं।
कारण (R): यह विश्व की एकमात्र ऐसी हवेली है जिसका संपूर्ण निर्माण एक ही नक्षत्र (पुष्य नक्षत्र) में हुआ है।
सही विकल्प का चयन करें:
जोधपुर की पुष्य हवेली का निर्माण केवल पुष्य नक्षत्र काल में ही किया गया था। यही कारण है कि यह विश्व की एकमात्र ऐसी हवेली है जो एक ही नक्षत्र में बनी है, अतः कारण कथन की सही पुष्टि करता है।
जयपुर में मुख्य रूप से पुरोहित जी की हवेली, चुरसिंह जी की हवेली, रत्नाकर भट्ट पुण्डरीक की हवेली और मथुरा वालों की हवेली (नक्कालों की हवेली) स्थित हैं।
टोंक के नवाबों द्वारा निर्मित यह ऐतिहासिक कोठी अपनी विशिष्ट बनावट के लिए जानी जाती है, जो कि पूर्णतया इस्लामिक शैली में बनी हुई है।
सुजानगढ़ (चूरू) में दानचन्द चौपड़ा की हवेली, सुराणों के हवामहल, रामविलास गोयनका की हवेली और मन्त्रियों की मोटी हवेली प्रमुख हैं। पंसारी की हवेली श्री माधोपुर में है।
विकल्प C असत्य है क्योंकि लालू और नाथा शिल्पकारों ने ‘नथमल की हवेली’ का निर्माण किया था, न कि पटवों की हवेली का। अन्य सभी कथन पटवों की हवेली के लिए सही हैं।
लालचन्द ढड्ढा की हवेली फलोदी में स्थित है जो अब एक नया जिला बन चुका है, जबकि बड़े मियाँ, पच्चीसां, राखी, पोकरण और पुष्य हवेली जोधपुर में स्थित हैं।
रामदेव चौखाणी की हवेली नवलगढ़ में नहीं बल्कि मण्डावा में स्थित है। अन्य सभी हवेलियाँ नवलगढ़ में ही स्थित हैं जहाँ सर्वाधिक हवेलियाँ पाई जाती हैं।
(a) निहाल टॉवर
(b) झाला जी की हवेली
(c) बागौर की हवेली
(d) लालचन्द ढड्ढा की हवेली
1. उदयपुर
2. फलोदी
3. कोटा
4. धौलपुर
निहाल टॉवर धौलपुर का प्रसिद्ध घंटाघर है। झाला जी की हवेली कोटा में है। बागौर की हवेली (जहाँ सबसे बड़ी पगड़ी रखी है) उदयपुर में है और लालचन्द ढड्ढा की हवेली फलोदी में स्थित है।
प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने के लिए सही दिशा और सटीक अध्ययन सामग्री का होना बेहद जरूरी है। हमें उम्मीद है कि राजस्थान की हवेलियां MCQ का यह संग्रह आपकी तैयारी को एक नया मुकाम देगा।
सरकारी नौकरी की परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने के लिए इन सभी प्रश्नों का बार-बार अभ्यास करना बहुत फायदेमंद रहेगा। राजस्थान की प्रमुख हवेलियां और विशेष रूप से शेखावाटी की हवेलियां हमेशा से परीक्षाओं का एक खास विषय रही हैं, इसलिए इन ऐतिहासिक तथ्यों पर अच्छी पकड़ होना आवश्यक है।
आप इस राजस्थान की हवेलियां MCQ टेस्ट को अपने दोस्तों और स्टडी ग्रुप्स के साथ भी जरूर शेयर करें, जिससे वे भी अपनी तैयारी का सही आंकलन कर सकें। आगामी परीक्षाओं के लिए आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। ऐसे ही महत्वपूर्ण Rajasthan GK Haveliyan Questions के अभ्यास के लिए हमारी वेबसाइट से नियमित रूप से जुड़े रहें।








