Table Of Content
- 1 प्रस्तावना (Introduction)
- 2 राजस्थान में मानसून और वर्षा की स्थिति (Monsoon and Rainfall in Rajasthan)
- 3 राजस्थान को प्रभावित करने वाले जलवायु कारक – राजस्थान की जलवायु
- 4 भारतीय मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान के 5 जलवायु प्रदेश
- 5 वैज्ञानिकों द्वारा राजस्थान का जलवायु वर्गीकरण
- 6 राजस्थान के मौसम से जुड़ी महत्वपूर्ण शब्दावलियां और घटनाएं
- 7 राजस्थान की जलवायु के विशिष्ट और रोचक तथ्य (Key Facts & Extremes)
- 8 निष्कर्ष (Conclusion)
प्रस्तावना (Introduction)
किसी भी विस्तृत भू-भाग पर लंबी अवधि (सामान्यतः 30 वर्ष या उससे अधिक) के दौरान विभिन्न समयों में विविध मौसमों की औसत अवस्था को उस स्थान की जलवायु (Climate) कहा जाता है। राजस्थान भारत का सबसे बड़ा राज्य है और इसकी भौगोलिक विविधता यहाँ की जलवायु को बेहद रोचक और जटिल बनाती है।
चूंकि राजस्थान का अधिकांश भाग कर्क रेखा (Tropic of Cancer) के उत्तर में स्थित है, इसलिए यह मुख्य रूप से ‘उष्ण शीतोष्ण कटिबंध’ (Sub-tropical zone) में आता है। तापमान की दृष्टि से इसे ‘उष्ण कटिबंध’ में भी रखा जाता है। राजस्थान अपनी शुष्कता, कम वर्षा और उच्च तापमान के लिए जाना जाता है, लेकिन यहाँ जलवायु में क्षेत्रीय स्तर पर बहुत अधिक भिन्नता पाई जाती है।
इस आर्टिकल में हम राजस्थान की जलवायु के आधारभूत तत्वों, मौसम विभाग द्वारा किए गए सामान्य वर्गीकरण और दुनिया के प्रसिद्ध भूगोलवेत्ताओं (जैसे कोपेन, थार्नवेट और ट्रिवार्था) द्वारा किए गए वैज्ञानिक जलवायु वर्गीकरण का विस्तार से अध्ययन करेंगे।
राजस्थान में मानसून और वर्षा की स्थिति (Monsoon and Rainfall in Rajasthan)
‘मानसून’ (Monsoon) शब्द मूल रूप से अरबी भाषा के ‘मौसिम’ शब्द से बना है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘मौसम’ होता है। राजस्थान की जलवायु पूरी तरह से मानसूनी हवाओं पर निर्भर करती है।
- वर्षा का औसत: राजस्थान में वार्षिक वर्षा का औसत लगभग 57.51 सेंटीमीटर है। जहाँ पश्चिमी राजस्थान में औसत वर्षा मात्र 313 मिमी. होती है, वहीं पूर्वी राजस्थान में यह औसत 675 मिमी. तक पहुँच जाता है।
- मानसून का प्रवेश: राजस्थान में सर्वप्रथम अरब सागरीय मानसून से वर्षा होती है। अरब सागरीय शाखा वर्षा का मुख्य स्रोत है, लेकिन राज्य में अधिकांश वर्षा बंगाल की खाड़ी से आने वाले मानसून से होती है।
- ग्रीष्मकालीन मानसून: राजस्थान में होने वाली वर्षा के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी ग्रीष्मकालीन मानसूनी पवनें हिन्द महासागर से उत्पन्न होकर आती हैं।
- सर्वाधिक वर्षा वाले क्षेत्र: अरब सागरीय मानसून से सर्वाधिक औसत वर्षा बांसवाड़ा जिले में होती है, जबकि बंगाल की खाड़ी के मानसून से सर्वाधिक औसत वर्षा झालावाड़ जिले में होती है।
- वर्षा की अवधि: राजस्थान में लगभग 90% वर्षा जुलाई से सितम्बर महीने के दौरान होती है। मानसून का प्रत्यावर्तन काल (लौटने का समय) अक्टूबर से मध्य नवम्बर तक रहता है।
महत्वपूर्ण तथ्य: भारतीय मौसम विभाग की वेधशाला राजस्थान के जयपुर नगर में स्थित है। साथ ही, राजस्थान में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशालय की स्थापना 4 सितम्बर, 2019 को की गई थी।
राजस्थान को प्रभावित करने वाले जलवायु कारक – राजस्थान की जलवायु
राजस्थान की जलवायु को कई भौगोलिक कारक प्रभावित करते हैं:
- अरावली पर्वतमाला की स्थिति: अरावली पर्वतमाला मानसून की दिशा (दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व) के समानांतर स्थित है, जिसके कारण मानसूनी हवाएं बिना टकराए आगे निकल जाती हैं और पश्चिमी राजस्थान सूखा रह जाता है।
- समुद्र तल से ऊँचाई और दूरी: महासागरीय भागों से अत्यधिक दूरी होने के कारण यहाँ तक पहुँचते-पहुँचते मानसूनी हवाओं की नमी कम हो जाती है।
- रेतीला धरातल: पश्चिमी राजस्थान में रेतीली मिट्टी पाई जाती है, जो बहुत जल्दी गर्म और बहुत जल्दी ठंडी होती है, जिससे यहाँ तापांतर (Temperature difference) बहुत अधिक पाया जाता है।
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान के 5 जलवायु प्रदेश
भारतीय मौसम विभाग ने वर्षा, तापमान और आर्द्रता (Humidity) के आधार पर राजस्थान को मुख्य रूप से 5 जलवायु प्रदेशों में विभाजित किया है:
1. शुष्क मरुस्थलीय जलवायु प्रदेश (Arid Climate)
- विस्तार: यह प्रदेश पश्चिमी राजस्थान में स्थित है। इसमें मुख्य रूप से दक्षिणी गंगानगर, पश्चिमी बीकानेर, जोधपुर, उत्तरी बाड़मेर और जैसलमेर जिले आते हैं।
- तापमान: ग्रीष्मकाल में यहाँ का तापमान 34°C से 40°C तक और शीतकाल में 12°C से 16°C के बीच रहता है।
- वर्षा: यहाँ वर्षा की मात्रा नाममात्र यानी 0 से 20 सेमी. तक होती है।
- विशेषता: यहाँ दैनिक और वार्षिक तापांतर बहुत अधिक होता है। यहाँ बालुका स्तूप (Sand dunes) पाए जाते हैं।
- मिट्टी व वनस्पति: यहाँ एंटीसोल (Antisol) मृदा और मरुद्भिद यानी जीरोफाइट (Xerophyte) प्रकार की कटीली वनस्पति पाई जाती है। इसका प्रतिनिधि जिला जैसलमेर है।
2. अर्द्ध-शुष्क / स्टेपी जलवायु प्रदेश (Semi-Arid Climate)
- विस्तार: बाड़मेर (उत्तरी भाग छोड़कर), जोधपुर (पश्चिमी भाग छोड़कर), सीकर, चूरू, झुंझुनूं, पाली, नागौर, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर।
- तापमान: गर्मियों में 30°C – 36°C और सर्दियों में 10°C – 17°C।
- वर्षा: औसत वर्षा 20 से 40 सेमी. के मध्य होती है।
- मिट्टी व वनस्पति: यहाँ रेतीली बलुई मृदा (एरिडीसोल – Aridisol) पाई जाती है। वनस्पति स्टेपी (Steppe) प्रकार की होती है, जिसमें घास के मैदान और कंटीली झाड़ियाँ शामिल हैं। इसका प्रतिनिधि जिला जोधपुर है।
3. उप-आर्द्र जलवायु प्रदेश (Sub-Humid Climate)
- विस्तार: जयपुर, अलवर, भरतपुर, दौसा, टोंक और अजमेर भीलवाड़ा का क्षेत्र।
- तापमान: ग्रीष्मकाल में 28°C – 34°C और शीतकाल में 12°C – 18°C।
- वर्षा: यहाँ वर्षा की मात्रा 40 से 60 सेमी. तक होती है।
- मिट्टी व वनस्पति: यहाँ जलोढ़ मृदा (एल्फीसोल – Alfisol) पाई जाती है। वनस्पति में मिश्रित पतझड़ वन (धोंकड़ा वन) प्रमुख हैं। इसका प्रतिनिधि जिला जयपुर है।
4. आर्द्र जलवायु प्रदेश (Humid Climate)
- विस्तार: पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के जिले जैसे धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, बूँदी, चित्तौड़गढ़, राजसमंद और सिरोही।
- तापमान: गर्मियों में 30°C – 40°C और सर्दियों में 10°C – 17°C।
- वर्षा: वर्षा का औसत 60 से 80 सेमी. होता है।
- मिट्टी व वनस्पति: यहाँ लाल-काली मृदा (इनसेप्टीसोल – Inceptisol) मिलती है। वनों में साल, खैर और तेंदू जैसे मिश्रित वन पाए जाते हैं। इसका प्रतिनिधि जिला सवाई माधोपुर है।
5. अति-आर्द्र जलवायु प्रदेश (Very Humid Climate)
- विस्तार: यह राजस्थान का सबसे अधिक वर्षा वाला क्षेत्र है जिसमें डूंगरपुर, बाँसवाड़ा, उदयपुर, प्रतापगढ़, कोटा, बारां, झालावाड़ और माउण्ट आबू शामिल हैं।
- तापमान: ग्रीष्मकाल में 30°C – 34°C और शीतकाल में 12°C – 18°C।
- वर्षा: यहाँ सर्वाधिक वर्षा 80 से 100 सेमी. तक होती है।
- मिट्टी व वनस्पति: यहाँ मध्यम काली मृदा (वर्टीसोल – Vertisol) पाई जाती है। वनस्पति में मानसूनी सवाना और सदाबहार वनस्पति (जैसे बांस, सागवान, रोजवुड) की प्रधानता है। इसका प्रतिनिधि जिला झालावाड़ है।
वैज्ञानिकों द्वारा राजस्थान का जलवायु वर्गीकरण
विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे RPSC, RSMSSB) की दृष्टि से विश्व के प्रसिद्ध भूगोलवेत्ताओं द्वारा किया गया राजस्थान का जलवायु वर्गीकरण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
A. डॉ. व्लादिमीर कोपेन का वर्गीकरण (Koeppen’s Classification)
जर्मनी के डॉ. कोपेन ने ‘वनस्पति’ (Vegetation) को आधार मानकर राजस्थान की जलवायु को 4 भागों में बाँटा है:
- BWhw (उष्ण कटिबंधीय शुष्क जलवायु): इसमें गंगानगर, हनुमानगढ़, जैसलमेर, पश्चिमी बीकानेर और उत्तरी-पश्चिमी जोधपुर शामिल हैं। यहाँ औसत वर्षा 10-20 सेमी. है। वनस्पति ‘जीरोफाइट’ (मरुद्भिद) और मृदा एंटीसोल पाई जाती है। (प्रतिनिधि जिला: बीकानेर)
- BShw (अर्द्धशुष्क / स्टेपी जलवायु): बाड़मेर, जालौर, नागौर, चूरू, सीकर आदि इसके अंतर्गत आते हैं। वर्षा 20-40 सेमी. और वनस्पति स्टेपी (कंटिली झाड़ियाँ व घास) है। मृदा एरिडीसोल है। (प्रतिनिधि जिला: नागौर)
- Cwg (उपआर्द्र / मानसूनी जलवायु): यह कोपेन के अनुसार सबसे बड़ा जलवायु प्रदेश है। इसमें जयपुर, अलवर, दौसा, भरतपुर, करौली शामिल हैं। औसत वर्षा 60-80 सेमी. होती है। यहाँ एल्फीसोल मृदा और मिश्रित पतझड़ (धोंकड़ा) वन पाए जाते हैं। (प्रतिनिधि जिला: टोंक)
- Aw (उष्ण कटिबंधीय आर्द्र जलवायु): बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, झालावाड़ और सिरोही जिले। वर्षा 80-90 सेमी.। यहाँ लाल लोमी और मध्यम काली मृदा पाई जाती है तथा सवाना तुल्य वनस्पति मिलती है। (प्रतिनिधि जिला: बाँसवाड़ा)
B. थार्नवेट का वर्गीकरण (Thornthwaite’s Classification – 1931)
थार्नवेट ने अपने वर्गीकरण का मुख्य आधार वर्षा, वाष्पीकरण और तापमान को माना है। इन्होंने भी राजस्थान को 4 भागों में बांटा:
- EA’d (उष्ण शुष्क / मरुद्भिद जलवायु): जैसलमेर, पश्चिमी जोधपुर, पश्चिमी बीकानेर और उत्तर-पश्चिमी बाड़मेर। औसत वर्षा मात्र 10-15 सेमी.। यहाँ मरुस्थलीय वनस्पति मिलती है। (प्रतिनिधि जिला: जैसलमेर)
- DB’w (अर्द्धशुष्क / मिश्रित जलवायु): गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर और चूरू का अधिकांश भाग। औसत वर्षा 15-20 सेमी.। (प्रतिनिधि जिला: बीकानेर)
- DA’w (उष्ण आर्द्र / अर्द्ध शुष्क जलवायु): यह राजस्थान का सबसे बड़ा जलवायु क्षेत्र है। बाड़मेर, पाली, अजमेर, बूँदी, सिरोही, जयपुर आदि इसमें आते हैं। वर्षा 50-80 सेमी. होती है। (प्रतिनिधि जिला: अजमेर)
- CA’w (उपआर्द्र जलवायु): दक्षिणी-पूर्वी उदयपुर, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, कोटा, झालावाड़ आदि। वर्षा 80-100 सेमी.। यहाँ सवाना व मानसूनी वनस्पति पाई जाती है। (प्रतिनिधि जिला: डूंगरपुर)
C. ट्रिवार्था का वर्गीकरण (Trewartha’s Classification)
ट्रिवार्था का वर्गीकरण काफी हद तक कोपेन के वर्गीकरण का ही संशोधित रूप माना जाता है।
- Bwh (शुष्क मरुस्थलीय): जैसलमेर, उत्तर-पश्चिमी बीकानेर। वर्षा 10-20 सेमी.। (प्रतिनिधि: जैसलमेर)
- Bsh (उष्ण एवं अर्द्ध उष्ण कटिबंधीय स्टेपी): सर्वाधिक जिलों वाला प्रदेश (उदयपुर, हनुमानगढ़, राजसमंद, जालौर, जोधपुर, पाली आदि)। वर्षा 50-60 सेमी.। (प्रतिनिधि: नागौर)
- Caw (अर्द्ध उष्ण आर्द्र): कोटा, बूँदी, सवाई माधोपुर, करौली, भरतपुर। वर्षा 50-80 सेमी.। (प्रतिनिधि: सवाई माधोपुर)
- Aw (उष्ण कटिबंधीय आर्द्र): बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, झालावाड़, बारां। वर्षा 80-100 सेमी.। (प्रतिनिधि: डूंगरपुर)
राजस्थान के मौसम से जुड़ी महत्वपूर्ण शब्दावलियां और घटनाएं
राजस्थान की स्थानीय जलवायु में कुछ विशिष्ट मौसमी घटनाएं घटित होती हैं, जो परीक्षा और सामान्य ज्ञान दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं:
- मावट (Mawath): राजस्थान में शीतकाल (सर्दियों) में भूमध्य सागरीय चक्रवातों (पश्चिमी विक्षोभों – Western Disturbances) के कारण जो वर्षा होती है, उसे स्थानीय भाषा में ‘मावट’ कहते हैं। यह वर्षा रबी की फसलों, विशेषकर गेहूँ की फसल के लिए ‘वरदान’ (Golden Drops) मानी जाती है। इसके अलावा यह सरसों और चने के लिए भी लाभदायक है।
- लू (Loo): ग्रीष्म ऋतु (मई-जून) में पश्चिमी राजस्थान में चलने वाली अत्यंत गर्म और शुष्क हवाओं को ‘लू’ कहा जाता है।
- भभूल्या (Bhabhulya): गर्मियों के दौरान सूर्य की प्रखर किरणों से जब भू-भाग अत्यधिक गर्म हो जाता है, तो वहां निम्न वायुदाब का केंद्र बन जाता है जिससे संवाहनिक धाराएं उत्पन्न होती हैं। इसके परिणामस्वरूप उठने वाले वायु भंवर या धूल भरे चक्रवातों को राजस्थानी भाषा में ‘भभूल्या’ कहते हैं।
- छप्पनिया अकाल: वर्ष 1899 ई. (विक्रम संवत 1956) में राजस्थान में एक भयंकर अकाल पड़ा था, जिसे इतिहास में ‘छप्पनिया अकाल’ के नाम से जाना जाता है।
राजस्थान की जलवायु के विशिष्ट और रोचक तथ्य (Key Facts & Extremes)
नक्शे और आंकड़ों के आधार पर राजस्थान के मौसम के कुछ सबसे चरम और महत्वपूर्ण तथ्य इस प्रकार हैं:
तापमान और दिन-रात से जुड़े तथ्य:
- राज्य का सबसे गर्म महीना जून और सबसे ठंडा महीना जनवरी होता है।
- राजस्थान का औसत वार्षिक तापमान लगभग 38°C रहता है।
- राजस्थान या देश का सबसे लंबा दिन 21 जून होता है (इसी दिन उत्तरी गोलार्ध में सूर्य कर्क रेखा पर सीधा चमकता है)।
- सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात 22 दिसम्बर को होती है। यह राजस्थान का सबसे ठंडा दिन भी माना जाता है।
- राजस्थान में न्यूनतम दैनिक तापांतर जुलाई और अगस्त माह में पाया जाता है।
स्थान और जिलों के आधार पर तथ्य:
- सर्वाधिक शुष्क स्थान: फलौदी।
- सर्वाधिक गर्म और सर्वाधिक ठंडा जिला: चूरू। (रेतीले धरातल के कारण चूरू गर्मियों में सर्वाधिक गर्म और सर्दियों में सर्वाधिक ठंडा रहता है)।
- सबसे कम वर्षा वाला जिला: जैसलमेर।
- सर्वाधिक आंधियों वाला जिला: श्रीगंगानगर (यहाँ साल में औसतन 27 दिन आंधियां चलती हैं)।
- सर्वाधिक वर्षा वाला जिला: झालावाड़। (इसे राजस्थान का चेरापूंजी भी कहा जाता है)।
- सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान: माउण्ट आबू (सिरोही)। यह राजस्थान का सबसे ठंडा स्थान भी है।
- राजस्थान का बर्खोयांस्क: माउण्ट आबू को विश्व के सबसे ठंडे स्थान ‘बर्खोयांस्क’ (रूस) की तर्ज पर ‘राजस्थान का बर्खोयांस्क’ भी कहा जाता है।
- जलवायु में सर्वाधिक विषमता वाला जिला: जैसलमेर।
निष्कर्ष (Conclusion)
राजस्थान की जलवायु केवल ‘गर्म और शुष्क’ होने तक सीमित नहीं है। पश्चिमी मरुस्थल की भयंकर गर्मी और सूखे से लेकर, दक्षिण-पूर्व में झालावाड़ और माउण्ट आबू की भारी बारिश और हरियाली तक, यह राज्य जलवायु की एक विस्तृत श्रृंखला (Spectrum) प्रस्तुत करता है। अरावली पर्वतमाला यहाँ की जीवन रेखा भी है और एक बड़ा जलवायु विभाजक (Climate Divide) भी। मौसम विभाग की 50 सेमी. समवर्षा रेखा राजस्थान को दो स्पष्ट जलवायु भागों में बांटती है। इन सभी जलवायु प्रदेशों का सीधा प्रभाव यहाँ की मिट्टी, वनस्पति, कृषि और अंततः यहाँ के लोगों की जीवनशैली पर पड़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. राजस्थान में सर्दियों में होने वाली वर्षा को क्या कहते हैं?
उत्तर: राजस्थान में सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभों (Western Disturbances) के कारण होने वाली वर्षा को ‘मावट’ कहा जाता है। यह रबी की फसल (विशेषकर गेहूं) के लिए अत्यंत लाभदायक होती है।
Q2. कोपेन के जलवायु वर्गीकरण के अनुसार राजस्थान का सबसे बड़ा जलवायु प्रदेश कौन सा है?
उत्तर: कोपेन के अनुसार राजस्थान का सबसे बड़ा जलवायु प्रदेश Cwg (उपआर्द्र / मानसूनी जलवायु प्रदेश) है।
Q3. राजस्थान का सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान और जिला कौन सा है?
उत्तर: राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान माउण्ट आबू (सिरोही) है, जबकि सर्वाधिक वर्षा वाला जिला झालावाड़ है।
Q4. राजस्थान में सर्वाधिक आंधियां किस जिले में चलती हैं?
उत्तर: राजस्थान में सर्वाधिक आंधियां श्रीगंगानगर जिले में चलती हैं (लगभग 27 दिन)।
Q5. राजस्थान में 50 सेमी. समवर्षा रेखा का क्या महत्व है?
उत्तर: 50 सेमी. समवर्षा रेखा अरावली के समानांतर गुजरती है और यह राजस्थान को दो स्पष्ट जलवायु भागों (पूर्वी आर्द्र और पश्चिमी शुष्क/अर्द्ध-शुष्क) में विभाजित करती है।












